पाटन। 100 दिनों में महंगाई कम करने की वादा करने वाली मोदी सरकार महंगाई तो कम नहीं कर पाई मगर पिछले 7 सालों में वस्तुओं के दाम दुगनी जरूर कर दिये। अब जनता कोरोना से बच जाए तो उसे महंगाई निगल जाएगी।
लगातार निजी जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुओं के बढ़ते दामों की वजह से आम जनता की परेशानियों को देखकर केंद्र की मोदी सरकार को घेरते हुए पूर्व जिला पंचायत सभापति दुर्ग एवं किसान नेता राकेश ठाकुर ने कड़े शब्दों में मोदी सरकार की आलोचना किया है।
राकेश ठाकुर ने प्रेस को विज्ञप्ति के माध्यम ने बताया कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, दवाईयों, खाद्य तेलों, खाद्य पदार्थों, सड़क परिवहन, रेल यात्रा, सब्जियों के दाम दुगुने हुये। खेती के रासायनिक खादों के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं, एक तरफ खाद्य पदार्थो के दाम बढ़ रहे है और दूसरी ओर किसानों की आमदनी घटी है। खाद्य पदार्थो के दाम बढ़ने का फायदा बिचौलियों को मिला रहा है। किसानों को नहीं। खाद्य तेलों के दाम पिछले दो वर्ष में लगभग दुगुने हुये है। देश में खाद्य तेल का सबसे बड़ा निर्माता मोदी के प्रिय गौतम अडानी है। आप समझ सकते हैं खाद्य तेल के दामों को बढ़ने का सबसे ज्यादा फायदा अडानी को हो रहा। एक तरफ तो महंगाई बढ़ी, दूसरी तरफ मोदी सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण लोगों की कमाई घटी, रोजगार के संसाधन घटे , नौकरियां गयी, नोटबंदी जीएसटी से व्यापार – व्यवसाय तबाह हुये। कोरोना जैसी महामारी में मोदी सरकार की अकर्मण्यता के कारण इलाज और दवाईयों में लोगों की जमा पूंजी, जमीन जायदाद खत्म हो गया।
कोरोना के बाद महंगाई भी राष्ट्रीय आपदा साबित होने जा रही है पेट्रोल – डीजल, रसोई गैस और मिट्टी तेल के दाम रोज़ बढ़ा रहे हैं। खाने के तेलों के दाम दोगुने हो गए। रसोई पर बोझ अभी और बढ़ेगा। जब जनता की जेब में पैसा डालना चाहिए तब नरेंद्र मोदी जी जेबों पर डाका डाल रहे हैं।
पिछले डेढ़ साल से भारत की जनता कोरोना महामारी की मार झेल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अदूरदर्शी और जनविरोधी नीतियों ने कोरोना की बीमारी के समय में जीवन को और कठिन बनाया है। चाहे वह अचानक किया हुआ लॉकडाउन हो, अस्पतालों से लेकर ऑक्सीजन तक का इंतजाम हो या फिर वैक्सीन की नीति, हर जगह नरेंद्र मोदी की सरकार विफल दिखाई देती है। गलत नीतियों और व्यवस्था बनाने में विफलता की वजह से लाखों लोगों की जानें चली गई हैं। लाखों परिवार में कमाई करने वाला मुखिया ही चल बसा है। उद्योग और कारोबार ठप्प होने से रोजगार का संकट पैदा हो गया है। ऐसे समय में नरेंद्र मोदी की सरकार देश में महंगाई बढ़ाने में लगी हुई है। पेट्रोल , डीजल और केरोसिन के दाम हों या गैस सिलेंडर के खाने के तेल की कीमतें हों या फिर साधारण बीमारियों में काम में आने वाली दवाओं की , हर चीज लगातार महंगी होती जा रही है। हमें लगता है कि कोरोना महामारी से किसी तरह बच गए लोग अब महंगाई नाम की महामारी की चपेट में आने वाले हैं। एक राष्ट्रीय आपदा के बाद एक और राष्ट्रीय आपदा देश में आ गई है और इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हैं। आश्चर्य नहीं है कि किसी समय रसोई गैस की कीमत में पांच – सात रु की बढ़ोत्तरी होने पर गले में सिलेंडर टांगकर प्रदर्शन करने वाले भाजपा के नेता इस समय अनावश्यक विवादों के जरिए जनता का ध्यान भटकाने में लगे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम की वजह से पेट्रोल, डीजल की कीमत बढ़ने पर साइकिल पर सवार होकर सड़क पर उतरने वाले डॉ रमन सिंह इस समय फर्जी दस्तावेज़ दिखाकर लोगों को बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई षडयंत्र हो रहा है। दरअसल महंगाई नरेंद्र मोदी सरकार का असली षडयंत्र है और यह अपने प्रिय कोरोबारियों और उद्योगपतियों की जेबें भरने का तरीका है। जिस समय हमारे नेता राहुल गांधी जी लोगों को जेबों में पैसा डालने की बात कर रही है, जिस समय छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार लोगों के जेबों में कई योजनाओं से पैसे डाल रही है, उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की सरकार लोगों के जेबों पर डाका डालने में लगी हुई है।
अप्रैल 2014 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल थी। तब मनमोहन सिंह जी देश के प्रधानमंत्री थे और उन्होंने पेट्रोल – डीजल के दामों को बढ़ने नहीं दिया, उस समय पेट्रोल की कीमत 72 रुपए प्रति लीटर एवं डीजल की कीमत 55 रुपए प्रति लीटर थी। आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड आयल की कीमत 69.15 डॉलर प्रति बैरल है . जबकि रायपुर में पेट्रोल की कीमतें 92.76 रुपए प्रति लीटर एवं डीजल की कीमत 92.38 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है , देश के कुछ शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपए से भी ज्यादा हो गई है। मई महीने में ही पेट्रोल – डीजल के दाम में 16 बार बढ़ोत्तरी की गई और जून महीने में भी यह सिलसिला जारी है। सालों में क्रूड आयल की कीमतों में 36 प्रतिषत की कमी आयी है उसके बाद भी पेट्रोल के दामों में 31 प्रतिशत की और डीजल के दामों में 55 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पिछले एक साल में 30 मई 2020 से 30 मई 2021 के बीच पेट्रोल की कीमत में 18 / – प्रति लीटर एवं डीजल की कीमत में 19 / – प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। 2014 में जब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी तब पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 रुपए प्रति लीटर थी , जो कि वर्तमान में 32.90 रुपए प्रति लीटर है। 2014 में डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.56 रुपए प्रति लीटर थी जो वर्तमान में 31.80 रुपए प्रति लीटर है। यानी कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल लगभग चार गुना एक्साइज ड्यूटी बढ़ायी गयी जबकि डीजल पर 10 गुना से ज्यादा एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई। पेट्रोल और डीजल में टैक्स वृद्धि से केंद्र सरकार के राजस्व संग्रहण में 459 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आम आदमी के जेब पर डाका डालकर मोदी सरकार अपना खजाना भरने में लगी हुई है।
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में खाद्य तेलों के दामों में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस मूल्यवृद्धि ने खाद्य तेलों जैसे मूंगफली तेल , सरसों तेल , सोयाबीन तेल , सूरजमुखी तेल और पाम आयल के मूल्य वृद्धि के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. वनस्पति के दाम भी इसी तरह से बढ़े हैं।अगर सरसों तेल की बात करें तो मई 2020 में 1 लीटर सरसों तेल का दाम 90 रुपए प्रति लीटर था जो आज बढ़कर 200 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है , मतलब दुगुने से भी ज्यादा। इसी प्रकार पिछले साल 100 से 110 रुपए प्रति लीटर बिकने वाले दूसरे खाद्य तेलों की कीमतें वर्तमान में 200 तक पहुंच गई हैं, खाद्य तेलों की कीमतों में इस असामान्य वृद्धि ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
दवाओं की कीमतों में बेहिसाब वृद्धि। कोरोना काल में दवाओं की जितनी ज़रुरत लोगों को पड़ रही है, इससे पहले शायद भारत के इतिहास में कभी नहीं पड़ी होंगी। अंग्रेजी दवाओं में जीवन रक्षक सहित ऐसी कई दवाएं हैं जिन पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है, इनमें शुगर, ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी की दवाओं सहित 364 दवाएं सम्मिलित है, लेकिन अब वो दवाएं भी आम आदमी की पहुंच में नहीं हैं। केंद्र सरकार के अधीन होते हुए , दवा कंपनियां लगातार कीमतों में वृद्धि करती जा रही हैं, बल्क ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार , एंटीबायोटिक्स एजिथ्रोमाइसिन और ऑर्निडाजोल , बुखार की दवा निमेसुलाइड और पैरासिटामॉल की कीमतों में जनवरी से 60 से 190 प्रतिशत का उछाल आया है। मरीजों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पूरे देश में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत सस्ती जेनेरिक दवा की कई दुकानें खोली गईं, मानक के अनुसार यहां 650 दवाइयां होनी चाहिए मगर किसी भी केंद्र पर भी जरूरी दवाओं का बराबर अभाव बना रहता है।
कोरोना के बाद अब महंगाई की राष्ट्रीय आपदा – पेट्रोल – डीजल के दामों में वृद्धि से परिवहन महंगा हो जाता है यह सब जानते हैं, यानी आने वाले दिनों में सब्जी भाजी से लेकर राशन पानी तक सबका परिवहन महंगा होगा और कीमतें बेतहाशा बढ़ेगी। यानी आने वाले दिनों में रसोई गैस , मिट्टी के तेल , खाने के तेल के अलावा सब्जी भाजी और राशन भी महंगे दामों में मिलने वाला है, दवाएं महंगी हो ही चुकी हैं, कपड़े लत्ते भी महंगे होने वाले हैं। इसका मतलब साफ है कि नरेंद्र मोदी जी ने सारे इंतजाम कर दिए हैं कि भारत की जनता कोरोना के मार से उबरने से पहले ही महंगाई की चपेट में आ जाए।
नरेंद्र मोदी जी की सरकार नहीं बता रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम अगर नहीं बढ़ रहे हैं तो पेट्रोल – डीजल के दाम क्यों बढ़ रहे हैं, क्यों सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपना खजाना भरने में लगी हुई है?
भारतीय जनता पार्टी के नेता क्यों अनावश्यक बयानबाजी करके जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं यह अब किसी से छिपा नहीं है। हम मांग करते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह , नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर, बृजमोहन अग्रवाल सहित सभी भाजपा नेता महंगाई पर अपना रुख स्पष्ट करें और जनता से माफी मांगें कि कोरोना महामारी के काल में उनकी सरकार महंगाई बढ़ाने में लगी हुई है।
