धमतरी। जिले के कुरूद ब्लॉक अन्तर्गत ग्राम सिलौटी मे एक कृषक आपदा काल मे भी जैविक खेती करके इस भयावक स्थिति मे अपनी कड़ी मेहनत से लोगो को बतला दिया कि कृषि कार्य मेहनत और तकनीकी सहायता से की जाए तो बंजर भूमि भी खेती योग्य बन जाती है।
वैसे धमतरी जिला कृषि कार्यो अर्थात धान की फसल के लिए बहुत विख्यात है लेकिन कोरोना काल के चलते कृषि कार्यो पर भी इसका असर होने लगा ऐसे मे रिलायंस फाउंडेशन पिछले दो वर्षो से ग्राम सिलौटी मे अपना तकनीकी सहायता के माध्यम से अपना कृषि सम्बन्धी सहायता दे रहा है तभी तो एक कृषक इस तकनीकी सहायता का लाभ लेते हुए का एक कृषक श्री गणेश्वर साहू ने जैविक खेती कर इतिहास रच दिया।
गणेश्वर साहू ने बताया कि वह पहले से सहायक रूप से खेती करता आ रहा था परंतु अब पूर्ण रूप से 4 वर्षो से खेती कर रहा है घर की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी तथा शिक्षा 12 वीं तक होने के कारण उसे नोकरी नही मिल पाया उसने कृषि को ही अपना भविष्य मानते हुए तथा अपने परिवार के 5 सदस्यों का जिम्मीदारी जिसमे स्वम गणेश्वर और उनके माता पिता और 1 छोटा भाई 1 बहन है | अभी उनके परिवारीक खर्च किसानी और रोजी मजदूरी के माध्यम से चलता था |
गणेश्वर साहू ने बताया कि वो रिलायंस फाउंडशन से पिछले एक वर्षो से जुड़ा हुआ है लेकिन जनकारी के अभाव मे गणेश्वर साहू अच्छे से कृषि कार्य नही कर पा रहा था फिर एक दिन रिलायंस फाउंडेशन के कार्यकर्ता द्वारा 10.8.2020 ऑडियो कॉन्फ्रेंस की जनकारी मिली उस समय कोरोना काल का लॉक डाउन पुरे देश मे लगा था जिसमे वह समिलित हुई उसने जैविक खेती के बारे मे जनकारी ली और वह खेती करने लगा. फिर उसे मिली जनकारी का उपयोग करते चला गया फिर उसे हमारे कृषि विभाग के विशेषज्ञ श्रीमान उगेंद्र पांडे जी ने उसके सवाल पर जैविक खेती की जनकारी देते हुए तना छेदक के लिए निमास्त्र, नीम खली का प्रयोग करने को कहा तथा धान की अच्छी पैदावरी के लिए शुरू से गृष्म कालीन जुताई, हरी खाद, गोबर खाद, गो मूत्र आदि विषयों के बारे मे पूर्ण जनकारी दी |उसके बाद वह रिलायंस फाउंडेशन की सेवा से प्रभावित हुये उसके बाद श्री गणेश्वर समय समय पर रिलायंस फाउंडेशन के विभिन्न कार्यक्रम मे समिलित होने लगे तथा कुछ टोल फ्री के माध्यम से जनकारी लेता गया |
उसके बाद श्री गणेश्वर साहू ने समय समय मे धान की जैविक खेती की जानकारी कृषि विशेषज्ञों से लेता गया फिर उसने अपने 2 एकड़ जमीन पर जैविक खेती कर कम से कम लागत पर धान का उत्पादन किया | जैविक धान का उत्पादनकर्ता होने के कारण उसका उत्पाद हाथो हाथ जल्द ही ज्यादा रुपयो मे बिका | उसने 2 एकड़ जमीन पर 32 क्विंटल धान पैदावार की जिसे उसने 3,000 रुपये क्विंटल की दर से बेच कर 96,000 रुपये की प्राप्ति हुई जिससे उसे अब अपनी जिंदगी और परिवार की आर्थिक स्थिति को विकास करने की राह दिखने लगा है उसने 96,000 मे से लागत की राशि काट कर अपने और अपनी बहन की शादी के लिए बैंक मे 70,000 जमा कर दिया है और इसी तरह खेती कर शादी के लिए पैसा एकत्रित करेगा |
वह अपने जीवन तथा परिवार के आर्थिक स्थिति में वृद्धि होने का पूर्ण रूप से श्रेय रिलायंस फाउंडेशन तथा कृषि विभाग को देते हुए आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद दिया और भविष्य मे इस तकनीक से जुड़े रहने तथा लाभ लेता रहुंगा कहा की यह सेवा जीवन का पहिया बदल देता है |
आपदा मे अवसर जैविक खेती बना कृषक का सहारा दिया कृषि विभाग और रिलायंस फाउंडेशन को धन्यवाद
