News24carate खबर का असर… आंध्रा में ईठ ठेकेदार द्वारा किडनैप जिले के मजदूर सरकारी दखलंदाजी के बैगर रिहा

? ब्यूरो रिपोर्ट विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद

गरियाबंद। जिले में मीडिया का असर साफ देखने को मिला है। मीडिया में खबरें प्रकाशित होते ही आंध्रा में बंधक जिले के मजदूर बिना सरकारी दखलंदाजी के रिहा हो गए है। पीड़ितों के परिजनों और जिले के जिम्मेदार अधिकारियों ने खुद मीडिया को इसकी जानकारी दी है। न्यूज़ 24 कैरेट ने भी इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

पीड़ितों के परिजनों के मुताबिक प्राप्त जानकारी के अनुसार आंध्रप्रदेश के आवापल्ली जिले में बंधक मजदूरों को रिहा कर दिया गया है। सभी मजदूर शुक्रवार को बस में सवार होकर अपने घर के लिए रवाना हो चुके है और आज शाम तक उनके गरियाबंद पहुंचने की उम्मीद है। जबकि जिला प्रशासन की टीम बंधकों को छुड़ाने रविवार को रवाना होने की तैयारी में जुटी है।

दरअसल 30 मार्च को देवभोग के मुंगझर निवासी एक बुजुर्ग ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अपने परिवार और आसपास के सदस्यों को आंध्रा में बंधक होने की जानकारी देते हुए उन्हें छुड़ाने की मांग की थी। 31 मार्च को मामले की जानकारी मीडिया तक पहुंची। मीडिया ने खबर को प्रमुखता से उठाया (जिसमे न्यूज़ 24 कैरेट भी शामिल है)। खबर का असर भी देखने मिला। एक अप्रैल की शाम होते तक बंधक मजदूरों को उनकी रकम के साथ रिहा कर दिए जाने की जानकारी सामने आने लगी। 02 अप्रैल की सुबह खुद के रिहा होने की जानकारी मजदूरों ने फोन पर अपने परिजनों को दी। जानकारी में ये भी बताया कि वे बस से अपने गांव के लिए निकल चुके है और शनिवार शाम तक गांव पहुंच जाएंगे। पीड़ितों के परिजनों ने यही जानकारी स्थानीय प्रशासन और मीडिया को दी।
जिला प्रशासन की इस मामले में बात की जाए तो यह मामला 30 मार्च को देवभोग एसडीएम के संज्ञान में आया। पीड़ित परिवार के एक बुजुर्ग ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर इसकी जानकारी दी। देवभोग एसडीएम के मुताबिक उसी दिन उन्होंने इसकी जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दी। जिला श्रम अधिकारी के मुताबिक मामले की सत्यता जांचने एवं पूछताछ के बाद बंधकों को छुड़ाकर लाने के लिए 02 अप्रैल को एक टीम गठित हुई। कोरोना नियमों का पालन एवं जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 4 मार्च को टीम आंध्रा के लिए रवाना होगी। वैसे बीते कुछ सालों में यह पहला मामला है जब बंधक मजदूरों को छुड़ाने के लिए टीम गठित करने में जिला प्रशासन को 2 दिन से ज्यादा का वक्त लगा हो। आखिर इतना वक्त क्यों लगा इसका जवाब तो जिले के जिम्मेदार ही दे सकते है।

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