प्रदेश की कांग्रेस सरकार अपराध पर अंकुश लगाने में असक्षम नजर आ रही है, छत्तीसगढ़ में आपराधिक गतिविधियां चरम पर-डॉ रामकुमार साहू

? ब्यूरो रिपोर्ट विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद

गरियाबंद:- सुशासन से तात्पर्य किसी सामाजिक-राजनैतिक ईकाई (जैसे नगर निगम, राज्य सरकार आदि) को इस प्रकार चलाना कि वह वांछित परिणाम दे,सुशासन के अन्तर्गत बहुत सी चीजें आतीं हैं जिनमें अच्छा बजट,सही प्रबन्धन,कानून का शासन, सदाचार आदि हैं,इसके विपरीत पारदर्शिता की कमी या सम्पूर्ण अभाव,जंगल राज,लोगों की कम भागीदारी,भ्रष्टाचार का बोलबाला आदि दुःशासन के लक्षण हैं।
‘शासन’ शब्द में ‘सु’ उपसर्ग लग जाने से ‘सुशासन’ शब्द का जन्म होता है। ’सु’ उपसर्ग का अर्थ शुभ,अच्छा, मंगलकारी आदि भावों को व्यक्त करने वाला होता है। राजनीतिक और सामाजिक जीवन की भाषा में सुशासन की तरह लगने वाले कुछ और बहुप्रचलित-घिसेपिटे शब्द हैं जैसे – प्रशासन, स्वशासन, अनुशासन आदि। इन सभी शब्दों का संबंध शासन से है। ’शासन’ आदिमयुग की कबीलाई संस्कृति से लेकर आज तक की आधुनिक मानव सभ्यता के विकासक्रम में अलग-अलग विशिष्ट रूपों में प्रणाली के तौर पर विकसित और स्थापित होती आई है। इस विकासक्रम में परंपराओं से अर्जित ज्ञान और लोककल्याण की भावनाओं की अवधारणा प्रबल प्रेरक की भूमिका में रही है। इस अर्थ में शासन की सभी प्रणालियाँ कृत्रिम हैं। इस प्रकार हम कह सकते है कि सुशासन व्यक्ति को भ्रस्टाचार एवं लालफीताशाही से मुक्त कर प्रशासन को स्मार्ट साधारण,नैतिक,उत्तरदायी,जिम्मेदारियोग्य,पारदर्शी बनाता है।किन्तु दो साल की भूपेष सरकार के शासन में छत्तीसगढ़ फैल रहे अराजकता के माहौल में भाजपा नेता डॉक्टर रामकुमार साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि
प्रदेश की कांग्रेस सरकार अपराध पर अंकुश लगाने में असक्षम महसूस कर रहे है छत्तीसगढ़ में आपराधिक गतिविधियां चरम पर हैं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से अपराधियो को खुली छूट मिल गई है राज्य में आपराधिक गतिविधियां चरम पर है भूपेश बघेल कि सरकार राज्य में आपराधिक गतिविधियां पर अंकुश लगाने में लाचार और बेबस नजर आ रही है आज प्रदेश में हत्या,बलात्कार,लूट डकैती, व तस्करी आम बात हो गई है उक्त बातें आज गरियाबंद जिले के छुरा ब्लाक मुख्यालय में बठेना कांड को लेकर भारतीय जनता पार्टी के द्वारा आयोजित एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में शामिल होने पहुचे पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष रामकुमार साहू ने पत्रकारों से कही श्री साहू ने आगे कहा कि भूपेश सरकार छत्तीसगढ़ की जनता की सुरक्षा नही कर पा रही है इसका जीता जागता उदहारण देखने को मिल रहा है प्रदेश के मुखिया के गृह क्षेत्र पाटन विधानसभा के ग्राम बठेना में जहां बीते दिनों अज्ञात अपराधियो ने अनुसूचित जन जाति के एक ही परिवार के 5 लोगो को मौत के घाट उतार दिया और आज तक पीड़ित परिवार को न्याय नही मिला है जो भूपेश सरकार के लिए शर्म करने की बात है यह मामला खुद मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र का है अब अगर मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र के आदमी सुरक्षित नही है तो प्रदेश बाकी जगहों के लोग कहा से सुरक्षित रहेंगे यह सवाल उठता है। इस घटना ने सरकार की कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है इस राज्य में लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस नही कर रहे है सब डरे हुए है कि न जाने मेरे परिवार में मेरे घर मे कब न जाने रेत माफिया आकर मेरे परिवार को धमका के चला जायेगा कब कोई शराब माफिया के आदमी आकर मेरे परिवार को धमका के चला जायेगा कब कोई बैंक वाले बिना किसी सूचना के रात को 10 बजे आकर कर्जा वसूली के लिए घर पर अकेली महिला को मानसिक रूप से टार्चर करेंगे ये सारी परिस्थिति प्रदेश में आज ब्यापक रूप से देखने को मिल रहा है। और इस वातावरण में पूरा प्रदेश अपने आपको असुरक्षित और ठगा सा महसूस कर रहे है। छत्तीसगढ़ के गृह के निर्वाचन क्षेत्र दुर्ग के रेलवे स्टेशन में एक 12 साल की बच्ची के साथ लगातार 4 दिन तक बलात्कार होता है पीड़ित लड़की द्वारा दरिंदो का नाम भी बताया जाता है उसके बाद भी आज 17 दिन बीत जाने के बाद भी कोई एफ आई आर न होना कोई कार्यवाही न होना हमारी बेटियां हमारी माताएं आज अपने आप डरी हुई सहमी हुई महसूस कर रही है।हम जाए तो जाए कहा शराब बंदी की आंदोलन करते है माफियाओ के द्वारा लाठियों से पिटा जाता है बागबाहरा का घटना ज्वलन्त है रेत माफियाओं के द्वारा खुलेआम गाड़ी दौड़ाई जा रही है आबादी के बीच से अगर कोई आदमी विरोध करते है उनके घर रेत माफिया के गुंडे पहुच जाते है गरियाबंद जिले के सुरसाबाँधा की घटना है। पूरे प्रदेश के जहां जहां सीमावर्ती इलाका हो चाहे वो सरायपाली के आगे की जगह हो देवभोग के आगे की जगह हो चाहै राज्य की हर सीमावर्ती इलाको में भ्रष्टाचार करने वाले जिम्मेदार लोगों को बिठाया गया है और वहां से बेधड़क अवैध शराब का कारोबार नशीली पदार्थो का कारोबार गांजा का कारोबार फल फूल रहा है। जिसको लगाम लगाने में प्रदेश की भूपेश बघेल की सरकार नाकाम नजर आ रही है।

प्रदेश में क्यों बढ़ रही है अराजकता ?

आज प्रदेश में भ्रष्टाचार,अनाचार ,लूट पाट ,धोखाधड़ी,बलात्कार जैसे अनेक अपराधों का बोलबाला है,ऐसे समाचारों से अख़बार भरे रहते हैं।स्पष्ट है हमारा प्रदेश अराजकता की ओर अग्रसर है।यह अब एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है,देश में अनेक कठोर कानून होते हुए भी अपराधों पर कोई लगाम नहीं लग पा रही है। आखिर क्या कारण है, नित्य प्रति अपराधों में वृद्धि होती जा रही है? क्यों अपराधियों के हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं? क्यों अपराधियों के मन से कानून का डर समाप्त होता जा रहा है? क्यों होते हैं अपराध ? यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से विकृत होने के कारण कोई अपराध करता है उसके लिए कोई कानून,कोई सख्ती उसको अपराध करने से नहीं रोक सकती। ऐसे अपराधियों को अपराध करने से रोकने के लिए,समाज के हर व्यक्ति को, अपने परिजन,मित्र ,जानकार व्यक्ति जो मानसिक रूप से विकृत है,के प्रत्येक व्यव्हार पर पर नजर रखनी होगी और उसको अपराध करने से रोकने के लिए सचेत रहना होगा,इसका यही एक मात्र विकल्प हो सकता है,क्योंकि ऐसे अपराधी को कानून भी कोई सजा दे पाने में अक्षम रहता है।यहाँ पर ऐसे व्यक्ति के अपराध विचारणीय भी नहीं है।
सामान्य मानसिक स्थिति वाला कोई भी व्यक्ति अपराध करने का साहस तब करता है,जब उसे कानूनी शिकंजे में फंसने की सम्भावना नहीं होती,या उसे कानूनी शिकंजे से निकलने के लिए पर्याप्त साधन होते हैं।कानूनी दांवपेंच इस्तेमाल कर,सबूतों को अपने प्रभाव से कम करने या मिटा देने की क्षमता रखता हो और अपने को पाक साफ निकाल ले जाने की सम्भावना होती है।प्रदेश में पुलिस व्यवस्था एवं न्याय प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार उनकी संवेदनहीनता और समाज के प्रति उदासीनता,एक बहुत बड़ा कारण बना हुआ है। साथ ही न्यायालय के निर्णय आने में लगने वाला लम्बा समय जिसमे कभी कभी बीस वर्ष या अधिक भी लग जाते हैं, न्याय में विलम्ब अपराधियों के हौसले निरंतर बढ़ाते हैं।अपराधों के कारण अपराधों का मुख्य कारण होता है की प्राथमिक आवश्यकताओं का अभाव,अर्थात रोटी कपडा और मकान जैसी मूल भूत आवश्यकताओं का अभाव और उसके लिए संघर्ष अपराधों को जन्म देता है। इन्सान अपनी शराफत अपनी इंसानियत अपनी संवेदनाएं भूल जाता है और किसी भी प्रकार से अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक चला जाता है। फिर चाहे उसे पाने के लिए अपराध का सहारा ही क्यों न लेना पड़े।यही मुख्य वजह है,जो गरीब देशों में अपराधों को बढ़ावा देती है,और गरीब प्रदेश अपराधों के गढ़ बन जाते हैं।
दूसरा कारण आपसी रंजिश या बदले की भावना अपराधों में वृद्धि करती है यही कारण है।
तीसरा मुख्य कारण हमारे समाज में स्वः स्फूर्त इंसानियत का अभाव है।उदाहरण के तौर पर एक व्यक्ति किसी दुकानदार से कोई वस्तु खरीदने जाता है और उसे सामान की पूरी कीमत चुका देता है,क्यों? उसके पीछे मुख्य दो कारण होते हैं,उसे डर है की यदि उसने वस्तु का पर्याप्त मूल्य नहीं चुकाया तो दुकानदार उसका अपमान करेगा,उसे मारेगा पीटेगा,और यदि वह स्वयं सक्षम नहीं हुआ तो अन्य उपायों से विरोध करेगा,पडोसी दुकानदारों के साथ मिल कर विरोध करेगा या कानूनी सहायता के लिए पुलिस बल को बुलाएगा,इत्यादि।अर्थात ग्राहक के रूप में अपराधी को दण्डित करने का प्रयास करेगा।दूसरा कारण होता है सामान खरीदने वाला इंसानियत को प्रमुखता देता है और न्यायप्रिय है।उसे मालूम है दुकानदार ग्राहक की सेवा अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए करता है, उसके अपने खर्चे इस आमदनी से पूरे होते हैं,वह भी सामान किसी उत्पादक या व्यापारी से खरीद कर लाता है। अतः उसे उस वस्तु की उचित कीमत देकर संतुष्ट करना हमारा कर्तव्य है।यह भावना उसे अपराध नहीं करने देती,और वह वस्तु की पूरी कीमत दुकानदार को चुकाता है।
अपराध का एक महत्वपूर्ण कारण होता है अपने धन अपनी संपत्ति की पर्याप्त सुरक्षा न करना या उसकी रक्षा के प्रति लापरवाह होना।यदि हम अपने धन,अपने जेवर को सड़क पर रख दें,या निर्जन सड़क पर गहने लाद कर निकल पड़ें, तो क्या आप उसकी सुरक्षा के लिए आश्वस्त हो सकते हैं? क्या इस प्रकार पुलिस या स्थानीय प्रशासन पर गैर जिम्मेदार होने का आरोप लगाना ठीक होगा? अतः यदि अपने घर को बिना ताला लगाये या पर्याप्त सुरक्षा का इंतजाम किये छोड़ कर चले जाते हैं तो क्या हम चोरों को आमंत्रण नही दे रहे होते हैं? सड़क पर नोटों की गड्डियां लहराते हुए निकलते है या बहुत सारे गहने पहन कर निकलते हैं, तो चोरी और छीना झपटी होने की संभावनाओं को हम स्वयं बढ़ा रहे होते हैं।आप खूब परिश्रम कर कामयाबी प्राप्त करते हैं और समृद्धशाली हो जाते हैं,आप अपनी समृद्धि को उत्साहवश प्रदर्शन भी करने लगते हैं,आपका ऐश्वर्य आपके पडोसी,आपके रिश्तेदारों को अखरने लगता है वे आप से इर्ष्या करने लगते हैं।अब आपको अपनों से ही अपने अहित की आशंका लगने लगती है। स्पष्ट है यदि आप अपनी समृद्धि को प्रदर्शित न करें, अपने व्यव्हार में बहुत बड़ा बदलाव न लायें ,अपने व्यव्हार में नम्रता रखें तो आप अधिक सुरक्षित रह सकते हैं।इसी प्रकार यदि कोई महिला अपने पहनावे द्वारा अंगप्रदर्शन करती है,तो उसके साथ दुराचार की संभावना भी बढ़ जाती है।यह कटु सत्य है,पूरे समाज को कभी भी व्यवस्थित नहीं रखा जा सकता, समाज में हर मानसिकता का व्यक्ति विद्यमान होता है,समाज में सज्जन ,दुर्जन और अपराधी मनोवृति के व्यक्ति हर समय होते आये हैं. और यह भी सत्य है पुलिस या प्रशासन प्रत्येक स्थान पर अपनी निगेहबानी नहीं कर सकता।आज यह भी सत्य है लचर कानून व्यवस्था और धीमी न्याय प्रक्रिया अपराधियों को निडर बनाती है।यह भी उचित है की हम महिलाओं को ड्रेस कोड नहीं दे सकते ,उनके मोबाइल रखने पर या बहार निकलने पर पाबन्दी नहीं लगा सकते। यह उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आघात होगा।अतः हमें महिलाओं को उनकी अपनी सुरक्षा के उपाय सुझाने होंगे, उन्हें नियंत्रित हो कर अपने हित में उचित पहनावा रखने के लिए प्रेरित करना होगा,आखिर अंग प्रदर्शक पहनावा उनके लिए जोखिम बढ़ता है। क्योंकि टक्कर हो जाने या दुर्घटना के भय से हम गाड़ी या स्कूटर चलाना तो बंद नहीं कर सकते,परन्तु गाड़ी चलाने वाले को सुरक्षित चलने की हिदायत तो दे सकते हैं,बाकि उसकी मर्जी वह अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है या संभल कर गाड़ी चलाता है।इसी प्रकार से महिलाओं की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता,और न ही लगना चाहिए,सिर्फ उन्हें सुरक्षित रहने और आत्म रक्षा के उपाए सुझाये जाने चाहिए।इस लेख का आशय यही है की हमें स्वयं अपने धन, दौलत, इज्जत की स्वयं रक्षा करने लिए तत्पर रहना चाहिए।शासन प्रशासन की जिम्मेदारी समझ कर स्वयं लापरवाही बरतना अपने लिए जोखिम बढ़ाना है.सचेत रहना ही एक मात्र उपाय है जो हमें प्रदेश में बढ़ रही अराजकता के माहौल में अपने को सुरक्षित रख सकता है।

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