? ब्यूरो रिपोर्ट विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
तहसील मुख्यालय मैनपुर आदिवासी समाज द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित कर बस्तर भूमकाल के महानायक अमर शहीद वीर गूंडाधूर को याद किया गया और उनके योगदान को बताते हुए उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उन्हे श्रद्धाजंली अर्पित की गई।
इस दौरान आदिवासी युवा नेता रामकृष्ण ध्रुव ने news24 संवाददाता को कहा कि महानायक अमर शहीद वीर गूंडाधूर के नाम से अंग्रेज शासक का रूह कांप उठता था। शहीद गूंडाधूर को सर्वमान्य नेता माना जाता है 35 वर्ष की उम्र में उन्होने अंग्रेजो के खिलाफ ऐसी लड़ाई छेड़ी की अंग्रेजो के दांत खट्टे कर दिये थे हालत तो ये हो चले की अंग्रेजो को कुछ समय छिपने के लिए जंगलों में गुफाओं का सहारा लेना पड़ा था।
आदिवासी समाज के ऐसे महान क्रांतीकारी को याद कर समाज उनके योगदान को नहीं भूल पायेगा, आने वाले पीढ़ी और युवाओं को उनके जीवन से सीखने की जरूरत है। कमार विकास अभिकरण के सदस्य पिलेश्वर सोरी ने news24 को कहा अंग्रेजो के द्वारा जल जंगल एवं जमीन की सुरक्षा और मूल निवासियों के ऊपर हो रहे शोषण अत्याचार के खिलाफ सन् 1910 बस्तर भूमकाल के महानायक गूंडाधूर द्वारा विद्रोह का शंखनाद कर अंग्रेजो का होश उड़ा दिये थे,
इस वीर सपुत की वीरता को याद करते हुए प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को पेनांजली दिवस के रूप में मनाते हैं। उन्होने आगे कहा आज आदिवासी कमार समाज जनजाति समाज को अपने अधिकारों के प्रति सामने आने की जरूरत है, इस मौके प्रमुख रूप से रामकृष्ण ध्रुव, पिलेश्वर सोरी, नोकेलाल ध्रुव, शंकर ध्रुव, नारद, कंवलसिंग ध्रुव, रामेश्वर ध्रुव, नंदु ध्रुव, धनेश्वर ध्रुव, बनसिंह धु्रव ,ईतवारीराम ध्रुव, मालती ओटी, धनबाई नेताम, रामेश्वरी सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला पुरूष उपस्थित थे।
