इस फोन के बाद बीएसपी मैनेजमेंट को पता चला था कि प्रधानमंत्री का भाई यहां कर्मी हैं, मच गया था हड़कंप
(आज भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर विशेष)
मुहम्मद जाकिर हुसैन
भिलाई। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के मौसेरे भाई यहां भिलाई स्टील प्लांट में कार्यरत थे और उच्च प्रबंधन तक को इसका पता नहीं था, क्योंकि उस भाई ने कभी किसी को कुछ बताया ही नहीं था। अचानक एक दिन खुद प्रधानमंत्री शास्त्री का फोन कारखाने के जनरल मैनेजर के पास आया, तो स्वाभाविक है इसके बाद हड़कंप मचनी ही थी।
आनन-फानन में खोजबीन चालू हुई और उसके बाद भिलाईवासियों को भी हकीकत का पता चला। 11 जनवरी को लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर इस रोचक संस्मरण को साझा किया उनकी भतीजी जयश्री प्रधान ने।
बीएसपी शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त जयश्री प्रधान ने बताया कि उनकी दादी कमला रानी और बड़े पिताजी (लाल बहादुर शास्त्री) की अम्मा रामदुलारी देवी सगी बहनें थीं। वहीं उनके पिता अमरनाथ प्रधान भिलाई स्टील प्लांट के औद्योगिक संबंध विभाग में लेबर ऑफिसर थे।
यह वाकया 1965 का है, तब उनका परिवार सेक्टर-8 में रहता था। उन दिनों दादी कमला रानी की तबीयत बहुत ज्यादा नाजुक थी।
सेक्टर-9 में भर्ती भी रहीं। आखिरकार डाक्टर ने जवाब दे दिया और घर ले जाकर सेवा करने कह दिया। फिर भी हम लोग दुर्ग के डॉ. पाटणकर से उपचार करवा रहे थे।
इस बीच रिश्तेदारों का भी आना लगा हुआ था। जयश्री प्रधान बताती हैं कि उन दिनों प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री तक भी हमारी दादी की नाजुक हालत की खबर पहुंच गई थी और शास्त्रीजी संभवत: काहिरा जा रहे थे। ऐसे में उन्होंने काहिरा जाने से पहले यहां इस्पात भवन में जनरल मैनेजर इंद्रजीत सिंह को फोन कर पूछा कि मेरी मौसी की अब तबीयत कैसी है, पता लगाकर बताइए।
इस पर स्वाभाविक था हड़कंप मचनी ही थी। तुरंत खोजबीन चालू हुई और अंतत: मैनेजमेंट को पता चला कि सेक्टर 8 में रहने वाले एएन प्रधान ही प्रधानमंत्री शास्त्री के मौसेरे भाई हैं।
जयश्री बताती हैं कि इसके बाद तो बीएसपी के अफसरों का तांता लग गया।
तत्काल दादी को सेक्टर-9 अस्पताल के केबिन में भर्ती कराया गया और खासतौर पर नर्स-डाक्टर उपचार के लिए रखे गए। इस उपचार का लाभ यह हुआ कि दादी करीब 15 दिन बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर घर आ गईं। इसके बाद दादी करीब 4-5 साल और हमारे बीच रहीं।
जयश्री बताती हैं, प्रधानमंत्री शास्त्री के उस फोन का ऐसा असर हुआ कि हम लोगों से अगले ही दिन सेक्टर-8 का छोटा आवास खाली करवा कर सेक्टर-10 का मैच बॉक्स आवंटित किया गया।
दादी की तबीयत वाले इस प्रसंग के कुछ माह बाद 11 जनवरी 1966 को प्रधानमंत्री शास्त्री का निधन हो गया। फिर जनवरी 1968 में बड़ी मां (ललिता शास्त्री) भिलाई प्रवास पर आईं तो हमारे सेक्टर-10 वाले घर पर रुकी।
जयश्री बताती हैं- उनके पिता अलग स्वभाव के थे, इसलिए उन्होंने कभी यह जाहिर ही नहीं होने दिया कि वह इतने बड़े राजनेता के भाई हैं।
फरवरी, 1981 में अमरनाथ प्रधान की मृत्यु ह्रदयघात से हुई। जयश्री ने बताया कि बाद के दिनों में बड़ी मां भी गुजर गईं, लेकिन उनके बेटों अनिल शास्त्री और सुनील शास्त्री सहित पूरे परिवार से आज भी संपर्क बना हुआ है।
तीन साल पहले जयश्री की बेटी की शादी में अनिल शास्त्री आशीर्वाद देने भिलाई आए थे।
