कृषि कानूनों के खिलाफ सुरेगांव में जुटे किसानों ने बोला हल्ला, केंद्र व राज्य सरकार को बताया किसान विरोधी, किसान संगठन का दिल्ली कूच

देवरीबंगला। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के बैनर तले मंगलवार को सुरेगांव में केंद्र के तीन कानूनों के खिलाफ किसानों की सभा हुई। मुख्य अतिथि राजकुमार गुप्ता ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार दुष्प्रचार कर रही है कि तीन कानूनो से किसान अपनी उपज देश में कहीं भी अपने भाव पर बेचने के लिए आजाद हो गए हैं। जबकि सच्चाई यह है कि किसान अपनी उपज देश में कहीं भी बेचने के लिए पहले से ही आजाद रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि तीन कानून बनाकर कारपोरेट व्यापारियों को बिना लाइसेंस के और बिना मंडी शुल्क के देश में कहीं भी कृषि उपज सस्ती दरों पर खरीदने, अकूत मुनाफा कमाने के लिए आजाद कर दिया है। उन्होंने तीन कानून को वापस लेने और एम एसपी के लिए कानूनी गारंटी का कानून बनाने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं में कड़ाके की ठंड में 33 दिनों तक देश के लाखों किसानों के आंदोलन के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि यदि तीन कानून रद्द नहीं हुए तो सरकारी मंडियों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाने का खतरा है। राजकुमार गुप्त ने राज्य में धान खरीदी में रकबा कटौती, टोकन, बारदाना, परिवहन आदि समस्याओं के लिए बघेल सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस साल धान की खरीदी एक माह देर से शुरू हुआ है। सरकार के पास तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय था। लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण किसानों को परेशानियां भोगनी पड़ रही है। किसानों की सभा को संबोधित करते हुए किसान संगठन के बद्री प्रसाद पाकर, बाबूलाल साहू और कल्याणसिंह ठाकुर ने कहा कि किसान संगठित नहीं है। जिसका नाजायज फायदा सरकार और प्रशासन उठाती है। किसानों को संगठित होना चाहिए। गोडमरा के किसान जीवनंदन पिपरिया ने बताया कि फसल बीमा योजना में भी सुधार की आवश्यकता है। सभा में वीरेंद्र देशमुख, टोमन देवांगन, लक्ष्मण महतेल, चंदूलाल देशमुख, तीरसिंह साहू, राजीव देशमुख सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। किसान आंदोलन में भाग लेने प्रगतिशील किसान संगठन के पदाधिकारी घनश्याम चंद्राकर के नेतृत्व में दिल्ली रवाना हुए हैं।

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