रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन,कॉमरेड नरेन्द्र सिंह चंद्राकर के असामयिक निधन पर स्तब्ध है। कोरोना काल ने कर्मचारियों के मसीहा माने जाने वाले जबरदस्त नेता को छीन लिया है।उनकी पहचान एक बेहद जुझारू,कर्मठ और आक्रामक कर्मचारी नेता के रूप में रही है।अपने गजब के व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता के दम पर वे कर्मचारियों के बीच बेहद खासे लोकप्रिय थे। धरना प्रदर्शन हो या हड़ताल हो,उनकी उपस्थिति मात्र से ही कर्मचारियों का हौसला बढ़ जाता था। उनके उदबोधन के दहाड़ से सरकार के बड़े से बड़े अधिकारियों का हौसला पस्त हो जाता करता था।वास्तव में कर्मचारी जगत में उन्हें ‘एक था टाइगर’ कहना अतिश्योक्ति नहीं है।
उपरोक्त प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा,सचिव राजेश चटर्जी,प्रांतीय प्रवक्ता विजय झा का कहना है कि कॉमरेड चंद्राकर के निधन से कर्मचारियों ने अपने रौबदार नेतृत्वकर्ता को खोया है। उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए फेडरेशन के कहना है कि कामरेड चंद्राकर के जबरदस्त नेतृत्व क्षमता, उनके बेबाक अंदाज और हाजिर जबाबी का लोहा अधिकारी भी मानते थे।उनके विरोधी भी उनके विलक्षण नेतृत्व क्षमता के कायल थे। वे अभिवाजित मध्यप्रदेश के समय से एक प्रभावशाली कर्मचारी नेता के रूप में विख्यात थे। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के पश्चात तो जैसे कॉमरेड चंद्राकर कर्मचारी आंदोलन का पर्याय बन चुके थे। शासकीय सेवानिवृत्त होने तक वे छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के निर्विरोध प्रांताध्यक्ष रहे हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई बड़े आंदोलन का नेतृत्व कर सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। वे बेहद निर्भीक और क्रांतिकारी नेता थे।फेडरेशन की ओर से सुभाष मिश्रा, पी आर यादव, डॉ लक्ष्मण भारती,आर के रिछारिया,सतीश मिश्रा, बी पी शर्मा,पंकज पांडेय,ओंकार सिंह, कौशलेंद्र पांडेय,सरित मिश्रा,संजय सिंह, कैलाश चौहान,शशिकांत गौतम, डॉ अशोक प्रधान, वीरेन्द्र नामदेव, एन एच खान,कुशल कौशिक,राकेश शर्मा, अश्वनी वर्मा,प्रशांत दुबे,यशवंत वर्मा, विंदेश्वर रौतिया, आर एन ध्रुव,अश्वनी चेलक,दिनेश रायकवार,अजय तिवारी,देवलाल भारती, पी के नामदेव, अमोद श्रीवास्तव,संतोष वर्मा, सत्येन्द्र देवांगन, होरी लाल छेदैया,रमेश ठाकुर,गुलाब यादव आदि ने श्रद्धांजलि दी है।
