नेशनल हाईवे के किनारे बसा तौरेंगा के स्कूल भवन की स्थिति काफी दयनीय कभी भी हो सकती है धराशाही


? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद ब्यूरो

अभी स्कूल बंद है ऐसे स्थितियोें में विभाग को चाहिए कि जर्जर स्कूल का तत्काल मरम्मत करवाया जाए

मैनपुर।तहसील मुख्यालय मैनपुर से 22 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर बसा ग्राम तौरेंगा में स्थित प्राथमिक शाला भवन व पूर्व माध्यमिक शाला भवन आज रखरखाव व मरम्मत के अभाव के चलते बद से बदतर हालत में है, ज्ञात हो कि यह दोनों शाला भवन सन 80 के दशक मे निर्माण किया गया खपरैल युक्त है जिले का सबसे पुराना स्कूलों में से है। दोनों शाला भवन कच्चे व खपरैलनुमा है, भवनों की लंबे अंतराल बाद भी मरम्मत नहीं होने के कारण आज बदहाल अवस्था में है, बता दें कि दोनों शाला भवनों की दीवार में जगह-जगह दरारें पड़ गई है और खपरैल नुमा होने के कारण, इन दिनों बारिश का पानी भवन में भर जाता है, भवनों की बांस, बल्ली, पाटी जीर्ण शीर्ण अवस्था में है, भवन कभी भी धारासायी हो सकता है, बावजूद इसके विभाग द्वारा इसके मरम्मत को लेकर अभी तक कोई ठोस पहल नहीं किया गया है।

ग्राम तौरेंगा के सरपंच परमेश्वर नेताम, अनूप कुमार कश्यप, लखन लाल सोनवानी, चमरू राम यादव, मनबोध कश्यप, खिरधर राम कश्यप, सोपसिंह नागेश, सुरती राम यादव, केसूर चिण्डा, नंदेश्वर यादव, मनोज कुमार बघेल, विवेक मरकाम सहित ग्रामीणों ने बताया की दोनों शाला भवनों की मरम्मत के लिए कई बार अवगत करा चुके हैं, और पुराने भवनों की जगह नए पक्के भवन की मांग भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक हमारी मांगों पर अमल नहीं किया गया है, अभी की स्थिति में शाला भवनों की मरम्मत की आवश्यकता है, लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, भवन जर्जर हालत में है व कभी भी धराशायी होकर सकती है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से भवनों की समय रहते मरम्मत व पुराने भवनों की जगह नए भवन निर्माण कराने की मांग की है।

युवा संघर्ष मोर्चा के गरियाबंद जिला अध्यक्ष युमेन्द्र कश्यप ने बताया शासन द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में इसका पूर्ण रूप से लाभ मिल पा रहा है या नहीं इस ओर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी जनप्रतिनिधि झांकने तक नहीं आते, यही वजह है कि लंबे अंतराल बाद भी तौरेंगा के प्राथमिक शाला भवन और माध्यमिक शाला भवन की मरम्मत नहीं हो पाया है, यह जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी का नतीजा है, विभाग द्वारा इस ओर विशेष ध्यान देकर जल्द से जल्द दोनों जर्जर भवनों की मरम्मत हेतु पहल करनी चाहिए।

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