देवरीबंगला/प्रवचन कर्ता ने बताया कि मनुष्य को मिला समय, धन और सामर्थ्य अमूल्य है। इन्हें बुरे विचारों, भोग – विलास और व्यर्थ कार्यों में लगाने के बजाय धर्म और आत्म कल्याण के लिए लगाना चाहिए। प्रत्येक जीव सुख चाहता है, दुख कभी नहीं। मतभेद रखो, मनभेद नहीं। निर्मल भावो से ही सच्चा सुख मिलता है। जीवन में किसी कार्य को लेकर मतभेद हो सकते हैं। लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। विचारों में भिन्नता के बावजूद आपसी प्रेम, सद्भावना एवं एकता बनाए रखना जरुरी है। सुख कहीं बाहर नहीं स्वयं के भीतर है। नवरात्रि पर्व पर ग्राम केवट नवागांव के शीतल प्रांगण में संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत कथा व जगदंबा यज्ञ का आयोज न किया जा रहा है।

प्रवचन कर्ता पं.राजेश तिवारी साजा है। उन्होंने रविवार को अष्टमी पूजन एवं तुलसी रुदास की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि बिना लक्ष्मी के काम नहीं चलता। सभी को लक्ष्मी चाहिए। माता लक्ष्मी के कई रुप होते हैं।लक्ष्मी बड़ी चंचल होती है। लक्ष्मी वही रूकती है जहां प्रेम, दया, ज्ञान, सम्मान,दान, तप और भक्ति होती है। उन्होंने देवी के अनेक अवतार का वर्णन किया। यज्ञ के प्रमुख यजमान भुवन-देवकी निषाद व शोभित-किनेशवरी निषाद है।
