सिपकोन्हा माइनर के टेल एरिया के किसानों को अंतिम सिंचाई के लिए पानी देने का भरोसा, 15 से अधिक गांवों की फसलें सूखने की कगार पर
रानीतराई। सिपकोन्हा माइनर के टेल एरिया यानी नहर के अंतिम छोर तक सिंचाई का पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से नाराज दक्षिण पाटन अंचल के किसानों ने शुक्रवार को रानीतराई स्थित जल संसाधन विभाग के निरीक्षण गृह में घेराव और चक्काजाम करने के लिए एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों और जनप्रतिनिधियों के साथ विभागीय अधिकारियों की लंबी चर्चा हुई। अंततः जल संसाधन विभाग के उच्च अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद किसानों ने आंदोलन समाप्त कर दिया। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि खेतों तक पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंचा, तो किसान दोबारा उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की लिखित जिम्मेदारी
आंदोलन स्थल पर जल संसाधन विभाग के एसडीओ राजेंद्र सोनी ने किसानों से चर्चा कर लिखित आश्वासन दिया। विभागीय निर्णय के अनुसार, सिपकोन्हा वितरक नहर के अंतिम छोर तक खरीफ फसल की अंतिम सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। 16 मील पर निर्धारित मात्रा में लगभग 18 इंच पानी का गेज आगामी सिंचाई तक बनाए रखने के लिए सहायक अभियंता राजीव सुखदेवे के क्षेत्र में पानी की सतत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, उप अभियंता मुकेश अहीर और सहायक अभियंता राजीव सुखदेवे को आपसी समन्वय के साथ निगरानी करते हुए अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सिककोसा वितरक गेट से निर्धारित मात्रा में पानी उपलब्ध कराना भी विभाग की जिम्मेदारी होगी। टेल एरिया के गांवों के किसानों को प्राथमिकता से पानी देने और जल्द खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिखित आश्वासन के बाद किसान शांत हुए।

15 से अधिक गांवों की फसलें सूखने की कगार पर
सिपकोन्हा माइनर के टेल एरिया में आने वाले दक्षिण पाटन अंचल के 15 से अधिक गांवों के किसान सिंचाई पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। प्रभावित गांवों में रानीतराई, डिड़गाभाठा, करेला, डीघारी, औसर, पाहंदा, झाड़मोखली, डिड़गा, रेंगाकठेरा, असोगा, कौही, खपरी और चुलगहन सहित अन्य गांव शामिल हैं।
बारिश थमने के बाद खरीफ फसलों को पकाने के लिए अंतिम सिंचाई की जरूरत है, लेकिन नहर के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचने से फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसानों का आरोप है कि तांदुला जलाशय में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद 15 अक्टूबर तक उनके खेतों में सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंचा।
इससे पहले 12 अक्टूबर को भी रानीतराई में सैकड़ों किसानों ने एकत्रित होकर सिंचाई विभाग से पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की थी। उस दौरान अधिकारियों ने दो दिनों के भीतर पानी पहुंचाने का आश्वासन दिया था, लेकिन किसानों के अनुसार, तय समय में समस्या का समाधान नहीं हुआ। इससे नाराज किसान आंदोलन करने के लिए विवश हुए।
धनराज साहू बोले—सभी किसानों को समय पर मिले पर्याप्त पानी
किसान नेता धनराज साहू ने कहा कि टेल एरिया सहित सभी किसानों को समय पर पर्याप्त नहर पानी मिलना चाहिए। तांदुला जलाशय में पर्याप्त पानी होने के बावजूद किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलना विभागीय अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है। इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिला, तो वे पुनः उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
किसान निर्मल जैन और भेदप्रकाश वर्मा ने कहा कि सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों के आश्वासन और विश्वास के आधार पर आंदोलन समाप्त किया जा रहा है। अब विभाग को सुनिश्चित करना होगा कि पर्याप्त मात्रा में पानी किसानों के खेतों तक पहुंचे। यदि किसानों के साथ वादाखिलाफी हुई, तो फिर से उग्र आंदोलन किया जाएगा।
एसडीएम और पुलिस प्रशासन रहा सक्रिय
किसानों के आंदोलन को देखते हुए पाटन एसडीएम नीरनिधि नन्देहा रानीतराई में पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रहे। उन्होंने गुरुवार रात करीब 8 बजे तहसीलदार मनोज गुप्ता को किसान प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के लिए भेजा था। इस दौरान किसानों को सुबह तक पानी पहुंचाने का आश्वासन दिया गया और शांति बनाए रखने की अपील की गई।
वहीं, आंदोलन की चेतावनी के बाद से ही पुलिस प्रशासन सक्रिय रहा। शुक्रवार को आंदोलन स्थल पर थाना प्रभारी हुबलाल चंद्राकर पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ, लेकिन अब किसानों की नजर इस बात पर है कि विभाग अपने वादे के मुताबिक खेतों तक पर्याप्त पानी कब तक पहुंचाता है।
