अयोध्या कांड में छिपा है त्याग और समर्पण का सच्चा संदेश – आचार्य युवराज पांडेय जी महाराज

उतई। धर्म ज्योति सनातन सेवा समिति द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के पंचम दिवस पर अयोध्या कांड की मार्मिक कथा सुनाई गई। कथा व्यास आचार्य पं. श्री युवराज पांडेय जी महाराज के मुखारविंद से कथा सुनकर हजारों श्रद्धालु भावुक हो गए।

महाराज जी ने कहा कि अयोध्या कांड रामायण का द्वितीय सोपान और सबसे मार्मिक अध्याय है, जहाँ त्याग, प्रेम और धर्म की परीक्षा होती है। इसकी कथा राजा दशरथ द्वारा श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी से प्रारंभ होती है। पूरी अयोध्या में उत्सव का माहौल है, लेकिन तभी मंथरा की कुटिलता से कैकेयी के मन में लोभ जागता है और वे राजा दशरथ से दो वरदान मांग लेती हैं – भरत को राजगद्दी और श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास।

वचनबद्ध दशरथ विवश हो जाते हैं और पिता की आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान करते हैं।

कैकेयी न होती तो रामचरितमानस न बनता

महाराज जी ने कहा कि अक्सर लोग कैकेयी को दोष देते हैं, लेकिन सत्य यह है कि यदि कैकेयी का चरित्र न होता तो रामचरितमानस बनता ही नहीं। कैकेयी कोई साधारण नारी नहीं हैं। देवताओं के आग्रह पर स्वयं सरस्वती जी ने उनकी मति फेरी थी। यदि राम राजा बन जाते तो रावण वध कैसे होता और धर्म की स्थापना कैसे होती? कैकेयी ने स्वयं अपयश लेकर भगवान को भगवान बनने का मार्ग दिया।

उन्होंने कहा कि भगवान के हर चरित्र के पीछे कोई दिव्य कारण होता है। कैकेयी के त्याग के कारण ही हमें भरत जैसा भाई, लक्ष्मण जैसा सेवक और हनुमान जैसा भक्त देखने को मिला। अयोध्या कांड हमें सिखाता है कि सच्चा धर्म त्याग में है, पद में नहीं।

इस अवसर पर मुख्य रूप से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद दुर्ग लोकसभा विजय बघेल, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, पूर्व मंत्री जागेश्वर साहू, जिला पंचायत सदस्य श्रद्धा साहू, तेलघानी बोर्ड अध्यक्ष जितेन्द्र साहू, भिलाई शहर अध्यक्ष मुकेश चन्द्राकर, जिला अध्यक्ष कांग्रेस दुर्ग ग्रामीण राकेश ठाकुर, ब्लॉक अध्यक्ष देवेन्द्र देशमुख सहित आयोजक समिति के सदस्य एवं हजारों की संख्या में राम भक्त उपस्थित थे।

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