- पंचायत का सालाना बजट करीब 1.50 करोड़, कई विकास कार्य जारी; जल जीवन मिशन और सड़क की स्थिति बनी बड़ी चुनौती
पाटन। दुर्ग जिले के जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत चुनकट्टा चारों तरफ चूना पत्थर की खदानों से घिरा हुआ है। गांव की जमीन के आसपास खनिज संपदा का बड़ा भंडार है और खदानों से शासन को राजस्व भी मिलता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इसी खनिज क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण आज भी धूल, जर्जर सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
गांव की स्थिति को करीब से देखने पर तस्वीर विकास और समस्याओं के बीच खड़ी नजर आती है। पंचायत का सालाना बजट करीब 1.50 करोड़ रुपये है और पंचायत में कई विकास कार्य चल रहे हैं। इसके बावजूद कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान स्थानीय स्तर से संभव नहीं है और जिनके लिए संबंधित विभाग तथा शासन की सक्रियता जरूरी है।

खदानों की धूल के बीच जर्जर सड़क बनी ग्रामीणों की परेशानी
चुनकट्टा की सबसे बड़ी समस्या गांव की सड़क और धूल है। आसपास संचालित चूना पत्थर खदानों से निकलने वाले वाहनों की आवाजाही के कारण धूल उड़ती है। दूसरी ओर गांव की मुख्य जर्जर सड़क भी वाहनों के गुजरने पर धूल का गुबार पैदा करती है।
ग्रामीणों का कहना है कि खदानों से शासन को राजस्व मिलता है, लेकिन उन्हें बदले में बेहतर सड़क और धूल से राहत कब मिलेगी, यह बड़ा सवाल है। सड़क की खराब स्थिति के कारण आम ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
टंकी बनी, लेकिन घरों तक नहीं पहुंचा पानी
जल जीवन मिशन के तहत गांव में पानी की टंकी का निर्माण किया गया है। उम्मीद थी कि टंकी बनने के बाद हर घर तक नल के माध्यम से पेयजल पहुंचेगा। लेकिन वर्तमान स्थिति में योजना का पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक अभी तक हर घर तक पाइपलाइन नहीं पहुंची है, जिसके कारण पानी की टंकी निर्माण के बावजूद घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका है। यहां सवाल सिर्फ टंकी के निर्माण का नहीं, बल्कि उसके वास्तविक उपयोग और हर परिवार तक पानी पहुंचाने का है।
पंचायत में विकास कार्य भी जारी
समस्याओं के बीच पंचायत स्तर पर विकास कार्य भी दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान में गांव में व्यावसायिक परिसर और सतनाम भवन में शेड निर्माण का कार्य प्रगति पर है। पंचायत द्वारा उपलब्ध संसाधनों के अनुसार गांव के विकास के लिए काम किए जा रहे हैं।
प्राथमिक शाला में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। वहीं आंगनबाड़ी केंद्र में चेकर टाइल्स, रनिंग वॉटर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे बच्चों के लिए केंद्र का वातावरण बेहतर बनाया जा सके।
भूमिहीन परिवारों के आवास का रास्ता जमीन की कमी ने रोका
गांव के भूमिहीन परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने में एक अलग समस्या सामने आ रही है। आवास निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण पात्र परिवारों का काम अटका हुआ है।
गांव में जो खाली सरकारी भूमि दिखाई देती है, वह शामिलात चारागाह के रूप में दर्ज है। ऐसे में उस भूमि का उपयोग आवास के लिए करने में नियमों की बाधा है। ग्रामीणों की नजर अब शासन-प्रशासन की ओर है कि पात्र भूमिहीन परिवारों के लिए वैकल्पिक आवासीय भूमि की व्यवस्था कब की जाएगी।
सरपंच के नेतृत्व में पंचायत स्तर पर प्रयास
ग्राम पंचायत चुनकट्टा की सरपंच रोशनी सोनू राय के नेतृत्व में पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। करीब 1.50 करोड़ रुपये के सालाना पंचायत बजट के बीच पंचायत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग स्थानीय जरूरतों के साथ-साथ उन समस्याओं के समाधान के लिए कैसे किया जाए, जिनके लिए अन्य विभागों के सहयोग की आवश्यकता है।
अब बड़ा सवाल—खनिज क्षेत्र के गांव को कब मिलेगी राहत?
चुनकट्टा की कहानी केवल एक पंचायत की कहानी नहीं है। यह उन गांवों की तस्वीर भी सामने लाती है, जहां प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तो बड़े स्तर पर होता है, लेकिन स्थानीय लोगों को उसका प्रत्यक्ष लाभ पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाता।
खनिज से राजस्व मिल रहा है, पंचायत में करोड़ों का सालाना बजट है, विकास कार्य भी हो रहे हैं—फिर भी सड़क, धूल, पेयजल और भूमिहीन परिवारों के आवास जैसी समस्याएं क्यों बनी हुई हैं?
ग्रामीणों की अपेक्षा है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग चुनकट्टा की इन समस्याओं को केवल पंचायत की समस्या न मानकर खनिज क्षेत्र के समग्र विकास से जोड़कर देखें। सड़क निर्माण, धूल नियंत्रण, जल जीवन मिशन की पाइपलाइन पूर्ण कराने और भूमिहीन परिवारों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल होने पर ही गांव के विकास की तस्वीर पूरी मानी जाएगी।
