खबर हेमंत तिवारी,,,,,✍️✍️✍️
पांडुका(राजिम) /ऐसे तो भारतवर्ष में कई प्रकार के देवी देवता है। जिसका समय-समय पर विशेष पूजा अर्चना का अलग महत्व है।जहां लोग अपनी मन्नतें मांगते है । मनोकामना पूरी होने पर ज्योत जलाते हैं।तो कही विशेष चढ़ावा चढ़ाते हैं और हमारे छत्तीसगढ़ में तो कई ऐसे भी जगह है। जहां देवी देवता की पट साल में एक बार खुलता है। जिसमें मां निरई पहाड़ वा मां लिंगेश्वरी जैसे कई देवी देवता स्थल हैं। पर गरियाबंद जिले के ग्राम पांडुका में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के पीछे कालोनी पारा स्थित सैकड़ो सालों से विराजमान ग्राम के इष्ट देव सवरिन सांवरा एक ऐसा देव स्थल है। जहां मन्नते पूरी होने की अपनी ही अलग महिमा है।और जब आपका मनोकामना पूरा हो तभी आप उसकी भेंट स्वरूप जो देना है ।वो दे सकते है। साथ ही जब मन्नत मांगने का टाइम जाते है। तो कई लोग अपने साथ गवाही के रूप में एक दो गवाह को ले जाते है और उनके बीच में अपनी मन्नतें मांगते हैं । जो मन्नत का गवाह बनता हैं। पर ग्रामीणों ने बताया ऐसा कुछ नियम नहीं है।हमारे ग्राम के इष्ट देवी देवता से अपनी व्यथा ,दुख ,दर्द और मन्नत अकेले भी मांग सकते है।

कई लोग तो इसे उधारी का देवता भी कहते है ।क्यों कि ये देव उधार में सब के मानोकामना पूरा करते है। और काम पूरा होने के बाद ही अपना चढ़ावा लेते हैं।वही इस देव स्थल में महिलाओं का प्रवेश पूर्ण वर्जित है। जहां आज तक कोई महिला इसके क्षेत्र में प्रवेश नहीं करता।वही पूरे अंचल सहित अब धीरे धीरे दूर-दूर से लोग यहां अपनी मन्नत मांगने आते है।और कामना पूरी होने के बाद अपना चढ़ावा चढ़ाते हैं। बस कुछ विशेष समय को छोड़कर 12 माह देव स्वरूप सवरिन संवरा देवता का पूजा अर्चना किया जाता है। और हर सप्ताह के शनिवार और रविवार बस 2 दिन हीं ऐसे विशेष होते हैं। जिस दिन आप अपनी मन की मन्नते मांग सकते है साथ ही इसकी कई रोचक कहानी है।कई लोगों प्रत्यक्ष दर्शन भी हुए हैं।जो स्थानीय लोग जानते हैं। कुछ किस्से कहानियों को ग्राम के कुछ वरिष्ठ जनों ने चर्चा में बताया जो आगे आपने विश्वास पर निर्भर करता है।

चर्चा के दौरान उपस्थित ग्राम पाण्डुका के वरिष्ठ नागरिक रूपसिंग सिन्हा ,सालिक राम साहू ,खिलावन राम सिन्हा ,गणेश राम साहू मौजूद रहे जिन्होंने कई सैकड़ो हजारों लोगों की मन्नतें पूरी होती देखी है। और रोचक बातें यह के बारे बताए है। साथ ही अभी आने वाले ऋषि पंचमी में जनहित के लिय उपयोग में लाने वाले साधक लोग जो मंत्र तंत्र सिद्धि करते है। वे चेला अपने गुरुओ के साथ विशेष पूजा अर्चना के लिए इस दिन इकट्ठा होते है।और इस कारण यह दिन विशेष होता है और बहुत भीड़ भी होती हैं।
