पाटन तहसील कार्यालय में बड़ा हादसा टला, छत का प्लास्टर गिरने से मची अफरा-तफरी

पाटन। नगर स्थित तहसील कार्यालय भवन में बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब तहसीलदार के कक्ष में सीलिंग पंखे के पास छत के प्लास्टर का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे गिर गया। घटना कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद हुई, जिसके कारण किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, तहसीलदार की टेबल पर रखी कुछ फाइलें और कंप्यूटर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है।

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जानकारी के अनुसार 9 सितंबर बुधवार को कार्यालयीन कार्य समाप्त होने के बाद कर्मचारी कार्यालय बंद कर चले गए थे। देर रात तहसीलदार की कुर्सी के ठीक ऊपर सीलिंग पंखे के पास छत का प्लास्टर अचानक गिर गया। यदि यह घटना दिन के समय हुई होती तो तहसीलदार अथवा कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों के चोटिल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।

कई स्थानों पर जर्जर हो चुका है भवन

बताया जा रहा है कि तहसील कार्यालय का भवन कई स्थानों पर जर्जर हो चुका है। छत और प्लास्टर में जगह-जगह क्षति दिखाई दे रही है। ऐसे में बरसात के मौसम में समय रहते भवन का संधारण नहीं किया गया तो भविष्य में इसी तरह की घटना दोबारा होने की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शासकीय भवनों का समय-समय पर निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत बेहद जरूरी है। तहसील कार्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और आम नागरिक राजस्व संबंधी कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा को लेकर लापरवाही किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है।
1987 में हुआ था तहसील भवन का लोकार्पण
पाटन में तहसील प्रारंभ करने की घोषणा वर्ष 1984 में हुई थी। इसके बाद वर्ष 1987 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा एवं तत्कालीन विधायक अनंत राम वर्मा के हाथों तहसील भवन का लोकार्पण किया गया था। लगभग चार दशक पुराने इस भवन में समय के साथ व्यापक संधारण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
बताया जाता है कि करीब साढ़े पांच वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में तहसील भवन में टाइल्स एवं छत की हल्की मरम्मत का कार्य कराया गया था। इसके बाद भवन के व्यापक रखरखाव और मरम्मत की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
चारदीवारी और बगीचे का भी है पुराना इतिहास
वर्ष 2017 में तत्कालीन तहसीलदार शारदा अग्रवाल के कार्यकाल में तहसील भवन के चारों ओर चारदीवारी का निर्माण कराया गया था। इससे पहले तत्कालीन तहसीलदार रूपेश वर्मा के कार्यकाल में तहसील परिसर में राजस्व संबंधी कार्यों के लिए आने वाले किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हरा-भरा बगीचा विकसित कराया गया था। हालांकि, बाद के वर्षों में उचित देखरेख के अभाव में यह बगीचा भी वीरान हो गया।
विकास के बीच तहसील भवन आज भी उपेक्षित
पाटन विधानसभा क्षेत्र में बीते वर्षों में विभिन्न विकास कार्य हुए हैं। पाटन विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में नगर सहित विधानसभा क्षेत्र में अनेक विकास कार्यों को गति मिली। करीब 60 वर्ष पुराने जनपद पंचायत भवन का नया निर्माण, नगर पंचायत भवन, स्वामी आत्मानंद स्कूल, अखरा स्कूल, इंदिरा नगर स्कूल, अटारी स्कूल तथा इनडोर स्टेडियम जैसे कार्य हुए। इसके बावजूद पाटन का पुराना तहसील भवन अब भी नए भवन की प्रतीक्षा में है।
ताजा घटना के बाद तहसील भवन की तकनीकी जांच, तत्काल आवश्यक मरम्मत तथा भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोकने के लिए भवन के व्यापक संधारण की आवश्यकता सामने आई है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से समय रहते भवन का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

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