- दिलीप कुमार के प्रस्तावित क्रशर को लेकर दायर याचिका, पर्यावरण संरक्षण मंडल के समक्ष आवेदन देने के निर्देश
बिलासपुर/पाटन। ग्राम पतोरा, तहसील पाटन में दिलीप कुमार द्वारा प्रस्तावित M/s Baba Crusher (बाबा क्रशर) को लेकर दायर रिट याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। WPC No. 4009/2026 में 21 अगस्त 2026 को सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति अमरेन्द्र किशोर प्रसाद ने पर्यावरण संबंधी शिकायत के निराकरण के लिए याचिकाकर्ता को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के संबंधित अधिकारी के समक्ष उचित आवेदन/अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका लोचन प्रसाद यादव, निवासी ग्राम मुड़पार, तहसील पाटन द्वारा ग्राम पतोरा स्थित 192/4 की 0.2700 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित एग्रीगेट (गिट्टी) क्रशिंग प्लांट के संबंध में दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रस्तावित M/s Baba Crusher के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति, पर्यावरणीय स्वीकृति एवं अनापत्ति प्रमाण-पत्रों का समुचित अनुपालन किए बिना प्लांट स्थापित किए जाने की तैयारी है। याचिका में धूल एवं कण प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण तथा पर्यावरणीय क्षति की आशंका जताई गई थी।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष की ओर से बताया गया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थल का निरीक्षण किया गया है तथा निरीक्षण के दौरान मौके पर कोई नया क्रशिंग यूनिट स्थापित पाया नहीं गया। यह भी न्यायालय को बताया गया कि M/s Baba Crusher के संचालक/प्रोपराइटर को 02 जून 2026 के पत्र के माध्यम से आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना कोई यूनिट स्थापित नहीं करने की चेतावनी दी गई थी।
प्रतिवादी पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि पर्यावरण संबंधी शिकायत के निराकरण के लिए याचिकाकर्ता के पास राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) सहित प्रभावी वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध हैं।
हाईकोर्ट ने National Green Tribunal Act, 2010 की धारा 14(1) तथा सुप्रीम कोर्ट के Sridevi Datla बनाम Union of India एवं अन्य, (2021) 5 SCC 321 के निर्णय का उल्लेख करते हुए माना कि पर्यावरण संबंधी शिकायत के संबंध में याचिकाकर्ता के पास प्रभावी वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है।
न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह प्रतिवादी क्रमांक 4, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के संबंधित अधिकारी के समक्ष उचित आवेदन/अभ्यावेदन प्रस्तुत करे। अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वह शिकायत पर कानून के अनुसार निष्पक्ष रूप से विचार करते हुए मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच के बाद उचित निर्णय ले।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में M/s Baba Crusher को अवैध घोषित नहीं किया है और न ही क्रशर को बंद करने का कोई आदेश दिया है। न्यायालय ने केवल याचिकाकर्ता को पर्यावरण संबंधी शिकायत के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष जाने का निर्देश दिया है।
