लोककला का एक स्वर्णिम अध्याय हुआ समाप्त, तीजन बाई का निधन पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक क्षति – कीर्ति नायक


पाटन। पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष श्रीमती कीर्ति नायक ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक एवं लोककला परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
श्रीमती कीर्ति नायक ने दिवंगत लोककला की महान साधिका को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि, “पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का जाना केवल एक महान कलाकार का निधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर का बिछुड़ जाना है। उनकी स्वर साधना, कला और संस्कृति के प्रति समर्पण युगों-युगों तक देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।”
श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए श्रीमती कीर्ति नायक उनके गृह ग्राम गनियारी पहुंचीं, जहां उन्होंने पार्थिव देह के दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित की तथा शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इसके पश्चात उन्होंने मुक्तिधाम पहुंचकर अंतिम संस्कार एवं शोकसभा में शामिल होकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, धरसीवा विधायक अनुज शर्मा, अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सवाड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कलाकार, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रीमती कीर्ति नायक ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा, अथक साधना और समर्पण से पंडवानी लोककला को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई। उनका संपूर्ण जीवन भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनके अमूल्य योगदान को देश सदैव सम्मान, गर्व और कृतज्ञता के साथ स्मरण करता रहेगा।
उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार, कला जगत और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

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