क्षेत्र के घने जंगल चारो तरफ हरियाली बिखेर रही है, शांत वातावरण व वन्य प्राणियों के चहलकदमी लोगो को कर रहा है आकर्षित

? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद जिला ब्यूरो….


बडे शहरों से बडी संख्या में पर्यटक पहुच रहे है पर्यटन स्थल और जमकर ले रहे है झरने में नहाने का मजा

गरियाबंद। जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र के घने जंगल व पहाडी क्षेत्रों में जगह जगह इन दिनों बारिश में वाटरफाल लोगो को आकर्षित कर रहा है, खासकर बडी संख्या में युवा, व शहरो के लोग पहुचकर इन वाटरफालों का मनोरम दृश्य का आनंद ले रहे है, खतरो के बीच ऊची ऊची पहाडियों दुर्गम स्थल तक पहुचकर पर्यटन स्थलों तक जा रहे है और शांत वातावरण में प्राकृतिक सौन्दर्य तथा स्वतंत्र विचरण कर रहे वन्य प्राणियों को भी नजदीक से देखने का उन्हे एक अलग ही आंनंद का अनुभूति हो रहा है पुरे गरियाबंद जिले के प्रसिध्द वाटॅरफाल मैनपुर विकासखण्ड के पहाडी देवदहरा जलप्रपात, बोतलधारा जलप्रपात, गोडेना फाल जलप्रपात, बुढाराजा जलप्रपात, शेष पगार जलप्रपात जैसे पहाडो के उपर कई जलप्रपातो में इन दिनों खासकर युवाओं की टोली पिकनीक मनाने पहुच रहे है ।
वाॅटरफाल तक पहुचने के लिए नही है सडक बावजूद इसके खतरों को पार कर पहुचते है पर्यटक
मैनपुर क्षेत्र के पहाडी के उपर वाॅटरफाल जो 20 किलोमीटर दुर से मैनपुर नगर से देखा जा सकता है ऐसे वाटरफाल बोतलधारा, शेष पगार, कुपाल जलप्रपात, बुढाराजा जलप्रपात, गोडेना फाल में पहुचने के लिए सडक नही है बावजूद इसके क्षेत्र व शहरों से बडी संख्या मेें पर्यटक अनेक कठिनाईयों को पार कर इन वाॅटरफालों तक पहुच रहे है , और बारिश के इन दिनो में वाॅटरफाल से गिर रहे झरने में नहाने का एक अलग ही मजा ले रहे है इन वाॅटरफालो में सुरक्षा की दृष्टि से कोई सुविधा नही है यहा फोटोग्राफी करना और सेल्फी लेना कभी कभी किसी खतरे से कम नही है इसलिए शासन व पर्यटन मंडल को चाहिए इन वाटरफालों तक पहुचने के लिए बेहतर सडक के साथ वहा सुरक्षा के लिहाज से सुविधाए उपलब्ध किया जाए और सुचना बोर्ड लगाकर पर्यटकों को खतरे से आगाह किया जाए ।
अद्वितीय नैसर्गिक सौंदर्य समेटे हूए देवदाहरा जलप्रपात
मैनपुर के देवदाहरा जलप्रपात अपने मनोरम छटा बिखेर रहा है जिसे देखने प्रदेश के कोने कोन से बडी संख्या में लोग पहुच रहे है देवदाहरा जलप्रपात अपने आप में एक अद्वितीय और अनुठा जलप्रपात है लेकिन यहा पहुचने के लिए पर्यटको को भारी मशक्कत और परेशानियो का सामना करना पड रहा है,क्षेत्र के लोगो ने घने जंगल के बीच इस मनमोहक जलप्रपात को पर्यटन स्थलो के सूची में शामिल करते हूए पर्यटको के आने जाने के लिए यहा सुविधाए उपलब्ध कराने की मांग पर्यटन मंडल छत्तीसगढ शासन से लगातार किया जा रहा है लेकिन अब तक इस पर्यटन स्थल के तरफ शासन प्रशासन द्वारा ध्यान न देना समझ से परे है ।

बारिश में उदंती के गोडेना जलप्रपात लोगो करता है आकर्षित
उदंती सीतनदी टाईगर रिर्जव के उदंती अभ्यारण्य के भीतर कई दर्शनीय व पर्यटन स्थल है लेकिन दुर्गम जंगलो के भीतर होनेे के कारण पर्यटक चाह कर भी यहा नही पहुच पाते एक तो वहा तक पहुचने के लिए दलदल कच्चा सडको को पार कर जाना पडता है तो दुसरी तरफ कई किलोमीटर पैदल भी चलना पडता है लेकिन बारिश के इन दिनो में उदंती अभ्यारण्य के पश्चिम भाग में स्थित सीढीनुमा प्राकृतिक गोडेना जलप्रपात प्राकृतिक सौन्दय्र रचना की अदुभत क्षमता का उदहारण है लगभग 200 मीटर पहाडी से कल-कल करते पानी की धार ऐसे जमीन पर गिरती है कि इसे दखने वाले बरबस आचंभित हो जाते है प्राकृतिक रूप से इस जलप्रपात को देखने के लिए मिलो पैदल जाना पडता है लेकिन बारिश के इन दिनों में यहा तक पहुचना दुर्गम रास्तो के कारण बेहद ही कठिन है ,किन्तु यहा बारिश के दिनो में झरने देखने की एक अदभुत ही सुखद अनभुव प्राप्त होती है।
बोतल धारा जलप्रपात अपना प्राकृतिक अनुपम छटा बिखेर रहा है
बारिश के इन दिनो में इस वनांचल पहाडी क्षेत्र में कुछ जंगलो का नजारा बेहद खुबसुरत होता है खास तौर पर वाटर फाल अपने पुरे शबाब पर होते है लोग इनके प्राकृतिक सौन्र्दय का आंन्नद लेने जाते है कुल्हाडीघाट के पहाडी पर बोतल धारा के रूप में पुरे प्रदेश में प्रसिध्द है पहली ही बारिश के साथ इस वाटर फाल को तहसील मुख्यालय मैनपुर से देखा जा सकता है लगभग दो किलोमीटर की उचाई से बोतल की आकार लिए धुआंधार जल प्रपात को गिरते देखने का एक अलग ही अनुभव है यहा पहुचने के लिए मैनपुर से बुडार तक 7 किलोमीटर वाहन से पहुचा जाता है और 6 किलोमीटर पैदल दुर्गम पहाडी रास्तो को पार कर यहा पहुचते है हर बारिश के दिनों क्षेत्र के खासकर युवा यहां पहुचते है और जल प्रपात का आंन्नद लेते है यह जंगल जितनी खुबसुरत ही उतनी खतरनाक है लेकिन कही पर भी चेतावनी बोर्ड नही लिखा है,लेकिन यहा चेतावनी बोर्ड लगाया जाना बेहद आवश्यक है सेल्फी और ग्रुप फोटो यहा लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है इसलिए इस खुबसूरत वाटर फाल के तरफ प्रशासनिक तौर पर सुरक्षा के इंतजाम पर्यटन मंडल को करना चाहिए वैसे यहा मात्र चार माह ही बारिश के दिनों मे वाटर फाल देखने को मिलता है बहरहाल बोतल धारा जल प्रपात की खुबसुरती को वंही बिहड जंगलो को पार को पहुचने के बाद ही अहसास किया जा सकता है ।

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