सेलूद। बजरंग चौक सेलूद के वार्ड क्रमांक 02 में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथावाचक नागेंद्र महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति और भक्त प्रह्लाद की कथा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गाय को उसके बछड़े से दूर कर दिया जाए तो वह क्रोध में दौड़ पड़ती है, उसी प्रकार भगवान भी अपने सच्चे भक्तों पर आने वाले संकट को सहन नहीं करते और उनकी रक्षा के लिए स्वयं प्रकट हो जाते हैं।
कथावाचक ने भक्त प्रह्लाद के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि प्रह्लाद का जन्म राक्षस कुल में हुआ था, लेकिन उनके हृदय में भगवान विष्णु के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति थी। उनके पिता हिरण्यकशिपु ने उन्हें अनेक प्रकार की यातनाएं दीं, किंतु वे भगवान के नाम से कभी विचलित नहीं हुए। अंततः भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान ने नरसिंह अवतार धारण कर हिरण्यकशिपु का वध किया और अपने भक्त की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति, विश्वास और समर्पण से भगवान अवश्य प्रसन्न होते हैं। कथा श्रवण से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा धर्म, संस्कार और सदाचार की भावना मजबूत होती है।
नागेंद्र महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन किया। कृष्ण जन्म की मनोहारी कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और पूरा कथा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा।
कथावाचक ने बताया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा की कारागार में जन्म लिया। कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनते ही श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए और वातावरण भक्तिमय हो गया।
