अर्जुन पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से जारी, वन विभाग के अधिकारी गहरी नींद में!

पाटन।,,, क्षेत्र में इन दिनों हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई खुलेआम जारी है, लेकिन जिम्मेदार वन विभाग के अधिकारी आंख मूंदे बैठे हुए हैं।ऐसे नहीं है कि विभाग के अधिकारी को पता नहीं है इन्हें सब पता है कारवाही नहीं करते इसी तरह मटिया से तेलीगुंडरा जाने वाली सड़क किनारे खेतों में अर्जुन (कौहा) पेड़ों की अवैध कटाई धड़ल्ले से की जा रही है।

लकड़ी कोचियों द्वारा डीजल मशीन लगाकर पेड़ों को काटा जा रहा है, वहीं वन विभाग की टीम कहीं नजर नहीं आ रही है।जब पर्यावरण प्रेमी टीम मौके पर पहुंची तो कटाई कर रहे लोग मशीन छोड़कर इधर-उधर होने लगे। पहले खुद को मजदूर बताकर मामला दबाने की कोशिश की गई, लेकिन पूछताछ में पूरा खेल सामने आने लगा। खेत मालिक के पहुंचने के बाद जानकारी मिली कि चार बड़े पेड़ों को काटने का सौदा करीब पांच हजार रुपये में किया गया है। वहीं कटाई करने वाले लोग यह भी कहते नजर आए कि लकड़ी को क्षेत्र के आरा मिलों में खपाया जाएगा।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर कार्रवाई नहीं की जा रही है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि लकड़ी कोचिया, आरा मिल संचालक और कुछ अधिकारी मिलकर लंबे समय से यह अवैध कारोबार चला रहे हैं। यही कारण है कि पाटन और आसपास के आरा मिलों में कभी बड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिलती।क्षेत्र में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है और तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे समय में हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि लगातार पेड़ कटने से ही मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है और तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते अवैध कटाई पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि सुबह से शाम तक लकड़ियों की लोडिंग होती रहती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब खुलेआम मशीनों से पेड़ काटे जा रहे हैं तो वन विभाग की गश्त आखिर कहां है? क्या विभाग को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहना है?लोगों ने मांग की है कि पाटन क्षेत्र के सभी आरा मिलों में तत्काल छापेमार कार्रवाई की जाए, अवैध लकड़ी जब्त की जाए और पेड़ कटाई में शामिल लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई हो। यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा तो पर्यावरण को होने वाला नुकसान आने वाले समय में बड़ी मुसीबत बन सकता है

जिम्मेदार उच्च अधिकारी का जवाब वही घिसा पीटा होता है देखंगे शिकायत मिलने पर कारवाही करेंगे जैसे बातें करते है जिससे लगता पूरा विभाग ही मिला हुआ है

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