मोतीपुर में ‘स्वामित्व योजना’ पर बड़ा विवाद, तहसीलदार से लेकर कलेक्टर जनदर्शन तक शिकायत के बाद अब सुराज अभियान में पहुंचे ग्रामीण

पाटन।  ग्राम पंचायत मोतीपुर में सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कथित अवैध कब्जे और ‘स्वामित्व योजना’ में अनियमितता का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। ग्राम पंचायत, सरपंच एवं ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव की सार्वजनिक ‘बेलबारी’ भूमि (खसरा नंबर 526) को मिलीभगत कर निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करा दिया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की शिकायत पहले ही तहसीलदार कार्यालय एवं कलेक्टर जनदर्शन में की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निराकरण नहीं हुआ। कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने अब राज्य सरकार के सुराज अभियान में भी आवेदन देकर न्याय की मांग की है।

पंचायत के अनुसार उक्त भूमि वर्षों से रामायण, कीर्तन, भागवत कथा, कबीर ग्रंथ पाठ सहित सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों के लिए उपयोग होती रही है। इसी भूमि से गांव के तीन प्रमुख सार्वजनिक रास्ते भी गुजरते हैं। आरोप है कि वर्तमान में वहां प्रीकास्ट बाउंड्रीवॉल बनाकर कब्जा कर लिया गया है, जिससे ग्रामीणों के आने-जाने के रास्ते बंद हो गए हैं।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 03 जनवरी 2023 को दिखाई गई ग्रामसभा की बैठक संदिग्ध है। पंचायत का दावा है कि बैठक की उपस्थिति पंजी में न तो सरपंच और न ही सचिव के हस्ताक्षर हैं, साथ ही कोरम पूरा नहीं होने के बावजूद प्रस्ताव को वैध दर्शाया गया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ड्रोन सर्वे और ‘स्वामित्व योजना’ के दौरान अधिकारियों एवं सर्वे टीम की मिलीभगत से सार्वजनिक भूमि को प्रदीप नारायण अग्रवाल एवं कीर्तिनारायण अग्रवाल के नाम दर्ज किया गया।

ग्राम पंचायत मोतीपुर ने 24 और 30 अप्रैल 2026 की बैठकों में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक भूमि एवं आम रास्तों से तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए, गलत प्रविष्टियां निरस्त की जाएं और भूमि को पुनः ग्राम समाज के उपयोग हेतु बहाल किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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