कर्मा जयंती विशेष:भक्ति में सक्ति की साधना है संत माता कर्मा – खेमलाल साहू

पाटन/ चैत कृष्ण पक्ष एकादशी पाप मोचनी के पावन दिवस में संत माता कर्मा का जन्म झांसी की पावन धरती में आज से लगभग 1010 वर्ष पहले, बहुत ही सम्पन्न तैलकार रामशाह के यहां सम्वत् 1073 के चैत्र कृष्ण पक्ष 11 को एक सुकन्या ने जन्म लिया। पिता रामशाह परिवार से धार्मिक संस्कार तो मिला ही था, इसलिए बचपन से भगवान श्री कृष्ण जी के भजन-पूजन आराधना में ही कर्मा माता को विशेष आनंद मिलता था। अपने शांत, धार्मिक प्रवृत्ति, पत्निव्रता धर्म से अपने पति के हृदय में भगवान के प्रति अनुराग पैदा करने में सफल रही। अपने त्याग , तपस्या और समर्पण भाव से भगवान कृष्ण जी साक्षात दर्शन दिए और खिचड़ी का भोग भी लगाए l ऐसी महान संत का जन्म तैलिक कुल में जन्म लेकर तेली समाज को संकट से उबारने का काम भी किया है l तेली कुल में महिला वंदनीय पूज्यनीय है l जिनके बताये मार्ग में चलकर समाज उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है l तेली समाज मूलतः व्यपार करने वाला समाज है l तेल जिसे औषधि भी माना जाता है l जिसका व्यपार करके जीवन यापन किया जाते रहा है l तेल के व्यवसाय में जब संकट की घड़ी आयी तभी मां कर्मा ने अपने समर्पण भाव से भगवान कृष्ण जी को प्रसन्न करके समाज को संकट से उबारने के लिए प्रार्थना किया और भगवान ने उबारा भी दिया l माता कर्मा की भक्ति में इतनी शक्ति थी कि कर्मा के खिचड़ी को ग्रहण करने के लिए प्रभु को मंदिर से निकलकर स्वयं चलकर माता कर्मा के पास आना पड़ा और कर्मा को आशीर्वाद भी प्रदान किया कि सदा मुझे खिचड़ी का प्रथम भोग लगेगा l भगवान जगन्नाथ मंदिर में आज भी खिचड़ी का ही भोग लगाया जाता है l जगन्नाथ के भात अउ जगत पसारे हाथ की कहावत आज भी चरितार्थ है l समाज मे फैली कुरीतियों को भी दूर करने का कार्य माता कर्मा ने किया है l

खेमलाल साहू प्रमुख सलाहकार अरसनारा परिक्षेत्र ने बताया कि भक्त माता कर्मा की भक्ति में ही इतनी शक्ति थी, जो कि तेली समाज के लिए साधना करके संगठित कर दिया l तेली समाज एक संगठित समाज है जिसमे पार से लेकर प्रदेश स्तर के संगठन कार्यरत है l पूरे देश मे भी तैलिक वैश्य महासभा के नाम से संगठन कार्य कर रही है l समाज का स्वयं का लिपिबद्ध नियमावली है जो कि समाज का दर्पण है l उनके अनुसार ही समाज संचालित हो रहा है l तेली समाज महिला शसक्तीकरण की दिशा में अग्रणी भूमिका में कार्य कर रही है l माता कर्मा स्वयं महिला थी और अपने नाम के अनुरूप अपने कर्म की रचना किया है इसलिए उसे कर्मा नाम मिला है l नारी होकर समाज मे नई चेतना लायी है l जिस समय महिलाएं घर से बाहर नही निकलती थी उस समय समाजिक चिंतन करने वाली एक महिला ही थी और आज भी समाज मे महिलावो का स्थान अग्रिम पंक्ति में है l तेली समाज के द्वारा जयंती के अवसर पर माता कर्मा के सतकर्मो को जीवन मे उतारने का दिवस होता है l इसलिए घर घर पूजा होती है और गांव गांव में जयंती मनाई जाती है l जयंती समाजिक एकता और संगठन के भाव को प्रदर्शित करती है l

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