शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजिम में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सफल समापन

प्रकृति, विकृति और संस्कृति—इन तीनों शब्दों में ‘कृति’ निहित है – डॉ. विनय कुमार पाठक

राजिम,शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजिम में पीएम उषा द्वारा प्रायोजित 6 नवंबर से 8 नवंबर तक संस्था प्रमुख डॉ. सविता मिश्रा के मार्गदर्शन में संचालित “सतत् विकास के लिए पर्यावरण प्रबंधन” पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन हुआ।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक , कुलपति थावे विश्वविद्यालय, बिहार थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वन के बिना जीवन अधूरा है। प्रकृति, विकृति और संस्कृति—इन तीनों शब्दों में ‘कृति’ निहित है, जो यह दर्शाता है कि मानव का प्रत्येक कार्य उसके व्यवहार पर आधारित होता है। जब हमारा व्यवहार संतुलित, संवेदनशील और उत्तरदायी होता है, तभी सही अर्थों में उसका क्रियान्वयन संभव हो पाता है। अतः हमारे आचरण में निहित ‘कृति’ ही यह निर्धारित करती है कि हम प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करेंगे या उससे दूर होते जाएंगे।

कार्यक्रम के विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. गोवर्धन यदु ,सहायक संचालक, उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ ने कहा कि नकारात्मक ऊर्जा 90% विद्यमान तथा सकारात्मक ऊर्जा 2% है । सस्टेनेबल डेवलपमेंट का यही अर्थ है कि हम नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलकर उसका उपयोग करें।

इसी कड़ी में विशेष अतिथि रुपेश चंद्र श्रीवास्तव आईएएस भारत सरकार ने कहा कि सब में ईश्वर है ईश्वर में सब है। अतः हमें प्रकृति का उपयोग साध्य के रूप में करना चाहिए।

अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्था प्रमुख डॉ. सविता मिश्रा ने कहा कि क्षिति, जल, पावक, गगन और समीर—इन पंचतत्त्वों को ऋग्वेद में ‘पंचमहाभूत’ कहा गया है। इन तत्वों के महत्व को स्पष्ट करते हुए उन्होंने सूक्ष्मता से बताया कि पर्यावरण प्रबंधन, इन महाभूतों के संतुलन को बनाए रखने का वैज्ञानिक माध्यम है, और सतत विकास के लिए इनका संरक्षण अत्यावश्यक है एवं कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए संयोजक डॉ. समीक्षा चंद्राकर, सह संयोजक डॉ. मोहन लाल वर्मा एवं कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती क्षमा शिल्पा चौहान, डॉ. देवेंद्र देवांगन, श्री तामेश्वर मार्कण्डेय,श्रीमती श्वेता खरे,डॉ. सर्वेश कौशिक पटेल,श्री खोमन साहू,निधि बग्गा,सोनम चंद्राकर, वासुदेव धीवर,राहुल सोनकर, खुबलाल साहू व तकनीकी सहायक मनीष साहू, गरिमा साहू, टेमन साहू को बधाई दी।

तीन दिवसीय सेमिनार के अंतिम दिवस के प्रथम सत्र में प्रमुख वक्ता डॉ. तरूण कुमार ठाकुर वैज्ञानिक प्रोफेसर ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक मध्यप्रदेश ने अपने व्याख्यान में कहा कार्बन क्रेडिट पर्यावरण प्रबंधन का एक प्रभावी माध्यम है। किसान द्वारा धान कटाई के बाद खेत में बचा अवशेष प्राकृतिक कार्बन साइक्लिंग में योगदान देता है, जो जीवधारियों और पर्यावरण दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए सरकार को चाहिए कि ऐसे किसानों को उचित प्रोत्साहन एवं मूल्य प्रदान करे, जो अपने कृषि कार्य से कार्बन संतुलन बनाए रखते हैं। जबकि यही कार्य किसी उद्योग द्वारा किया जाए तो उन्हें भारी भरकम क्षतिपूर्ति देनी होती है। वस्तुतः कार्बन के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। इस सत्र में बतौर विषेषज्ञ डॉ हित नारायण टंडन एच.ओ. डी. शास. महाविद्यालय,कुरूद का सहयोग प्राप्त हुआ।

इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में सलाहकार समिति के रूप में डॉ सुब्रत दोलूइ पीडीएफ, कॉनकॉर्डिया विश्वविद्यालय, कनाडा, डॉ. कमलकांत तिवारी एन. आई. टी. गढ़वाल,d उत्तराखंड, डॉ. नीरज श्रवण पीएमसीओई,मध्य प्रदेश का विशेष योगदान रहा। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार से सभी सहायक प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता, जनभागीदारी शिक्षक एवं विभिन्न महाविद्यालय से आए प्रतिभागी, शोधार्थी व छात्र छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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