रोशन लाल अवस्थी के कलम से
अमलीपदर। उदंती रेंज में लकड़ी तस्करी का एक नया और चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। तस्कर अब ‘पुष्पा’ मूवी स्टाइल में कीमती सागौन की लकड़ी को उदंती नदी के बहाव के सहारे उड़ीसा तक पहुंचा रहे हैं। बताया जा रहा है कि तस्कर नदी किनारे मौजूद उत्तर और दक्षिण उदंती के जंगल से काटे गए लट्ठों को बाँधकर उनके ऊपर खड़े होकर बहते पानी से सीमा पार कर जाते हैं। यह नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है, जबकि वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। विभाग सैटेलाइट निगरानी और हाई-टेक मॉनिटरिंग के दावे करता है, लेकिन बहती लकड़ियों को कोई सिस्टम पकड़ नहीं पा रहा। इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

उदंती रेंज की डिप्टी रेंजर चंद्रावली ध्रुव ने बताया कि “जांच के लिए टीम गठित की गई है और जल्द कार्रवाई होगी तस्करों की पहचान के लिए आदमी लगा दिए गए हैं”। पर ग्रामीणों का गुस्सा थम नहीं रहा — उनका कहना है कि फाइलों में उलझा सिस्टम तस्करों के सामने बेबस दिख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तस्कर लगातार नए तरीके अपनाकर वन विभाग को चकमा दे रहे हैं। अगर जल्द कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो यह ‘सिनेमाई तस्करी’ आने वाले दिनों में और खतरनाक रूप ले सकती है, जिससे न सिर्फ सागवान, बल्कि टाइगर रिजर्व की सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
