प्रपंच और परमार्थ करते हुए जीवन में कैसे उद्धार करें इसलिए ईश्वर सदगुरु रूप में आते है – रामानंदाचार्य नरेंद्रचार्य महाराज



पाटन। कृषि उपज मंडी पाटन में श्री कथा यज्ञ का तीसरे दिन व्यास पीठ से रामानंदाचार्य नरेंद्रचार्य महाराज के कृपा प्राप्त प्रवचनकार भूषण रोहित मोडे ने कहा जिसने सदगुरु से दीक्षा ली उसके जीवन का कल्याण हो गया। ईश्वर और सदगुरु एक ही है । गुरु जन्मों जन्मों से हमारे पीछे चल रहे है। सदगुरु से प्रेम किया तो ईश्वर स्वयं आपके पीछे आते है। जैसे शबरी के पास भगवान राम आए। इसका पहला कदम नाम दान प्राप्त करना है। इसी कड़ी में जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्रचार्य जी ने ऑनलाइन गुरु का महत्व बताते हुए बताया कि जीवन में सभी को सुख,समाधान,आनंद चाहिए। यदि आपको शाश्वत सुख चाहिए तो तुम मुझे भक्ति दो मै तुम्हें धैर्य दूंगा। प्रपंच और परमार्थ करते हुए जीवन में मोक्ष प्राप्त करना है तो सद्गुरु के शरण जाना होता है। ईश्वर ने मनुष्य का जन्म दिया है, अनेक सुविधा दी है। हमें सोचना चाहिए कि मनुष्य का जन्म क्यों मिला है। हम पिछले जन्म के प्राक्तन लेकर आए है जिसमें सुख और दुख मिलते है। इसे सुधारने के लिए कर्म करने का ईश्वर ने अधिकार दिया है। हम जीवन को कैसे सुखी बनाएंगे इसलिए सदगुरु के द्वारा मार्गदर्शन दिया जाता है। संसार में बहुत से साधारण लोगों ने प्रयास किया और वे देव तुल्य हो गए। महाराष्ट्र के संत रामदास ने अपने अभंग में कहा है कि श्री राम ने संदीपनी और श्री कृष्ण ने वरिष्ठ को गुरु किया। भगवान ने हमें बहुत सी चीजें दी जिसमें सदगुरु भी है। जिसने पुण्य किए वे गुरु के पास आए। जो महात्मा हो गए उन्होंने गुरु के सानिध्य में मोक्ष प्राप्त किया। मै आपको सरल मार्ग बताऊंगा जिससे आपका अच्छा प्रपंच होगा और आपके हाथों परमार्थ भी होगा। इसके लिए कुछ छोड़ने की जरूरत नहीं है। अभी आप दीक्षा का प्रथम पायदान पर है उसे उपासक दीक्षा दे रहे है। यह सदगुरु को जानने के लिए है। मुझे दो तरह की परम्परा है पहली नवनाथ परंपरा का सदगुरु हूं दूसरा श्री राम परंपरा की रामानंदाचार्य की है। शास्त्रों में कहा है कि इस कलयुग में ईश्वर सदगुरु रूप में होते है। परब्रम्ह है। ईश्वर ने मुझे गुरु रूप में आपको दिया है। मै आपका कल्याण करूंगा। आप कहीं भी रहे मुझे आवाज देंगे, मै किसी न किसी रूप में आपके पास आऊंगा। आपको रोज 10 मिनिट भक्ति करना है और स्वप्न में भी किसी का बुरा नहीं सोचना। जो कठिन परिस्थिति में हो उसकी सहायता करना। किसी को धोखा नहीं देना। समाज के लिए करना, समाज ऋण देना।
रामानंदाचार्य ने ऑनलाइन 50 लोगों ने नामदान दिया।शास्त्रोक्त पद्धति,पूजा हवन पुरोहितों ने विधि संपन्न कराया।
कार्यक्रम के मध्य में रासलीला की गई तथा भंडारा प्रसादी दी गई।
कार्यक्रम में दुर्ग के संसद विजय बघेल के साथ जितेंद्र वर्मा प्रदेश मंत्री, नगर पंचायत पाटन अध्यक्ष योगेश निक्की भाले के साथ स्थानीय पार्षदों ने रामानंदाचार्य जी की दिव्य सिद्ध पादुकाओं का दर्शन लाभ लिया। अध्यक्ष राजकुमार पवार ने संसद और अथिति का आभार व्यक्त किया। यजमान मोहन देवांगन एवं मीरा देवांगन के साथी बड़ी संख्या में भक्तों, शिष्यों ने भाग लिया।

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