अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण की भूमिपूजन पर युवाओं ने जलाये 1008 दिए…धन्य है छत्तीसगढ़ की धरती जहाँ भगवान राम के कदम पड़े- जिनेश

पाटन।दक्षिण पाटन क्षेत्र के युवा संगठन ने मिलकर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी के जन्मस्थान में मन्दिर निर्माण के भूमिपूजन के उपलक्ष्य में 1008 दीपक जलाकर आराधना किये। कार्यक्रम की शुरुआत रानीतराई के बजरंग बली मंदिर प्राँगण से पूजा अर्चना कर जय श्री राम के घोष के साथ बस स्टैंड से मुख्यमार्ग होते हुये वीर नारायण सिंह चौक के समीप पहुच कर दीप प्रज्वलित कर प्रभु श्री राम के मन्दिर निर्माण की बधाई देते हुए आपस मे खुशिया बाटी गयी। पूरे क्षेत्र के युवाओ में रानीतराई से बाबा चन्द्राकर,रेखराज साहू,शब्बीर खान,निर्मल जैन, धनराज साहू,बबलू ,ट्विकंल ओदरागहन से जिनेश जैन राजा डिडगा से श्रीकान्त चंद्राकर, जामगांव आर से अभिषेक चंद्राकर डीघारी से लुभम बंछोर, निपानी से अनिल सीता सिन्हा, गौरव सिन्हा, एवम क्षेत्र लगभग समस्त गांवो से सैकड़ो की संख्या में युवा मौजूद रहे।

ओदरागहन के युवा सरपंच जिनेश जैन ने बताया कि धन्य है हमारा छत्तीसगढ़ जहाँ प्रभु श्री रामजी आकर रुके थे हम धन्य और गौरवशाली है कि जिस श्री राम जी को विश्व अपना आराध्य मनाती है, प्रभु श्री राम को जन्म देने वाली मां माता कौशल्या छत्तीसगढ़(दक्षिण कौशल) से रही, राजा भानुमत की इकलौती पुत्री थी लगभग 355 सीढ़ी चढ़ कर मैकल पर्वत पर एक प्राकृतिक गुफा है जो 40 फुट लंबी सुरंगनुमा है, प्रभु श्रीराम जी माता जानकी, श्री लक्ष्मण जी अपने 14 वर्ष के वनवास का कुछ समय यहां व्यतीत किये थे।
इस गुफा में एक कुंड भी है, छोटी जलधारा बह रही है, वहां के लोग इसे माँ नर्मदा जी कह कर पूजा करते है,
सरपंच जैन कहते है कि मकरसंक्रांति को यहाँ भव्य मेला भी लगता है चरणतीर्थ एक पवित्र औऱ आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है जहाँ श्री राम जी का श्रीचरण पड़ा, और उनके तेज प्रताप से नर्मदा जी को एक धारा के रूप में प्रगट होना पड़ा शायद वनवास काल मे श्री राम जी,माता सीता लक्ष्मण जी की प्यास माँ नर्मदा बुझाती रही होगी जनश्रुति है कि श्री राम जी वनवास काल मे आये थे धन्य है छत्तीसगढ़ जो माता कौशल्या की भूमि है और धन्य है हम सब छत्तीसगढ़ में श्री राम जी का शुभ आगमन हुआ उसके श्री चरण पड़े थे।
प्रभु श्री राम का ननिहाल है छत्तीसगढ़

बाबा चन्द्राकर ने कहा कि भगवान श्री राम का ननिहाल हमारे छत्तीसगढ़ में ही है अर्थात माँ कौशल्या का जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ था भगवान श्री राम राजा भानुमंत के भांजे थे और उनको प्रभु मानकर पूज्यनीय होने की रीति आज हमारे बीच एक उदाहरण यह है कि आज भी छत्तीसगढ़ में भांजे के रिश्ते हो भगवान स्वरूप मानकर चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया जाता है। यह प्रथा आज भी छत्तीसगढ़ में चलती है और हम सब भगवान राम के अनुयायी है।
जामगांव आर के अभिषेक चंद्राकर कहते है कि भगवान श्री राम के बताए रास्ते पर चलने पर से जीवन सार्थक बनेगा। मर्यादा पूर्वक जीवन जीने की कला इस जगत को प्रभु श्रीराम से मिली है। हम भगवान के बताए उद्देश्यों को सोचे समझे और अपनी जीवनशैली में उतारे तब हमारा जीवन सार्थक है । सत्य की जीत असत्य का पराजय यह हमारे रामचरित मानस में अंकित है अतः हमें अनुसरण करना चाहिए। यही हमें जीवन जीने की कला सीखा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *