लोकेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट…..
अमलीपदर। गरियाबंद जिले के अमलीपदर क्षेत्र के नयापारा ग्राम की 60 वर्षीय इच्छाबाई पटेल की मौत ने एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही और संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया। सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मृत्यु हुई, लेकिन शव वाहन न मिलने से परिजनों को उसकी लाश खटिया पर रखकर पैदल ही गांव तक ले जाना पड़ा।
परिजन सुबह से अस्पताल प्रबंधन और 108 एंबुलेंस कर्मचारियों से गुहार लगाते रहे, मगर मदद के बजाय उन्हें सिर्फ बहाने सुनने पड़े। निजी वाहन मालिकों से मदद मांगी गई तो उन्होंने ₹4000–₹5000 तक की मांग कर दी। मजबूर गरीब परिवार इतनी रकम नहीं जुटा सका। अंततः परिजन खटिया लेकर पहुंचे और बाजार से गुजरते हुए इच्छा बाई का शव गांव तक ले गए।
यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें भर आईं। लोगों ने कहा कि “यह प्रशासन की सबसे बड़ी विफलता है। इंसान की मौत के बाद भी गरीब को सम्मान नहीं मिल पा रहा।”
यह कोई पहली घटना नहीं है। अमलीपदर में पहले भी शव को ट्रैक्टर या अन्य निजी साधनों से ले जाने की मजबूरी झेलनी पड़ी है। लेकिन इस बार खटिया पर शव ढोए जाने का दृश्य स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत का सबसे करुण और कड़वा उदाहरण बन गया।
सरकार एक ओर चांद तक पहुंचने की उपलब्धियों का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में शव वाहन जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं। यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है बल्कि गरीब परिवारों की विवशता और तंत्र की असंवेदनशीलता को भी आईना दिखाती है।
