पाटन। बढ़ती महंगाई और महंगे गैस सिलेंडरों के बीच दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक के ग्राम अचानकपुर के किसान राजकुमार साहू ने एक अनोखी खोज कर सबको चौंका दिया है। उन्होंने गाड़ियों से निकलने वाले जले हुए ऑयल को प्रोसेस करके ऐसा ईंधन तैयार किया है, जिससे रसोई का चूल्हा आसानी से जलाया जा सकता है।
इस प्रक्रिया में ब्लोअर का उपयोग किया गया है, जिसकी मदद से जला हुआ ऑयल बेहतर तरीके से जलता है और चूल्हे की आंच स्थिर बनी रहती है।
राजकुमार साहू का कहना है— “मैंने देखा कि गाड़ियों से निकलने वाला जला ऑयल अक्सर फेंक दिया जाता है। सोचा क्यों न इसे काम में लाया जाए। थोड़ी मेहनत और प्रयोग के बाद ब्लोअर की मदद से मैंने इसे रसोई में जलाने लायक ईंधन बना लिया। मैंने इस ईंधन का उपयोग करके देखने के बाद एक लीटर जले हुए ऑयल से चार लोगों का खाना एक सप्ताह तक बनाया जा सकता है।
इस ईंधन का इस्तेमाल का उपयोग कर इसे एलपीजी सिलेंडर के विकल्प के तौर पर उपयोग किया जा सकता है। जिससे घरेलू खर्च में बड़ी बचत हो सकती है। यदि इस पहल को सरकारी सहयोग और वैज्ञानिक परीक्षण के बाद बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाए तो यह रसाई ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी क्रांति साबित हो सकती है। किसान राजकुमार साहू ने इसके पूर्व देशी जुगाड से गोबर घोलक यंत्र भी बनाया था।
