शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन श्रोता भाव-विभोर हुए

उतई। नगर में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन गुरुवार को भागवत कथा वाचक पंडित संतोष अवस्थी ने शिव विवाह का प्रसंग सुनाया। इसे सुन श्रोता भाव विभोर हुए।

अवस्थी महाराज ने भागवत कथा श्रवण कराते हुए कहा कि मनु शतरूपा की कन्या आकूति का विवाह पुत्रिका धर्म के अनुसार रुचि प्रजापति से तथा प्रसूति कन्या का विवाह ब्रह्माजी के पुत्र दक्ष प्रजापति से हुआ। उससे उन्होंने सुंदर नेत्रों वाली सोलह कन्याएं उत्पन्न कीं। इनमें से तेरह कन्याएं श्रद्धा, मैत्री, दया, शांति, तुष्टि, पुष्टि, क्रिया, उन्नति, बुद्धि, मेधा, तितिक्षाए और मूर्तिद्ध धर्म की पत्नियां बनीं। अग्निदेव स्वधा नामक कन्या समस्त पितरों की तथा सती नाम की कन्या महादेव की पत्नी बनीं। उन्होंने कहा कि सती अपने पतिदेव की सेवा में ही संलग्न थीं।

दक्ष प्रजापति की सभी कन्याओं को संतान की प्राप्ति हुई लेकिन सती के पिता दक्ष ने बिना किसी अपराध के भगवान शिवजी से प्रतिकूल आचरण किया था। इसीलिए युवावस्था में क्रोधवश योग द्वारा स्वयं ही अपने शरीर का त्याग कर देने से सती को कोई संतान न हो सकी।

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