- अवैध आरा मिल की जानकारी नहीं होना अधिकारियों पर है सवालिया निशान
पाटन। नियमों को ताक में रखकर क्षेत्र में गौर कानूनी आरा मिले चल रही है। इससे राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं क्षेत्र में अवैध कटाई भी धड़ल्ले के साथ हो रही है। जिस कारण हरे भरे पद बिना किसी रोक टोक के कांटे जा रहे है। हर साल वन विभाग लाखों पेड़ लगाने का दावा भी करता लेकिन कांटे गए पेड़ उन्हें नहीं दिखते।
पाटन ब्लॉक के ग्राम गुढ़ियारी में पिछले 2 साल से अवैध रूप से आरा मिल का संचालन किया जा रहा था । पिछले 2 साल में वन विभाग को खबर ही नहीं लगी उसके नाक के नीचे अवैध रूप से आरा मिल का संचालन हो रहा है। जबकि यह आरा मिल मुख्य सड़क के किनारे ही स्थित है यहां से फॉरेस्ट विभाग के अफसर का भी आना जाना रहता है लेकिन दो साल में इस मिल के ऊपर वन विभाग के कर्मचारियों का ध्यान नहीं जाना कई सवालों के घेरे में है। जिसके खेत में अवैध रूप से आरा मिल चल रहा था वह खेत अजय तिवारी के नाम पर है।
सोमवार की सुबह-सुबह फॉरेस्ट विभाग के एसडीओ के नेतृत्व में उसकी पूरी टीम आरा मिल पर दबिश दी। जहां पर बड़ी संख्या में वहां पर लकड़ी मिली है। जिसकी गिनती कर पंचनामा बनाया गया। आरा मिल जिसके जमीन पर था उससे भी पूछताछ कर दस्तावेज मंगाए गए। लेकिन कोई दस्तावेज नहीं मिल पाया।
गौरतलब हो कि पाटन क्षेत्र में गाडाडीह के आसपास बहुत से आरा मिल संचालित है जिसमें आशंका जताई जा रहा है कि कई ऐसे आरा मिल है जहां पर नियमों की विपरीत काम किया जा रहा है। इस पर भी अंकुश लगाया जाना जरूरी है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियो का कहना है कि सभी आरा मिल की जांच किया जाना चाहिए राजस्व और फॉरेस्ट विभाग की एक टीम बनाकर जांच किया जाए तो इन आरा मिलो पर ढेर सारी खामियां मिल जाएगी।
लकड़ी और मशीन जप्त
फॉरेस्ट विभाग ने करवाई करते हुए लकड़ी और मशीन को जप्त कर लिया है। जिसे फारेस्ट विभाग के पाटन डिपो में रखा जाएगा। सभी 9 बजे कार्रवाई शुरू हुई जो कि शाम तक चलती रही।
पाटन क्षेत्र में धान कटाई के बाद खेतों में बेधड़क पेड़ो की कटाई कर क्षेत्र के आरा मिलो में खपाया जाता है। लेकिन अवैध कटाई को ना तो वन अमला और ना ही राजस्व अमला रोक लगा पाए है। बल्कि उनके ही नाक के नीचे अवैध आरा मिल का संचालन होना कई सवाल छोड़ जाता है कि जब आरा मिल संचालन की अनुमति नहीं था तो बिजली कनैक्शन कैसे मिल गया क्योंकि आरा मिल घरेलू बिजली लाइन से नहीं चल सकता है। आखिर दो साल बाद भी वन विभाग को आरा मिल की जानकारी कैसे नहीं हुई। जबकि जनप्रतिनिधियों द्वारा आरा मिल को लेकर पहले भी शिकायत किया जा चुका था।
सहायक परिक्षेत्र अधिकारी पाटन ने क्या कहा…….
जब आरा मिल संचालन की जानकारी डीपी वर्मा सहायक परिक्षेत्र अधिकारी पाटन से लिया गया तो उन्होंने कहा कि आरामिल अवैध रूप से चल रहा था। जब उनसे यह पूछा गया कि आखिर दो साल बाद भी आरामिल चलने की जानकारी आपको कैसे नहीं हुआ तब उन्होंने कहा कि बाकी बात आइए मिल बैठकर करते है कहते हुए मोबाइल डिस्कनेक्ट कर दिया।
नायाब तहसीलदार मनोज रस्तोगी ने बताया कि जिस जमीन पर आरा मिल संचालित था वह अजय तिवारी के नाम पर था। वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर आरा मिल को सीज कर दिया गया है।साथ ही वहां पर रखे लकड़ी भी सीज कर लिया गया है।
