खबर हेमंत तिवारी
पाण्डुका/वन परिक्षेत्र पांडुका के सांकरा बिट के कसहीबहरा कक्ष क्रमांक 76 में लगे सागौन प्लांटेशन में अब सैकड़ों की मात्रा में पेड़ो की अवैध कटाई हो रही है। इस प्लांटेशन में शुरू से भ्रष्टाचार हावी रहा।सालों पहले जब यहां पौधे का रोपण किया गया तो समय लगभग 35 हजार सागौन के पौधे लगाना था पर तात्कालिक बिट गार्ड और तात्कालिक रेंजर की मिली भगत से मात्र 15 हजार पौधे लगाए गए थे ।और बाकी पौधें को जमीदोज कर दिया गया या नाला में सड़ने के लिए फेंक दिया गया था।

बावजूद इसके अब जब लगे हुए पौधे पेड़ का रूप ले चुके हैं तो अब यह अवैध कटाई का हिस्सा बन गया है ।हैरानी की बात यह है कि यहां पर वन विभाग के जीपीएस सिस्टम से लगभग 40 मीटर के अंदर सुरक्षित पौधों की गिनती की गई थी और तस्करों ने इस सुरक्षित पौधे को काट दिया ऐसे में बीट गार्ड और चौकीदार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगी। क्या सड़क पर ही घूम कर सुरक्षा की जाती है या फिर चौकिदार जंगल भी जाता है।या चौक चौराहों या दुकानों में चौकीदार,, बैठकर सुरक्षा का जायजा लेते हैं

बता दे की जतमई मंदिर जाने के इस सड़क किनारे ही जंगल दिखाई देते हैं। बाकी थोड़ा अंदर जाने में पूरी जंगल सत्यानाश हो चुका है ऊपर से सागौन जैसे कीमती पौधे की कटाई से बीट गार्ड के कार्य प्रणाली पर सवाल उठ रहा है ।अपने मुख्यालय में नहीं रहने से अब पेड़ काटने वालों को मौका मिल गया है और उन्हें पता है कि यहां सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है जिस वजह से अंदरूनी क्षेत्रों में सैकड़ो की तादाद में सागौन प्लांटेशन में कटाई चल रही है तो वही जंगल से मोटरसाइकिल में कच्चे लकड़ियों की तस्करी भी आम बात है।

सिर बोझा वाले लोगों को सूखी लकड़ी लाने की छूट है पर दिन दहाड़े आसपास के गांव वाले इस जंगल से मोटरसाइकिल में जलाऊ लकड़ी ले जा रहे है।रोकने वाला नहीं होने की वजह से या फिर सब मिली भगत से तो नहीं चल रहा है।पर इसे रोक पाने में वन विभाग के कर्मचारी अधिकारी दिलचस्पी नहीं दिख रहे हैं।इन दिनों मुख्य वजह प्रधानमंत्री आवास योजना में उपयोग करने बल्ली और खिड़की दरवाजा में इस्तेमाल के लिए काटे जा रहे हैं। लकड़ी कटाई का कारण बन रहा है।
