रायपुर ।छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ी राहत दिलाने के उद्देश्य से कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन की मांग पर राज्य में तीन वर्षों से लगे स्थानांतरण प्रतिबंध को हटाने का निर्णय लिया है। फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मुख्य सचिव को प्रतिबंध हटाने के लिए आभार व्यक्त किया है।
प्रदेश संयोजक कमल वर्मा,प्रदेश प्रवक्ता जी आर चंद्रा,चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि वर्ष 2022 में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा स्थानांतरण नीति तो जारी की गई थी, लेकिन इसके तीन वर्ष बीतने के बाद भी राज्य सरकार द्वारा स्थानांतरण पर लगे प्रतिबंध को नहीं हटाया गया था। इससे प्रदेश के हजारों शासकीय कर्मचारी मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक रूप से परेशान हो रहे थे।फेडरेशन ने शासन को 13 मई को प्रेषित अपने पत्र में निम्न तीन प्रमुख मांगें रखीं हैं:
1.पति-पत्नी प्रकरण में पारस्परिक स्थानांतरण की सुविधा:वर्तमान नीति में पति-पत्नी दोनों यदि शासकीय सेवक हैं, तो उनके एक ही स्थान पर पदस्थापना की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। इससे दंपती दूर-दूर स्थानों पर कार्यरत होने के कारण पारिवारिक जीवन में असंतुलन उत्पन्न हो रहा है।
2.संगठनों के पदाधिकारियों को स्थानांतरण में छूट:पूर्व में मान्यता प्राप्त संगठन पदाधिकारियों को स्थानांतरण में छूट दी जाती थी, लेकिन वर्तमान स्थानांतरण नीति में इसका उल्लेख नहीं है। मध्यप्रदेश की नीति में यह व्यवस्था आज भी लागू है, जिसे छत्तीसगढ़ में भी शामिल किया जाना चाहिए।
3.गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को प्राथमिकता:दिव्यांग, कैंसर, हार्ट सर्जरी, किडनी ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित कर्मचारियों को स्थानांतरण में प्राथमिकता दी जाए, ताकि वे बेहतर इलाज व पारिवारिक सहयोग प्राप्त कर सकें।फेडरेशन ने उपरोक्त ज्वलंत मुद्दों को स्थानांतरण नीति में शामिल करते हुए मध्यप्रदेश की भांति ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता के साथ स्थानांतरण पॉलिसी का क्रियान्वयन करने की मांग की है।
