शिक्षा प्रणाली में रामत्व का समावेश समय की आवश्यकता है – डॉ. अम्बर व्यास

** छुरा@@@@@, 25 अप्रैल 2025: भारतीय शिक्षण मंडल, छत्तीसगढ़ प्रांत के 56वें स्थापना दिवस के अवसर पर ‘ *शिक्षा में रामत्व* ’ विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया। आईएसबीएम यूनिवर्सिटी एवं भारतीय शिक्षण मंडल, छत्तीसगढ़ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय शिक्षण मंडल, छत्तीसगढ़ के प्रान्त मंत्री *डॉ अम्बर व्यास* ने महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आनंद महलवार ने किया तथा विषय की प्रस्तवना विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ बीपी भोल ने प्रस्तुत किया।मुख्य वक्ता *डॉ. अम्बर व्यास* ने ‘शिक्षा में रामत्व’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था दोषपूर्ण हो गई है। प्राचीन काल में जब गुरुकुल पद्धति से शिक्षा दी जाती थी तो भारत साहित्य, संगीत, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद और खगोल के क्षेत्र में बहुत आगे था। जब दूरबीन नहीं थी तो भी हमारे ऋषि मुनि खगोल विज्ञान के विभिन्न चीजों की सटीक जानकारी रखते थे और इससे शिक्षा का भो विकास होता था और व्यक्तित्व का भी। अंग्रेजों ने अपनी शिक्षा पद्धति थोप कर हमारे विचारों को रोक दिया और हमें एक ऑफिस में काम करने वाले क्लर्क के रूप में बना दिया। उन्होंने कहा कि राम के तत्वों अर्थात राम के गुणों को शिक्षा में स्थापित करने की आवश्यकता है। राम के पास बहुत से गुण थे और सबसे बड़ा गुण मर्यादा का पालन और त्याग की भावना का है। भगवान राम ने अपने जीवन में हमेशा मर्यादा का पालन किया। शिक्षा में रामत्व का अर्थ है छात्रों में अनुशासन और नियमों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना। यह उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करेगा। आज हमें शोध में स्थानीय विषयों पर ज़ोर देने की आवश्यता है।भारतीय शिक्षण मंडल जैसे कई संगठन उस प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को अपनाने के लिए समाज को जागृत करने का प्रयास कर रहे हैं। भारतीय शिक्षण मंडल की स्थापना 1969 में रामनवमी के दिन शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुनरुत्थान के उद्देश्य से की गई थी। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए आईएसबीएम विश्वविद्यालय के कुलपति *डॉ आनंद महलवार* ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परम्परा को साथ लेकर चलने की बात कही गई है। जैसे पुराने समय में ऋषि मुनि अपने शिष्यों से पहचाने जाते थे उसी तरह आज के समय में शिष्यों के प्रति शिक्षक को समर्पित रहने की आवश्यकता है। स्वागत वक्तव्य देते हुए आईएसबीएम विश्वविद्यालय के कुलसचिव *डॉ बीपी भोल* ने कहा कि पहले दर्शन एक अलग विषय होता था लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में हर विषय का अपना दर्शन है। यही रामत्व है कि राम का गुण प्रत्येक क्षेत्र में हमें अपनाना होगा श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम राम इसलिए हैं क्योंकि वे एक अच्छे राजा हैं, अच्छे पुत्र हैं, अच्छे पति हैं और अच्छे शिष्य हैं।कार्यक्रम का संचालन डॉ *पूनम वर्मा* ने किया। सरस्वती वंदना सुश्री रागिनी सोनी ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विज्ञान संकाय के डीन डॉ पी. विश्वनाथन, के साथ अलग अलग संकायों के प्रमुख एवं विभिन्न विभागों प्राध्यापक कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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