खबर हेमंत तिवारी
पांडुका /इस वर्ष चैत्र नवरात्र 30 मार्च रविवार से प्रारंभ हो रहा है। ऐसे में देवी भक्तों की भीड़ देवी मंदिरों में दर्शन को उमड़ती है। पर साल में एक बार खुलने वाला छत्तीसगढ़ का माता निरई का दिव्य दरबार धमतरी जिले के अंतिम छोर में गरियाबंद जिला से लगा हुआ है।और चैत्र नवरात्र के प्रथम रविवार के दिन देवी जातरा के रूप में मनाया जाता है।

जिसमें आसपास जिले सहित अन्य राज्य के लोग भी मनोकामना पूर्ण होने पर मां के चढ़ावा लेकर पहुंचते हैं जानकार बताते हैं कि पहाड़ों के बीच में विराजमान माता निरई के दरबार की ख्याति बहुत दूर-दूर तक है। खासकर मनोकामना की पूर्ण होने पर विश्वास के साथ यहां हर साल लाखों की संख्या में भीड़ लगती है इस बार रविवार को प्रथम दिन नवरात्र पड़ा है इसलिए 30 मार्च को भारी भीड़ रहेगी जिसको लेकर मां निराई सेवा समिति एवं ग्राम पंचायत सहित पुलिस प्रशासन ने भी तैयारी की है। बता दे की आदिकाल से माता निरई के भक्त देवी जातरा के रूप में पूजा करते आ रहे हैं।इस बार भी रात से ही पैदल यात्रा करते हुए आसपास के लोग सुबह दर्शन को पहुंचेंगे । साथ ही अपने-अपने सुविधा अनुसार बहुत दूर-दूर से लोग भी दर्शन को आयेंगे बताते हैं कि माता निरई की इस दरबार में पूरे चैत्र माह में बिना तेल बिना बाती एक दिव्य ज्योति पहाड़ों के बीच घूमते रहते हैं किस्मत वाले को ही वह नजर आता है साथ ही आज भी मां निराई अपने गुफा में साक्षात विराजमान है और केवल चैत्र नवरात्र के पहले दिन आम भक्तों की दर्शन के लिए पूरे दिन मां का दरबार खुला रहता है। बाकी दिन यहां कोई नहीं जाता।और पूर्ण तरीका से यहां जाना वर्जित रहता है माता के भक्त बताते हैं कि पहले माता के द्वार बहुत बड़ा था पर कलयुग के प्रभाव से धीरे-धीरे माता का द्वार छोटा होते जा रहे हैं ।

पहले मां निरई भक्तों से जो भी चढ़ावा होते थे उसे अपने हाथों से स्वीकार करते थे पर अब बदलते समय में अब ऐसा देखने को नहीं मिलता। इस बार चुनावी वर्ष होने वजह से मन्नत मांगने वालों की बहुत भीड़ देखने को मिलेगी क्यों कि मन्नत मांगने वाले अधिकतर लोग चुनाव जीत कर आए हैं और माता का जो भी चढ़ना है उसे लेकर पहुंचेंगे इस वजह से इस वर्ष माता के दर्शन को भारी भीड़ रहेगी। साथ ही जानकार बताते हैं। माता निरई के महिमा की बहुत सारे किस्से कहानियां है। जानकार बताते है कि माता निरई 21 बहनों में सबसे बड़ी बहन है और अन्य बहनों की तुलना में सर्वाधिक शक्तिशाली है। और पूजा पाठ भी अलग ही विधि विधान से होता है यहां लाल गुलाल, बंदन,अगरबत्ती आदि वर्जित है। केवल नारियल लेकर भक्त पहुंचते है। इस वजह से समिति द्वारा माता के दर्शन को जब माता के पुजारी के साथ लोग जब पीछे-पीछे दौड़ते हैं पहाड़ों में तो लाल कपड़ा पहन कर न जाने की सख्त हिदायत दी जाती है।तथा इस दरबार में महिलाएं दर्शन करने नहीं जाती न ही यहां का प्रसाद महिलाएं खाती है।साथ ही यहां माता शराब सेवन कर पहुंचने वाले को पसंद नहीं करते इस वजह से सब भक्त यह बात अच्छी तरह जानते हैं। और दर्शन के पहले ऐसा कुछ नहीं करते और अपनी मनोकामना और मन्नतें मांगने आते हैं।
