भिलाई,,,शासकीय नवीन महाविद्यालय रिसाली में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्राचार्य डॉ अनुपमा अस्थाना के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में डॉ. कृष्णा देवनानी (स्त्री रोग विशेषज्ञ)की उपस्थिति रही
। कार्यक्रम का प्रारंभ माता सरस्वती के तैल्य चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप्रज्वलन कर किया गया। प्राचार्य डॉ. अनुपमा अस्थाना ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए स्त्री को समर्पित एक सुंदर कविता पाठ से अपने व्याख्यान की शुरुआत की । उन्होंने अपने व्याख्यान में स्त्री के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए भारत और छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्त्रियों एवं उनके उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की । उन्होंने कहा कि हमें अपने अधिकारों के लिए सचेत और जागरूक होना पड़ेगा । स्त्रियां बहुत अधिक की चाह नहीं करती है उनके लिए उनका परिवार ही एक मुकम्मल संसार होता है।
इसके पश्चात मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण देवनानी जी ने छात्र – छात्राओं को संबोधित किया ।उन्होंने कहा कि महिला दिवस एक दिन की बात नहीं है, अपितु हर दिन हमारा है। गृहणियां सच्ची योद्धाएं हैं। उन्होंने महिला दिवस को जुझारू गृहणियों को समर्पित किया, जिनका योगदान हमारे जीवन में अमूल्य है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस दिन को हमें आत्मसात करना है, एक संकल्प लेना है, और उद्देश्य का निर्धारण करना है। अपने स्व निर्माण के लिए निरंतर प्रयत्न करना है।
इसके पश्चात डॉ. नागरत्ना गनवीर ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनना होगा उन्हें अपने सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाना पड़ेगा। उन्होंने महिलाओं के लिए चलायी जा रही योजनाओं और संवैधानिक अनुच्छेदों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।
डॉ. रितु श्रीवास्तव ने अपने व्याख्यान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास पर सरल शब्दों में एवं अति संक्षेप में प्रकाश डाला और साथ ही भारत की कुछ प्रमुख महिलाओं के योगदान से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया।
डॉ. पूजा पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज के दौर में पुरुष और स्त्री दोनों ही काम से लौटते हैं परंतु पुरुष लौटता है सोफे के गद्दो पर, मोबाइल में परंतु स्त्रियां लौटती हैं पूरे घर में, वह किचन में लौटती है, वह लौटती है घर के फैले सामानों में। वे काम से लौट कर पुनः काम पर लौटती हैं। उन्होंने हिंदी की प्रसिद्ध आदिवासी लेखिका निर्मला पुतुल की कविता ‘‘ उतनी दूर मत ब्याहना बाबा !‘‘ का पाठ किया। प्रो. लिनेंद्र कुमार वर्मा ने स्त्री को समर्पित एक सुंदर कविता का पाठ किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती विनीता सहायक प्राध्यापक भूगोल के द्वारा किया गया और आभार प्रदर्शन डॉ. पूजा पाण्डेय के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की समस्त अधिकारी, कर्मचारीगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।
