शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजिम में 13 से 21 फरवरी 2025 तक पीएम ऊषा के तहत फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन

राजिम शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजिम में 13 से 21 फरवरी 2025 तक पीएम ऊषा के तहत फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। आज 13 फरवरी को कार्यक्रम का शुभारंभ माॅ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन से हुआ

। प्रथम दिवस की प्रथम सत्र उद्घाटन सत्र कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सादर आमंत्रित डॉ विनय कुमार पाठक, कुलपति ,थावे विश्वविद्यालय भोपालगंज ,बिहार, विशेष अतिथि मदन मोहन अग्रवाल अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद बिलासपुर, विशेष अतिथि विष्णु कुमार तिवारी सेवानिवृत्ति क्रीड़ा अधिकारी सरस्वती सम्मान 2024 प्राप्तकर्ता विकलांग विमर्श समिति बिलासपुर थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था प्रमुख प्राचार्य डॉ सविता मिश्रा ने की। संस्था के प्राचार्य के द्वारा महाविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया जिसमें महाविद्यालय की उपलब्धियों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया। आपने बताया कि महाविद्यालय के छात्र छात्राएं बहुमुखी प्रतिभा के धनी है जिसमें महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पंडित रवि शंकर विश्वविद्यालय के अंतर्गत होने वाली परीक्षाओं में प्रविण्य सूची में स्थान बनाया है। इसके साथ ही एनसीसी के छात्र-छात्राओं का अग्नि वीर में चयन हुआ है। विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धा में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उपलब्धियां अर्जित की है। इसके साथ ही उद्बोधन की कड़ी में विशेष अतिथि मदन मोहन अग्रवाल ने विकलांगों को सकलांग बनाने तथा सामान्य जीवन यापन करने में उनकी मदद हो इस विषय पर अपने संस्था द्वारा किस प्रकार के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं उनके बारे में संक्षेप में जानकारी प्रदाय किया गया। आपने बताया कि विकलांगों को सहानुभूति की नहीं वरण सम्मान व समानता की आवश्यकता है जिससे उनके सर्वांगीण विकास एवं आत्मबल में वृद्धि हो सके।

विष्णु तिवारी विशेष अतिथि सरस्वती सम्मान 2024 प्राप्तकर्ता ने पीएम उषा कार्यक्रम की तारीफ करते हुए कहा कि जो परंपरागत ज्ञान को नवीन तकनीकी के माध्यम से प्रस्तुत कर जनमानस को लाभान्वित किया जा सकता है।

मुख्य अतिथि डॉ विनय कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में ने कहा कि शिक्षा का प्रारंभ मातृभाषा में ही होना चाहिए जिससे व्यक्ति के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास में अमूल रूप से परिवर्तन हो सके। उन्होंने कहा कि संस्कृत दुनिया की प्रथम वैज्ञानिक भाषा है जिससे ज्ञान का विकास हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा की अंग्रेजी में गाय को काऊ कहते हैं जबकि छत्तीसगढ़ी में गाय को गउ कहा जाता है उन्हीं के अपभ्रंश से ही काउ शब्द की उत्पत्ति हुई है तथा कंप्यूटर में उपयोग होने वाली यंत्र जिसे माउस कहा जाता है उनको संस्कृत में मूषक कहा जाता है तथा मूषक शब्द से ही छत्तीसगढ़ी में मूसवा शब्द की उत्पत्ति हुई तथापि अंग्रेजी शब्द माउस का प्रादुर्भाव हुआ। उन्होंने कहा कि सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत है संस्कृत से ही अन्य भाषाओं का विकास हुआ है जिसकी वैज्ञानिकता आज पूरी विश्व पटल पर अंकित है। हम दुनिया से पीछे ना हो इसलिए हमें अंग्रेजी भाषा भी जानना बहुत जरूरी है। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सीखने की प्रक्रिया में भाषा का अवरोध नहीं है हम किसी भी भाषा में ज्ञान की बारीकियां सीख सकते हैं तथा उन्हें व्यवहार अनुगत कर भावी पीढ़ी को सशक्त बना सकते हैं।

द्वितीय सत्र में व्याख्यान हेतु आमंत्रित उमेश कुमार वर्मा व्याख्याता पॉलिटेक्निक महाविद्यालय महासमुंद आपने आईसीटी के प्रकार डिजिटल उपकरण और इसका व्यावहारिक प्रदर्शन के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान किया। जिससे सभी प्राध्यापक लाभान्वित हुए।

इस कार्यक्रम के संयोजक सुश्री मनीषा भोई सहायक प्राध्यापक अंग्रेजी एवं कार्यक्रम का संचालन डॉ समीक्षा चंद्राकर सहायक प्राध्यापक राजनीति विज्ञान द्वारा किया गया।

ज्ञात हो कि पीएम ऊषा के तहत फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम इनफॉरमेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी विषय पर आयोजित कार्यक्रम हो रहा है। पीएम ऊषा के तहत राष्ट्रीय स्तर पर 13 महाविद्यालय का चयन किया गया था उसमें शासकीय राजीव लोचन महाविद्यालय राजिम को भी स्थान प्राप्त हुआ है जिसके तत्वाधान में फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य के लगभग 130 प्राध्यापक ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से जुड़े हुए हैं। प्रथम सत्र उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय के समस्त सहायक अध्यापक, अतिथि व्याख्याता, जन भागीदारी शिक्षक तथा छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति सुनिश्चित की।

उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में वरिष्ठ प्राध्यापक मोहनलाल वर्मा, घनश्याम यदु, चित्रा खोटे, क्षमा शिल्पा मसीह, श्वेता खरे, आकाश वाघमारे, डॉ राजेश कुमार बघेल, डॉ भानुप्रताप नायक, तामेश्वर मारकंडे, योगेश कुमार तारक, डाहरू सोनकर, डॉक्टर अश्वनी कुमार साहू विद्या ज्योति सहाय, गरिमा साहू, मनीष साहू का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन डॉ ग्रीष्मा सिंह ने किया।

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