107 बच्चो के पढ़ाई के लिए दो छोटे कमरे, एक बरामदा सालो से निजी स्कूल में सरकारी नियमो का पालन नहीं।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

खबर हेमंत तिवारी

पाण्डुका(छुरा)/ यह सरकारी नही जनाब निजी स्कूल है। जहा शिक्षा विभाग के सारे नियमों को ठेंगा दिखाते हुए सालो से यह स्कूल संचालित हो रहा है।अधिकतर देखा जाता है। कि सरकारी स्कूलों में इस तरह की अव्यवस्था पाई जाती है। और निजी स्कूल बच्चे और पलको को लुभाने के लिए नित् नए प्रयास करते हैं जिससे उसकी स्कूल में बच्चे अधिक से अधिक एडमिशन ले सके ताकि संचालक को अधिक से अधिक आमदनी हो पर यहाँ ठीक इसके विपरित गरियाबंद जिले में एक ऐसा निजी स्कूल देखने को मिला है। जो नेशनल हाईवे 130 जिले के मुख्य मार्ग पर ग्राम पंचायत पांडुका के चरोधाम में स्थित। ओम शांति निकेतन नाम का यह निजी स्कूल 2006 से संचालित हो रहा है। जहा कक्षा 6 वी से लेकर 10 तक संचालित हाई स्कूल में शिक्षा विभाग के नियमों का जरा भी पालन नहीं हो रहा है ।पहले यह एक आदिवासी समाज के भवन में संचालित हो रहा था अब यह स्कूल इस सत्र में फिर एक दूसरे आदिवासी समाज के भवन में संचालित हो रहा है जहां 107 बच्चे अध्यनरत है और उनके लिए दो कमरे और एक बरामदा है । जहा पढ़ाई करते है ऐसे में 107 बच्चों को दो शिफ्ट में जिसमे पहला 8 बजे से 11 बजकर 15 मिनट और दूसरा शिफ्ट 11.30 बजे से लेकर 4 बजे तक पढ़ाई कर रहे हैं। पर नियमों की बात की जाए तो विभाग के नियम का यहां कोई पालन नहीं हो रहा है। दो शिफ्ट में लगने वाले इस स्कूल में अध्यनरत छात्र-छात्राए आसपास के गांव से आते है ।पर निजी स्कूल संचालन के नियम में जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वे कोई सुविधा नहीं मिल रही है ।

और इस बारे में पूछने पर संचालक गर्व से कहता है कि मुझे पढ़ाई में ध्यान देना है नियम का पालन कौन करता है। हालांकि इस बात को लेकर यह अंदेशा लगाया जा सकता है कि सालों से संचालित इस स्कूल में आखिर नियम का पालन क्यों नहीं किया जा रहा क्या विभागीय सेटिंग होने से संचालक के ऊपर कही विशेष महेरबानी तो नही। इस स्कूल में 107 बच्चों को पढ़ने के लिए 6 शिक्षक भी मौजूद है इस प्रकार ना तो बच्चों को खेलने के लिए मैदान है ना तो प्रार्थना करने के लिए जगह, ना ही वाटर फिल्टर ना ही, प्रयोग शाला इस प्रकार निजी हाई स्कूल में होने वाले विभिन्न प्रकार के सरकारी नियमों को पूरा दरकिनार कर यह स्कूल सालों से संचालित हो रहा है ,

वही इस बारे में संचालक कहते हैं कि वह 5 ,500 हजार रुपया भवन का किराया देते हैं 6000 रुपए पढ़ाने वाले टीचरों को देते हैं ,और प्रति बच्चे साल का ₹6000 फीस लेता हूं मेरा उद्देश्य बच्चों का पढ़ाई करना है अगर मैं नियमों का पालन करूंगा तो यहां स्कूल संचालक नहीं कर पाऊंगा और हैरानी की बात है कि शिक्षा विभाग में बने ढेर सारे नियम आखिर किसके लिए है। अगर नियम का पालन नहीं करता है तो फिर ऐसे स्कूलों का संचालन बंद करवा देना चाहिए क्योंकि नियम तो बनाए जाते हैं सुविधाओं के लिए ताकि बच्चों को सारी जरूरी सुविधाएं मिल सके और अगर संचालक कोई नियम का पालन नहीं करता तो आज तक इतने सालों से कैसे स्कूल संचालक हो रहा है आज तक के शिक्षा विभाग के किसी अधिकारी या जिले के किसी बड़े अधिकारी की नजर क्यों नहीं पड़ी और अपने नियम मनवाने में आखिर क्यों शिक्षा विभाग डर रहा है कहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के साथ तगड़ा सेटिंग।तो नहीं जिस वजह से यह नियमों की परवाह न करते हुए स्कूल का संचालन कर रहा है ।।।।।

वही इस बारे में ओम शांति निकेतन स्कूल पाण्डुका के संचालक दुलेंद्र साहू अभनपुर से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि मेरा उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई करना है। और मुझे बच्चो और पलको पर पूरा भरोसा है ।नियम का पालन करूंगा तो मैं स्कूल का संचालन कैसे कर पाऊंगा ऐसे भी कौन पूरा नियम का पालन करता है। 25 जुलाई तक मैं अपने पुराने भवन में स्कूल को शिफ्ट कर दूंगा।तब तक के लिए यहां पढ़ाई कर वा रहे है।

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