भारत देश में राम राज्य स्थापित रहे इसलिए त्रेता युग में भगवान ने पूरे भारत वर्ष में अपने चरण रखे थे,,,, गोपेश्वरी देवी,

जिला पंचायत सदस्य श्रीमती हर्षा चंद्राकर ,भाजपा मंडल अध्यक्ष लोकमणि चंद्राकर ने किया कथा श्रवण,,

रानीतराई,, श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवा दिवस दिन कथा वाचिक गोपेश्वरी देवी ने राम वन जाने की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ गुरू वशिष्ठ के परामर्श से प्रभु राम के तिलक की तैयारी में जुटे थे। वहां की जनता खुशी में पटाखे फोड़ कर दिए जला रही थी। इधर मंथरा ने सबसे छोटी रानी कैकेयी के मन में विद्वेष की भावना पैदा कर दिया। कैकेयी ने राजा दशरथ से उस समय राजा दशरथ ने दो वरदान देवासुर संग्राम हुआ था जब राजा दशरथ देवो की तरफ से युद्ध लड़ रहे थे ये संग्राम देवो और असुर शंबासुर के बीच हो रहा था।इस युद्ध में राजा दशरथ की सारथी केकई बनी थी

।तब युद्ध में राजा दशरथ शस्त्र लगने की वजह से घायल हो थे ,तब उनके प्राणों की रक्षा केकई ने की थी तो उसी दो वरदान के बदले राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत को अयोध्या का राजा बनाने की मांग रख दी। राजा दशरथ को कैकेयी की इच्छा जानकर काफी दुख हुआ। जब इसका पता प्रभु श्री राम को हुआ तो वह माता पिता के आदेश को मानकर वनवास जाने लगे तो लक्ष्मण जी भी वनवास जाने की जिद करने लगे। अंत में प्रभु श्रीराम मां सुमित्रा के आदेश पर साथ ले जाने के लिए तैयार हुए। साथ में सीता मां भी वनगमन की। भगवान के वन गमन की कथा सुनकर श्रोता भावुक हो गए। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य हर्षा चंद्राकर,भाजपा मंडल अध्यक्ष लोकामनी चंद्राकर, सरपंच निर्मल जैन,धनराज साहु,ओमप्रकाश वर्मा,भेद प्रकाश वर्मा,पूर्व जनपद सदस्य अशोक शर्मा उपस्थित रहे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *