दादी को कुष्ठ रोग से पीड़ित देख 36 वर्षों से कुष्ठ रोगियों की कर रहे है सेवा

पाटन। 70-80 के दशक में कुष्ठ रोग के प्रति समाज में गलत धारणा जैसे, भ्रम, भय, अलगाव, घृणा जैसी धारणा व्याप्त थी। कुष्ठ रोग के संबंध में काफी सामाजिक कलंक जुड़ा हुआ था, नतीजतन कुष्ठ रोग वाले लोगों और उनके परिवार के सदस्यों को अक्सर मनावैज्ञानिक और सामाजिक समस्याएँ होती थी।
आपको एक ऐसे व्यक्ति प्रदेश साहू संघ के सलाहकार रमेश साहू ग्राम जुनवानी जिला दुर्ग से परिचित करवा रहे है जो अपने दादी जो कुष्ठ रोग से पीड़ित थी । जिसके कारण लोग घर में आने-जाने से हिचकिचाते थे। अंततः परेशान होकर अनमने मन से दादी को रायपुर के कुष्ठ आश्रम में छोड़ना पड़ा इस दर्द को देखकर उसके मन में कुष्ठ पीड़ितों की सेवा करने की भावना ने जन्म लिया। तब से इस जनसेवा के कार्य पर विगत 36 वर्षों से निरंतर लगा हुआ है। पहुँचविहीन ग्रामों में जाकर कुष्ठ के प्रति समाज में जागरूकता लाना, नये कुष्ठ रोगियों की खोज करना, उनका उपचार करवाना एवं उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाकर उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

(1) वृहद जाँच, खोज एवं कुष्ठ उन्मूलन शिविर 1987

ग्राम जुनवानी में 7 दिवसीय वृहद जाँच, खोज एवं कुष्ठ उन्मूलन शिविर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गाँव-गाँव घूमकर नये कुष्ठ रोगियों की पहचान किया गया एवं उन्हें शिविर में लाकर उनका सेवा एवं उपचार किया गया तथा कुष्ट रोग के प्रति समाज में व्याप्त भय, भ्रम एवं घृणा की अवधारणा को दूर कर कुष्ठ रोगियों को समाज की मुख्य धारा में जोड़ने का कार्य किया गया।

(2) विशाल कुष्ठ पीड़ित सेवा एवं जनजागरण शिविर, 1988

ग्राम जुनवानी में ही 10 दिवसीय विशाल कुष्ठ पीड़ित सेवा एवं जनजागरण शिविर लगाया गया, जिसमें करीब 125 कुष्ठ पीड़ितों की शिविर लगाकर सेवा एवं उपचार किया गया तथा कुष्ठ के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाया गया।

(3) विशाल जनजागरण पदयात्रा 1989

कुष्ठ रोग के प्रति समाज में व्याप्त भ्रम, भय, अलगाव एवं घृणा को दूर करने के उद्देश्य से 10 दिवसीय विशाल जनजागरूकता पदयात्रा का आयोजन किया गया, जो ग्राम जुनवानी से प्रारंभ होकर, करहीडीह, बेलौदी, भेड़सर, ढाबा, नवागाँव, पथरिया, नंदकट्ठी, बोड़ेगाँव, अरसनारा, करंजा भिलाई, समोदा, भटगाँव, सिरसा जेवरा, खपरी, कुटेलाभाठा, खम्हरिया होते हुए वापस जुनवानी में आकर समाप्त हआ। इस जनजागरण यात्रा में सैकड़ों लोग सम्मिलित हुए।
) तहसील स्तरीय विशाल साइकिल रैली 1990

कुष्ठ रोग उन्मूलन एवं जनजागरण के लिए पाटन विकासखंड के अनेक गाँवों में 7 दिवसीय विशाल साइकिल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 100 साइकिल यात्री सम्मिलित रहे। साइकिल रैली के दरम्यान अनेक गाँवों में कुष्ठ रोग जाँच खोजबीन भी किया गया, जिसमें अनेक नए कुष्ठ पीडित मिले।

(5) विशाल जल, तेल उपचार शिविर 1991

दुर्ग विकासखंड के ग्राम पंचायत समोदा में 15 दिवसीय विशाल जल, तेल उपचार शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 200 कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्तियों का आवासीय जल, तेल उपचार किया गया। कुष्ठ पीड़ित व्यक्तियों के लिए प्रतिदिन रात्रिकालीन शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। जन जागरूकता पखवाड़ा के तहत कुष्ठ रोग से बचाव एवं उपचार संबंधी जानकारी दिया गया।

(6) विशाल कुष्ठ एवं लोकरंग कार्यक्रम 1992

विशाल कुष्ठ एवं लोकरंग कार्यक्रम के तहत ग्राम जुनवानी में अनेकों पंथी दल, राऊत नाचा, सुआ नृत्य, करमा नृत्य एवं डंडा नृत्य के माध्यम से विशाल जनजागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें अनेकों कलापथक दल सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के माध्यम से कुष्ठ रोग उन्मूलन के प्रति जबरदस्त माहौल तैयार किया गया।

(7) जिला स्तरीय विशाल साइकिल रैली 1993

कुष्ठ रोग के प्रति समाज में व्याप्त अंधविश्वास, भ्रम, भय, घृणा, अलगाव को दूर करने एवं समाज में जनजागृति लाने के लिए दुर्ग से 1993 में 15 दिवसीय विशाल साइकिल रैली का आयोजन किया गया, जो दुर्ग से प्रारंभ होकर अण्डा, गुण्डरदेही, अर्जुन्दा, सिब्दी, नाहंदा, डौण्डीलोहारा, सहगाँव, कुसुमकसा, दल्लीराजहरा, डौण्डी, घोठिया, बालोद, बरही सांकरा, गुरूर, भोथली, जामगाँव आर, रानीतराई, पाटन, झीट, कुम्हारी, गोढ़ी, माटरा, धमधा, मेड़ेसरा, ननकट्ठी, सिरसा जेवरा होते हुए वापस मानस भवन, दुर्ग में विशाल आमसभा के साथ सम्पन्न हुआ। इस रैली की विशेषता यह रही कि दुर्ग जिले के अंतिम छोर नवागढ़ से भी एक जनजागरूकता साइकिल रैली का आयोजन किया गया था, जो नवागढ़ से प्रारंभ होकर बेमेतरा, देवरबीजा, देवकर, साजा होते हुए धमधा में मुख्य साइकिल रैली में सम्मिलित हो गई थी। इस रैली में लगभग 200 साइकिल यात्री के साथ-साथ राऊत नाचा पार्टी पंथी नृत्य पार्टी एवं कलापथक दल गाँव-गाँव में लोककला के माध्यम से कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए विविध कार्यक्रमों का प्रस्तुतिकरण करते रहे।
(8) शहरी क्षेत्रों में विशेष जनजागरूकता अभियान

विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भिलाई, दुर्ग के क्षेत्र में लगातार जाँच-खोज अभियान चलाकर नये कुष्ठ रोगियों का पहचान किया गया तथा उसका उपचार शुरू किया गया। कुष्ठ रोग के लिए जगह-जगह विशाल जनजागरण अभियान चलाया गया। अनेक स्थानों पर कुष्ठ रोगियों को समाज की मुख्य धारा में जोड़ा गया।

(9) कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन :

कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर किया जाता रहा है, जिसके तहत् बैठक, संगोष्ठी, पदयात्रा, साइकिल रैली, लोककला दल के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रमों, स्कूलों में जनजागरूकता अभियान इत्यादि कार्यक्रम निरंतर होते रहा है और आज तक यह सेवा का क्रम जारी है।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में तत्कालीन जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. एस.एल. गुप्ता, डॉ.जे.पी. मेश्राम, डॉ.बी.पी. मुखर्जी, डॉ.ए.डी. उरगाँवकर, डॉ.बी.एल. देवांगन, डॉ.पी. आर. मंगलानी, डॉ.एस.एल.गुडे, एन.एम.एस. ए.आर.खान, एल.एल.साहू, एस.डी. बंजारे, एच. के. वर्मा, ए.के. वर्मा सहित जिला अस्पताल के कुष्ठ विभाग के सभी कर्मचारी विशेष रूप से साथ देते रहे हैं। वहीं समाजसेवी दाऊ लक्ष्मण साहू, शिक्षक बिसौहा राम साहू, भूखन लाल साहू, मदन शर्मा, नैनदास बारले, गरीबा यादव, भरत लाल साहू, रवि ताम्रकार, हितेन्द्र ताम्रकार, उचित देवांगन, प्रेमलाल नायक, रज्जाक खान, टुन्नालाल देशमुख, गणेशिया बाई देशमुख, गिरजा तिवारी, सुरेन्द्र गौतम, मनोज पाण्डेय, डोमन चन्द्राकर, दुर्गा प्रसाद पारकर, भगवानी पारकर, घनश्याम मढ़रिया, अगेन्द्र गौतम, रामाधीन वर्मा, डॉ. फूलसिंह यादव, डोमन साहू सहित अनेकों क्षेत्र के लोगों का सहयोग मिलता रहा है।

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