आचार संहिता लागू होने के पूर्व हड़ताल कर्मी अंतिम खंदक की लड़ाई लड़ रहे हैं-पुतला दहन कर आक्रोश व्यक्त किए-आप पार्टी का समर्थन मिला

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव 2023 के किसी भी समय भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन की घोषणा किए जाने पर राज्य में उसी तिथि से आदर्श आचार संहिता प्रभावशील हो जाएगा। ऐसी स्थिति में विगत 20 वर्षों से पीड़ित शोषित धोखा खाए संजीवनी महतारी कल्याण संघ,डीएड-बीएड कल्याण संघ एवं पंचायत शिक्षक अनुकंपा नियुक्ति कल्याण संघ रायपुर धरना स्थल तूता में अपने जीवन की अंतिम खंदक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी कड़ी में आज उप मुख्यमंत्री श्री टी एस सिंहदेव का पुतला दहन किया गया। जिसे पुलिस वालों ने अग्निशमन से बुझाने छीना झपटी कर बुझा दिया। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विजय कुमार झा, अनुसूचित जाति विंग के अध्यक्ष परमानंद जांगड़े द्वारा धरना स्थल में इन तीनों हड़ताली कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया। संजीवनी महतारी कल्याण संघ अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में जारी 20 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन के 17 वें दिन स्वास्थ मंत्री द्वारा किए गए वादाखिलाफी से आकोषित आंदोलनकारियों ने उनका पुतला दहन किया, जिसे पुलिस वालों ने बूझाकर जप्त कर लिया। इसी प्रकार डीएड-बीएड कल्याण संघ द्वारा हजारों शिक्षकों के पदों पर भर्ती के लिए आंदोलन विरोध प्रदर्शन किया गया। आंदोलन का नेतृत्व कामेश्वर यादव, प्रदेश अध्यक्ष ताम्रध्वज देशमुख प्रदेश सचिव के नेतृत्व में किया गया। शिक्षक पंचायत अनुकंपा नियुक्ति की महिलाएं भी मुख्यमंत्री के धोखेबाजी के खिलाफ अनुकंपा नियुक्ति के लिए धरना दिया है। संजीवनी महतारी के आंदोलनकारी द्वारा ठेका प्रथा समाप्त कर, स्वास्थ्य विभाग में संविलियन तथा करोना काल में किए गए संघर्ष के लिए उन्हें ठेका प्रथा समाप्त कर विभाग में संविलियन करने की मांग की जा रही है। जिसका वादा जन घोषणा पत्र समिति के संयोजक के रूप में स्वयं श्री टी एस सिंहदेव स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिया गया था। आंदोलनकारियों की नैतिक जीत है कि नए ठेकेदार द्वारा नई नियुक्ति में 30 हजार रुपए की मांग की जा रही थी। कुछ लोगों ने उक्त राशि जमा कर दी थी। जिसे वापस करने के लिए ठेकेदार मजबूर हुआ है। श्री झा ने सभी आंदोलनकारियों से अपील की की अब भाजपा और कांग्रेस का मोह त्याग कर, श्री अरविंद केजरीवाल की गारंटी पर विश्वास करें तथा उनके विश्वास पर अपना आंदोलन वापस लेवे।

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