रायपुर -छत्तीसगढ़ में पहले किसान न्याय योजना की चर्चा थी। अब 20 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से धान खरीदी कि कांग्रेस सरकार की योजना की चर्चा छत्तीसगढ़ में खूब हो रही है। जहां एक ओर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस धान खरीदी को लेकर सीधा किसानों को फायदा पहुंचाने की बात कर रही है तो वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी चावल खरीदी में केंद्र सरकार की अहम भूमिका पर पीठ थपथपा रही है।
जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ग्रामीण के अध्यक्ष उधो राम वर्मा एवं महामंत्री प्यारेलाल साहू ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि छग में कांग्रेस सरकार आने के पश्चात् भूपेश सरकार द्वारा की गई सफल धान खरीदी और इस बार की गयी 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी की घोषणा से बीजेपी बुरी तरह खौफजदा है। बीजेपी जानती है कि इस चुनावी वर्ष में 20 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से सफलतापूर्वक धान खरीदी हो गई, तो किसान विरोधी होने की पर्याय बन चुकी बीजेपी को इस चुनाव में 14 सीट बचाने में भी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए हर बार की तरह इस बार भी छत्तीसगढ़ बीजेपी केंद्र की भाजपा सरकार के साथ मिलकर धान खरीदी को बाधित करने का षड्यंत्र रच रही है।
इस षड्यंत्र की शुरुआत केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार से चावल खरीदी के कोटे को घटाकर किया है। भूपेश सरकार से भयभीत केंद्र सरकार और बीजेपी ने छत्तीसगढ़ से चावल खरीदी के कोटे को 86 लाख मिट्रिक टन से घटाकर 61 लाख मिट्रिक टन कर दिया है। इसके पश्चात् नया फरमान जारी करते हुए बायोमीट्रिक सिस्टम को अनिवार्य किया है। जिस पर रोक के लिये भूपेश सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा है।
श्री वर्मा एवं श्री साहू ने आगे कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि भूपेश सरकार धान खरीदी को लेकर अपने कदम पीछे हटा ले, मगर भूपेश सरकार किसान कल्याण के संकल्प को लेकर सरकार में आई है और कितनी भी विपरीत परिस्थिति केंद्र सरकार पैदा कर ले भूपेश सरकार अपना वादा पूरा करेगी।
छत्तीसगढ़ बीजेपी के नेता जब भी केंद्र सरकार के साथ मिलकर धान खरीदने में अड़चन डालने का प्रयास करते हैं, भूपेश सरकार किसान हित में हर बार कोई नया तरीका अपने वादे को पूरा करने के लिए निकाल लेती है। जब भूपेश सरकार द्वारा 2500 रु समर्थन मूल्य देने पर केंद्रीय पूल में चावल न लेने की बात केंद्र सरकार द्वारा कही गई तब भूपेश सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना लाकर अपना वादा निभाया।
जब केंद्र सरकार ने उसना चावल लेने से मना कर दिया तब भी भूपेश सरकार ने किसानों से 2500 रु में खरीदी कर बाजार में 1300-1400 में नीलाम कर घाटा सहा मगर किसानों को घाटा नहीं सहने दिया। भूपेश सरकार ने पिछली बार धान खरीदी के लिए 35000 करोड़ कर्ज लिया था और इस बार भी जरुरत पड़ी तो लेंगे। मगर किसानों के हित पर आंच आने नहीं देंगे।
