खबर हेमंत तिवारी
पांडुका(छुरा )/आदिवासी विकास खंड छूरा में ऐसे तो हैरतअंगेज घटनाओं की भरमार है.। जहां जनपद में बैठे जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी,बाबू और ग्राम पंचायत में बैठे सचिव सरपंच की मिलीभगत से कई ऐसे कारनामे होते ही रहते हैं। जिसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता की,, कब कहा क्या हो जाय। ऐसा ही एक मामला इन दिनों छुरा विकासखंड के एक ग्राम पंचायत में देखने को मिल रहा है । साढ़े तीन साल पहले मृत 88 वर्षीय एक आदिवासी बुजुर्ग जिसकी मृत्यु लगभग 24 जनवरी 2020 में हो गई थी ।जिसे जीते जी प्रधान मंत्री आवास योजना का लाभ नही मिला पर बेचारे गरीब को ग्राम पंचायत द्वारा मरने के बाद आवास दिया गया है सचिव साहब की महेर बानी ही है मरने बाद भी उनका नाम नही काटा जिस कारण उसे मरने के बाद इस योजना का

लाभ।अभी।मिल रहा है।बता दें कि मृतक। और उसकी पत्नी दोनों इस गांव में निवास करते थे और दोनों की मृत्यु हो चुकी हैं और उसके जो बाकी परिवार है वह दूसरे ग्राम पंचायत के एक आश्रित ग्राम में निवास करते हैं ।जबकि इनके राशन कार्ड की बात की जाए तो राशन कार्ड में मृतक और उसकी पत्नी का नाम है। और किसी उतराधिकारी व्यक्ति का नाम नहीं है ।पर अब जब आवास निकला तो जियो टैगिंग करने वाले कर्मचारी ने आवास को मृतक के बेटा के नाम पर जियो टैगिंग किया है और उसके नाम से आई डी भी जनरेट कर दिया है।और आवास का किश्त भी जारी हो रहा है तथा उसका आवास बन कर तैयार भी हो गए हैं । पर इस पंचायत में कई ऐसे जरूरतमंद लोग हैं जिनके पास रहने को घर नहीं है।और वे जिंदा लोग अपनी पारी आने का इंतजार कर रहे हैं तो किसके इशारे पर गरीबों को आवास का लाभ नहीं मिल रहा है।और रसूकदारो का आवास बन गया है।पर अपने कारनामों की वजह से सुर्खियों में रहने वाला इस ग्राम पंचायत का विवादों से गहरा नाता है वर्तमान सरपंच, सचिव और जनपद छुरा में बैठे आवास शाखा के कर्मचारी की मिलीभगत से मृतक का आवास उसके दूर के रिश्तेदार के घर बनाया जा रहा है ।जबकि ग्रामीणों की माने तो मृत व्यक्ति के नाम से कोई घर नही है उनके मरने के बाद उसके परिवार वालो ने उनका घर किसी दूसरे को बेच दिया था।अब मृतक के कोई रिश्तेदार का भी आवास स्वीकृत हुआ है और दोनों आवासों को मिलाकर संयुक्त रूप से एक आवास बनाया जा रहा है ऐसे में देखना होगा कि अब जनपद पंचायत छूरा में बैठे सीओ साहब और जनता के चुने हुए प्रतिनिधि क्या कार्रवाई करेंगे या फिर ले देकर ठंडे बस्ते में इस मामले को डाल दिया जाएगा क्योंकि ग्राम जनपद पंचायत छूरा के कई ग्राम पंचायतों में प्रधान मंत्री आवास में गड़बड़झाला की कई मामले सामने आ रहे हैं।कुछ लोग अपने पुराने घरों नया बताकर आवास बना रहे है ।साथ ही किसी दूसरे का आवास किसी दूसरे नाम पर बन रहा है । और आपसी सहमति से नियम विरुद्ध गंभीर कार्यों को अंजाम दे रहे हैं ।पर ऐसे मामलो।में अधिकतर कार्रवाई नहीं होती और मोटी रकम लेकर मामला को दबा दिया जाता है ।जिससे जरूरतमंद को अपने अधिकार से वंचित होना पड़ता है। साथ ही कुछ माह पूर्व गला फाड़ फाड़ कर मोर आवास मोर अधिकार कहने वाले नेता भी अब चुप बैठ गए हैं जो गांव गांव जाकर ऐसे कल्याणकारी योजनाओं का लाभ गरीबों को दिलाने की बात करते थे ।वे अखबारों और सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोरने उतरे थे ।अब उनका कोई अता पता नहीं मिल रहा है।इस तरह जनपद पंचायत सहित सरपंच, सचिव के माध्यम से एसे भ्रष्टाचार का खेला सालो से चल रहा है ।और जब इसकी जानकारी मांगी जाती है। तो गुमराह करने का कोशिश करते हुए नियम विरुद्ध गलत जानकारी देकर बचना चाहते हैं।।
