- गुण्डरदेही से भूपेंद्र चंद्राकर का नाम भी उभरकर सामने आया,उन्होंने कहा अवसर मिला तो जनता की सेवा करने को तैयार
बालोद (सतीश पारख)। कुछ महीने बाद प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसकी तैयारी में जहां दोनों प्रमुख दलों के नेताओं की सक्रियता बढ़ी है वहीं टिकटों के दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद टिकट के लिए दावेदार अपने समर्थकों के साथ पीसीसी के नवनियुक्त अध्यक्ष दीपक बैज के सामने भी सक्रिय हो गए है ।पहले जहां मोहन मरकाम अध्यक्ष थे वहीं अब बस्तर से सांसद दीपक बैज को अध्यक्ष बनाया गया है। इससे बड़े पैमाने पर टिकटें की आस में बैठे दावेदार टिकिट के लिए फिर से सक्रिय हो गए हैं ।जहां प्रदेश में कांग्रेस की सरकार हैं वहीं जिले की गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के कुंवरसिंह निषाद विधायक है।जो सरकार में संसदीय सचिव की ज़िम्मेदारी भी निभा रहे है। क्या वे अपनी दूसरी पारी खेलेंगे या किसी और को मौका मिलेगा यह एक प्रशन क्षेत्र के मतदाताओं के मन में बना हुवा है और यह समय के गर्भ में छिपा हुवा है। लेकिन पहले से ही इस क्षेत्र में चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ता आगे आने लगे हैं। इस क्रम में लंबे समय से राजनीति से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में कांग्रेस के सभी आयोजनों में बढ़ चढ़ कर सक्रिय रूप से भाग लेने वाले भूपेंद्र चंद्राकर भी शामिल हैं ।उनका कहना है कि उन्हें मौका मिला तो वे भी क्षेत्र की जनता की सेवा करना चाहते हैं। क्षेत्र में और भी बहुत से नेता टिकिट की दौड़ में शामिल है किंतु राजनीतिक परिवार में जन्मे और बचपन से राजनीति का क ख ग सीखने वाले भूपेंद्र चंद्राकर की सक्रिय भूमिका का लाभ उन्हे मिल सकता है । भूपेंद्र चंद्राकर ,क्षेत्र के लंबे समय तक नेतृत्व करने वाले सांसद स्व दाऊ चंदूलाल चंद्राकर जिला कांग्रेस के चाणक्य रहे स्व दाऊ वासुदेव चंद्राकर के करीबियों में सुमार दाऊ भागवत चंद्राकर के परिवार से हैं ।ग्राम अर्जुदा पंचायत के पंच के साथ साथ नगर पंचायत बनने पर पार्षद भी रह चुके है ।वर्तमान में अर्जुंदा ब्लॉक कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष है तथा होंस संभालने से आज तक पार्टी के निर्देशों का अक्षरशः पालन करते आ रहे है । खेरथा से चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी रही प्रतिमा चंद्राकर के चुनाव में उन्होंने अपनी भागीदारी दर्ज कराई है ।

वर्तमान में कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता की भूपेश बघेल दूसरी पारी खेलने की पूरी तैयारी में हैं और वो किसी भी तरह का रिस्क उठाने की फिराक में बिल्कुल भी नही है।ऐसे में बहुत से वर्तमान चेहरे भी बदले जाने की प्रबल संभावना को नकारा नहीं जा सकता ऐसी स्थिति में अनेक नए चेहरे टिकिट की दौड़ में शामिल है उनमें से ही एक चेहरा भूपेंद्र चंद्राकर है जो गुण्डरदेही से सेवा का अवसर चाहते हैं।
बदली हुई राजनीतिक फिज़ा में सर्व कुर्मी समाज को इस क्षेत्र से नकारा नहीं जा सकता।
प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के निर्वाचन क्षेत्र पाटन विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं से लगा गुंडरदेही सीट बालोद जिले की काफी महत्त्वपूर्ण सीट मानी जाती है। क्योंकि यहां की चुनावी गतिविधियों,समीकरणों का व राजनीतिक उतार चढ़ाव का असर राजनीतिक दृष्टिकोण से पाटन क्षेत्र पर भी पड़ता है। वही पाटन से मुख्यमंत्री बघेल के चुनावी मैदान में उतरने से इसका फायदा गुण्डरदेही सीट पर कांग्रेस प्रत्यासी को भी मिलता है। 2018 के चुनावों को देखे तो कुंवरसिंह निषाद को भी पाटन विधानसभा क्षेत्र से गुण्डरदेही विधानसभा के जुड़े होने का पूरा लाभ मिला है ।
छत्तीसगढ़ बनने के बाद गुण्डरदेही विधानसभा सीट पर दो बार भाजपा व दो बार कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत दर्ज किया है। 2023 के आने वाले विधानसभा चुनावों में दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा व कांग्रेस ने चुनाव पूर्व अपनी तैयारी प्रांरभ कर दिया है। जहां भाजपा इस सीट को वापस लाने पूरी ताकत लगा रही है। वही कांग्रेस भी अपनी पकड़ में आई इस सीट को अपने पाले में रखने कोई कसर नही छोड़ेगी ऐसा दिखाई दे रहा है। दोनो दलों के नेता वर्तमान में कार्यकर्ताओं को चार्ज करने का काम कर रहे लगातार बैठकों का दौर चल रहा है।
कांग्रेस के विधायक कुंवरसिंह निषाद के सामने दावेदारी में चुनौती देने वालो में पूर्व सांसद चंदूलाल चंद्राकर, प्रदेश की राजनीति के चाणक्य दाऊ वासुदेव चंद्राकर के करीबी रहे दाऊ भागवत चंद्राकर के परिवार के युवा चेहरे और क्षेत्र की कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहने वाले युवा चेहरे भूपेंद्र चंद्राकर के अलावा पूर्व विधायक स्व.प्यारेलाल बेलचंदन के नाती देवेंद्र बेलचंदन,जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुचित्रा साहू,जिला कांग्रेस के संयुक्त सचिव क्रांतिभूषण साहू,साहू समाज के नेता रामस्वरूप साहू,पूर्व ब्लाक अध्यक्ष संजय साहू,आकाश शर्मा प्रमुख रूप से शामिल हो सकते है।
वैसे इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता की दोनो ही दल सत्ता पाने एडी चोटी लगाने में अभी से जुट चुके है और भीतरी रिपोर्ट में कांग्रेस के लगभग 40 विधायकों का रिपोर्ट कार्ड भी निगेटिव आ रहा है जिसे देखते हुवे कांग्रेस नेतृत्व और भुपेश बघेल किसी तरह का रिस्क लेना नही चाहेंगे और इन सीटों पर प्रत्याशी बदलते हुए किसी नए चेहरे को मौका दिया जा सकता है ।
