गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र 61- चुनाव 2023…पुराने चेहरों पर दांव दोनो प्रमुख दलों पर पड़ सकता है भारी,नए चेहरों के आमने सामने होने की प्रबल संभावना?

सतीश पारख की रिपोर्ट…. बालोद जिले के तीन विधानसभा क्षेत्र में से एक गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 61 जो कांकेर लोकसभा क्षेत्र में शामिल है।वर्तमान में कांग्रेस के पास है। और कुंवरसिंह निषाद इस सीट से जीतकर विधायक व संसदीय सचिव की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार में निभा रहे है। इस सीट की राजनीतिक पृष्टभूमि को देखे तो इस सीट पर अधिकतर समय पिछड़ा वर्ग समाज के नेताओं का कब्जा रहा एक बार 2013 मे आदिवासी वर्ग से आने वाले राजा राजेन्द्र राय इस सीट पर जीतकर आये तब मिथक टूटा की यहां से सिर्फ ओबीसी वर्ग का ही नेता चुनकर आएगा ऐसा नही है।लेकिन बदली हुई राजनीतिक फिज़ा में सर्व कुर्मी समाज से टिकट मिलने को नकारा नहीं जा सकता है!

गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के डौंडीलोहारा ब्लाक के देवरी क्षेत्र व आसपास के ग्रामो में कांग्रेस को काफी मेहनत करना होगा वही भाजपा की स्थिति यहां 2018 चुनावो के बाद फिलहाल मजबूत दिखाई दे रहा है।

तांदुला नदी के किनारे बसा गुंडरदेही नगर व इस विधानसभा क्षेत्र से पूर्व में ऐसे कई बड़े नेताओं ने प्रतिनिधित्व किया है। जिनमे प्रमुख रूप से राजनीति के चाणक्य की उपाधि लिए हुए दाऊ स्व.वासुदेव चंद्राकर जो बड़े कांग्रेस नेताओं में शामिल रहे है।वही कई ने राजनीति में समाज की बड़ी भूमिका व ताकत का एहसास कराया जिनमे स्व. ताराचंद साहू पूर्व सांसद जो कि साहू समाज के सबसे बड़े नेताओं में जिनका नाम है। स्व.प्यारेलाल बेलचंदन जैसे नाम थे वही स्व.घनाराम साहू,दयाराम साहू,श्रीमती रमशिला साहू,श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर ,डॉ.बालमुकुंद देवांगन, राजेंद्र राय,वीरेंद्र साहू ने भी इस सीट से चुनाव जीतकर नेतृत्व किया है ।

2003 के नतीजे

बीजेपी के रमशिला साहू को -40813 वोट मिले थे।
कांग्रेस के घनाराम साहू को -31523 वोट मिले थे।

2008 के नतीजे

बीजेपी के वीरेंद्र कुमार साहू को – 64010 वोट मिले थे। कांग्रेस के घनाराम साहू को -61425 वोट मिले थे।

2013 के नतीजे

कांग्रेस के राजेंद्र कुमार राय को -72770 वोट मिले थे। बीजेपी के वीरेंद्र कुमार साहू को – 51490 वोट मिले थे।

2018 के नतीजे

कांग्रेस कुंवर सिंह निषाद -110,369
भाजपा दीपक साह्‌ – 54,975
राजेन्द्र राय जेसीसी (जोगी कांग्रेस) – 8,648

प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के निर्वाचन क्षेत्र पाटन विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं से लगा गुंडरदेही सीट बालोद जिले की काफी महत्त्वपूर्ण सीट मानी जाती है। क्योंकि यहां की चुनावी गतिविधियों,समीकरणों का व राजनीतिक उतार चढ़ाव का असर राजनीतिक दृष्टिकोण से पाटन क्षेत्र पर भी पड़ता है। वही पाटन से मुख्यमंत्री बघेल के चुनावी मैदान में उतरने से इसका फायदा गुण्डरदेही सीट पर कांग्रेस प्रत्यासी को भी मिलता है। 2018 के चुनावों को देखे तो कुंवरसिंह निषाद जो कि एक सांस्कृतिक कलामंच से जुड़े कलाकार थे,अर्जुन्दा के निषाद समाज के एक सामान्य परिवार से है। जिनका सरल सहज व्यक्तिव व स्वभाव है। कहा जाता है। की उस समय के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे भुपेश बघेल ने उनको इस सीट पर आगे किया व टिकट दी वही उनके सामने बड़े भाजपा नेता व छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के जनक रहे स्व.ताराचंद साहू के सुपुत्र दीपक साहू चुनावी मैदान में थे उस चुनाव में उस समय कुंवरसिंह निषाद एक नया नाम था व दूसरी तरफ बड़े राजनीतिक परिवार से दीपक ताराचंद साहू सामने थे लेकिन सभी अटकलों,राजनीतिक समीकरणों को पलटते हुए बड़ा चुनावी उलटफेर कर दिया कुंवरसिंह निषाद ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की व भाजपा को बड़े वोटों के अंतराल से हराकर प्रदेश की राजनीति में धमाकेदार प्रवेश किया है!

छत्तीसगढ़ बनने के बाद गुण्डरदेही विधानसभा सीट पर दो बार भाजपा व दो बार कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत दर्ज किया है। 2023 के आने वाले विधानसभा चुनावों में दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा व कांग्रेस ने चुनाव पूर्व अपनी तैयारी प्रांरभ कर दिया है। जहां भाजपा इस सीट को वापस लाने पूरी ताकत लगा रही है। वही कांग्रेस भी अपनी पकड़ में आई इस सीट को अपने पाले में रखने कोई कसर नही छोड़ेगी ऐसा दिखाई दे रहा है। दोनो दलों के नेता वर्तमान में कार्यकर्ताओं को चार्ज करने का काम कर रहे लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। लेकिन आने वाले चुनावों की बात करें तो अब गुंडरदेही सीट का चुनाव उतना आसान नही लग रहा जो 2018 में था। उस समय के चुनाव में निर्दलीय व अन्य पार्टी से चुनाव लड़ने वाले डॉ बालमुकुंद देवांगन,राजेंद्र राय जो कि पूर्व विधायक रहे है अब भाजपा में आ गए है। वही विधानसभा क्षेत्र के बड़े भू भाग देवरी क्षेत्र शामिल है।उस क्षेत्र के कद्दावर जिला पंचायत सदस्य अभिषेक शुक्ला जो पूर्व में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष व मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के काफी करीबी माने जाते रहे है भाजपा में शामिल हो गए है। व कुंवरसिंह निषाद को देवरी क्षेत्र में खुली चुनौती पेश कर रहे है।वहीं भाजपा से पूर्व विधायक वीरेन्द्र साहू,बालमुकुंद देवांगन,राजेंद्र राय,जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर टिकट की दौड़ में शामिल है। संगठन से जुड़े नेताओ में वरिष्ठ नेता नरेश यदु,संघ के करीबी पार्टी नेता चेमन देशमुख,सांसद प्रतिनिधि प्रमोद जैन,किशोरी साहू,महिला मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती शीतल नायक,पवन सोनबरसा जैसे नाम दावेदारों में शामिल बताये जा रहे है।वही अंदरूनी तौर पर यह भी चर्चा है कि पूर्व मंत्री श्रीमती रमशिला साहू व पूर्व विधायक डॉ दयाराम साहू भी इस सीट पर एक बार फिर से दावेदारी कर सकते है ।

“आकाश शर्मा ” प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष गुंडरदेही सीट से प्रबल दावेदार माने जा रहे है। राजधानी से लेकर दिल्ली तक अंदर खाने इनकी दावेदारी की चर्चा बनी हुई है।
वही कांग्रेस के विधायक कुंवरसिंह निषाद के सामने दावेदारी में चुनौती देने वालो में पूर्व विधायक स्व.प्यारेलाल बेलचंदन के नाती देवेंद्र बेलचंदन,जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुचित्रा साहू,भूपेंद्र चंद्राकर,जिला कांग्रेस के संयुक्त सचिव क्रांतिभूषण साहू,साहू समाज के नेता रामस्वरूप साहू,पूर्व ब्लाक अध्यक्ष संजय साहू प्रमुख रूप से शामिल हो सकते है।

गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान चुनावी स्थिति की बात करे तो कई लोगो का कहना है कि काम तो कांग्रेस सरकार में हुए है। विधायक के द्वारा बड़े बड़े कार्य कराए गए है।गांव के आमजन से जुड़े छोटे छोटे जरूरी व जायज काम नही हो पाए है। इसलिए भी जनता की अंदर खाने नाराजगी दिखती है। वही कई लोगो ने कहा कि मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के सरकार से हमको फायदा मिला है। कुंवरसिंह निषाद ने भी पांच वर्षों में कई महत्त्वपूर्ण कार्य कराए है।जिससे वे सन्तुष्ठ दिख रहे है। वही भाजपा के बारे में अधिकतर लोगों का मानना है कि पार्टी के अंदर नए युवा या महिला प्रत्याशी को दावेदार बनाना चाहिए जो सामाजिक और आमजनता से जुड़ाव हो जिससे पार्टी को फायदा मिल सकता है।
बहरहाल कांग्रेस द्वारा यदि प्रत्याशी रिपीट करते हुवे पुनः कुंवरसिंह निषाद को चुनाव मैदान में उतारा जाता है तो ऐसी स्थिति में कांग्रेस के लिए गुण्डरदेही जोखिम भरी राह साबित हो सकती है।वैसे इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता की दोनो ही दल सत्ता पाने एडी चोटी लगाने में अभी से जुट चुके है और भीतरी रिपोर्ट में कांग्रेस के लगभग 40 विधायकों का रिपोर्ट कार्ड भी निगेटिव आ रहा है जिसे देखते हुवे कांग्रेस नेतृत्व और भुपेश बघेल किसी तरह का रिस्क लेना नही चाहेंगे और इन सीटों पर प्रत्याशी बदलते हुए किसी नए चेहरे को मौका दिया जा सकता है ।भाजपा में भी लगभग यही स्थिति बनती दिखाई दे रही है कुछ बड़े नेताओं को छोड़ भाजपा में 60 से 70 सीटों पर बिल्कुल नए चेहरे उतारने की तैयारी है।

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व पूरी तैयारी में बड़े नेताओं का लगातार दौरा प्रधानमत्री मोदी आज रायपुर आ रहे

छत्तीसगढ़ के मामले में भाजपा नेतृत्व किसी तरह की कोई रिस्क लेना नही चाहती जिसके मद्देनजर उन्होंने अपनी तैयारी शुरू कर दी है ।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित वरिष्ठ नेताओं का दौरा और संगठन के लोगों का प्रदेश में ही जमकर एक एक सीट के लिए एक्सर साइज करना और आज प्रधानमंत्री मोदी का राजधानी रायपुर दौरा सहित हजारों करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन सब चुनावी तैयारियों का ही हिस्सा है ।केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी सुगबुगाहट है जिसमे प्रदेश के ओबीसी वर्ग के किसी बड़े नेता को मंत्री मंडल में शामिल किया जा सकता है ।

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