खबर हेमंत तिवारी राजिम / प्रशासनिक कार्यवाही में अगर सैतेलापन दिखे तो साफ साफ समझ आ जाता है की दाल में कुछ काला है ।और गड़बड़ झाला है । कल याने कि शुक्रवार को जब खनिज विभाग की टीम कुटेना और तर्रा की अवैध बिना स्वीकृति के खदानों को छोड़कर कार्यवाही के लिए चौबेबांधा पहुंच गया और वहा एक चैन माउंटेन और एक हाईवे पर कार्रवाई कर खुद की पीठ थपथपा रहे हो। और जिसे खनिज विभाग के चाटुकार इसे सबसे बड़ी कार्यवाही बता रहा है ।जबकि सही मायने में यह दिखावे की कार्रवाई साबित हो रहा है ।क्यों की साहब अपने दोस्तो की अवैध खनन को पूरी तरह से नजर अंदाज कर दिया। बता दें कि गरियाबंद जिले में इन दिनों रेत माफिया पूरी तरह सक्रिय है पैरी नदी सुखा नदी रेत में कई अवैध खदान दिन रात बदस्तूर जारी है खनिज विभाग को सब पता है पर जानबूझकर महीनों तक खनिज माफियाओं को समय देते हैं ।ताकि वह लाखो रुपया बटोर सके । और जब ज्यादा हल्ला दिखता है और अखबारों में खबरें लगती हैं तब उसके बाद दिखावे के लिए ऐसे छोटे मोटे कार्रवाई कर अपना रुतबा बरकरार रखने का नाटक करते हैं ।जबकि हकीकत बात यह है कि जब-जब अवैध रेत खदान संचालित हुआ है। तब तब प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रानिक मीडिया या पोर्टल के माध्यम से अधिकारी को सूचना मिलता है ।पर जानबूझकर कार्यवाही नहीं करते और जितना हो सके अपने तरफ से खनिज विभाग रेत माफियाओं को सहयोग करते है।और जहा स्वीकृत खदाने है वहा भी रात को।चैन माउंटेन से रेत लोड कर धड़ल्ले से अवैध खनन माफिया बेखौफ होकर कार्य कर रहे हैं।जबकि नियम की बात करे तो शाम 6 बजे के बाद रेत खनन पूरी तरह बंद रहता है । यहां रात के अंधेरे में ही माइनिंग रायलटी चोरी का खेल चलता है। बता दे की ग्राम कुटेना में एक खनिज विभाग का पुराना शागिर्द जान पहचान वाले रहते है ।जो विभाग का खास है।सूत्रों की माने तो यहां एक कांग्रेसी नेता के द्वारा यहां की खदान चलाया जा रहे हैं। और प्रदेश में सरकार होने के कारण बेखौफ है।तो बेबस विभाग के अधिकारी करे भी तो करे। कल जब कार्यवाही के दौरान ।कुछ मीडिया कर्मी ने कुटेना खदान पर कार्यवाही के लिए अधिकारी को बोले तो वे मीडिया कर्मियों की बात को अनसुना कर दिए । और इस ओर जाने क्यों ध्यान नहीं दिया।वही खनिज विभाग की इस कार्रवाई को जिले में सबसे बड़ी कार्रवाई बता कर तारीफों के पुल बांधा जा रहा है ।पर विभाग को चतुराई तो देखिए अपने आने से पहले एक दिन पहले खास दोस्तो के अवैध खनन माफिया को जानकारी दे देते है।और रेत चोर सक्रिय हो जाते ही और अपनी गाड़ियो को हटा देते है।और कुछ दिनों बाद जब माहौल शांत हो जाता है। तो फिर मौका देख फिर वही रेत चोरी का सिलसिला चालू हो जाता है। और इस भूरे सोने का खेल ऐसा ही चलता रहता है । इसी प्रकार सुखा नदी में भी चैन माउंटेंस रेत चोर द्वारा चोरी कर रहे हैं ऐसा नहीं है कि यहां की जानकारी खनिज विभाग के अधिकारी को नहीं है पर उन्होंने मानो जैसे आंख में पट्टी ही बांध ली हो और कुछ भी नहीं देखना चाहते हैं या तो साहब की मजबूरी है की खबरें प्रकाशित होने के बाद दिखावे के लिए इक्का दुक्का कार्रवाई कर अपना औपचारिकता पूरा कर लेते है। सही मायने में माने तो खनिज माफिया जीवनदायिनी नदियों को खोखला कर रहे हैं ।और जिला प्रशासन तो पूरा मन बना लिया है ।जिले के किस किस नदी का चीर हरण करवाना है । ऐसे में इन दिनों एक पंजा छाप अधिकारी।और सफेद पोश नेता का नाम काफी चर्चा में है। जो विधान सभा चुनाव के पहले नदियों का पूरा रेत बेचने पर अमादा है। यही कारण है कि इन माफियाओं को रेत,मुरूम,बोल्डर, मिट्टी कही से भी खोदाई करने का खुली छूट है ।साथ ही मुद्दा विहीन विपक्षी दल भी आवाज नही उठा पा रहे है।या फिर इनका भी सेटिंग हो गया होगा ये तो वही जानेंगे कि उनकी क्या मजबूरी या क्या वजह है । ऐसा ही होता रहा तो आने वाले समय में जीवनदायनी नदिया का अस्तित्व खतरे पड़ जायेगा तथा इसे बचाने ना कोई समाज सेवक ना कोई नेता और ना कोई सस्था सामने आ रहा है।

