बे मौसम बारिश से खेत में झड़ रहा धान।किसानो के माथे पर।चिंता की लकीरें,,,,,,,,,,,,,,,,,,,होने लगी है मुआवजे की मांग

खबर हेमंत तिवारी

पाण्डुका (छुरा )-अंचल के किसानो के माथे पर एक बार फिर चिंता की लकीरें साफ साफ दिखाई पड़ रहा है और कर्ज तले दबते दिख रहे है किसान मौसम ऐसा ही रहा तो फसल काटने में होगा मुश्किलें पाण्डुका क्षेत्र से लेकर पूरे प्रदेश में चैत्र नवरात्रि से लेकर अब तक खराब मौसम और बारिश के चलते किसानों की फसल पानी मे डूब गयी और बारिश की बूंदों से धान के दाने झड़ गए है ऐसे में रबी फसल ले रहे किसानों को अब फसल कटाई और उससे होने वाली लागत की चिंता सता रही है। तथा किसानों की फसल खराब को देखते हुए अभी तक जिला प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नही दिया जा रहा है । देखा जाए तो क्षेत्र पिछले एक सप्ताह हुई तेज बारिश ने किसानों की आधी फसल खेत मे ही झड़ गए बाकी बची हुई फसल खेत मे लेट गए और कईं जगहों पर खेत मे ज्यादा पानी भरने के कारण पूरी फसल पानी मे डूबा पड़ा है। जिसे सूखने में भी समय लगेगा ।और समय धीरे धीरे हाथ से निकल रहा है ।बीते दिनों मार्च के अंतिम दिनों में हुई तेज अंधड़ और बे मौसम बारिश ने जहां गर्मी से थोड़ी राहत तो दूसरी ओर किसानों के मुह से निवाला छीनने कहावत सामने आ गयी है। तैयार फसल की कटाई शुरू होने वाला ही था कि बारिश से खेतो में लबालब भरे हुए है। ऐसे में किसानों के फसल झड़ने पर भी जिम्मेदारों के कान खड़े नई हो रहे ।और इस पर पाण्डुका राजिम छुरा क्षेत्र के किसानों ने फसल मुवावजा की मांग तेज कर दी है। पिछले वर्ष पाण्डुका क्षेत्र में ऐसे कहि कुछ स्थानों पर ओला वृष्टि हुई थी जिसमे किसानों के पूरी फसल खराब हो गए थे लेकिन इस बार डेढ़ माह से रुक रुक हो रहे बारिश ने पूरी बरबादी खड़ा कर दी। जिससे कर्ज लेकर खेती कर रहे किसान काफी परेशान है । कटाई में अगर मौसम साथ देगा तो इस मई माह में फसल आसानी से कट जायेगा क्यों की ट्यूबवेल और नहरों के पानी से जो फसल लगा है। वे भी अब पक कर तैयार है । पर तेज हवाओं के साथ बारिश ने पकी हुई धान की। फसल का पानी में डूबने के कारण फसल में अंकुरीत होने का डर सता रहा है जिससे फसल खराब हो जाएगा और बिक्री योग्य नही रहेगा ।क्यों की रबी की फसल को दो से तीन दीन तक धूप में सुखाना पड़ता है । फिर उसकी बिक्री की जाती है।और सुखी हुई फसल का दाम भी अच्छा मिलता है और मौसम ऐसा ही रहा तो फसल कटाई कर पाना मुश्किल हो जाएगा । पालतू मवेशियों के लिए चारा पैरा की चिंता- किसानो को धान के साथ साथ पालतू मवेशियों की भी चिंता सता रही किसान अगर अपनी चैन वाली गाड़ी गीला खेत की फसल कटाई करवाते है तो इसमें किसानों को जानवरो के लिए पैरा भी उपलब्ध नही हो पाएगा जो गाड़ी चलने और पानी होने के कारण पैरा खेत मे ही सड़ जाएंगे जो जानवरो के खिलाने के लायक भी नही बचेगा ऐसे में जानवरों के खिलाने के कुछ नही बचेगा।चैन गाड़ी में लागत अधिक बचत कर पाना मुश्किल-एक तरफ फसल खराब और दूसरी तरफ कर्ज से दबे किसानो हार्डवेस्टर की कटाई प्रति एकड़ 2300 से 2500 लिया जाता और ट्रेक्टर की 500 रुपये अलग भाड़ा आता है तो दूसरी ओर मौसम की मार झेल रहे कर्ण धार किसानों की हालत को देखते हुए ।आपदा को अवसर मान कर लाभ लेने वालो ने गीली में चलने वाली चैन गाड़ी में लगभग 3500 प्रति घण्टा कर दिया है। व एक एकड़ की कटाई में डेढ़ से दो घण्टे का समय लग रहे और ट्रेक्टर का भाड़ा अलग से लग रहा ऐसे में किसान चैन गाड़ी में फसल कटाने रुचि नही दिखा रहे है जो कर्ज को बढ़ा सकता है।बीमारी से है परेशान- पिछले खरीफ की फसल में किसान तनकछेदा से परेशान थे जिसमें किसानों ने नहर से रबी के लिए मांग की थी जिस पर शाषन ने कोई ध्यान नही दिया ऐसे में अपनी सुविधा अनुसार रबी फसल लगाए लेकिन मौसम खराबी के चलते इस बार भी तनकछेदा,भूरा माहो,चाप जैसी खतरनाक बीमारी ने फसल पाने में किसानो के पसीना निकल आया है । तो दूसरी तरफ मौसम की बेरुखी ने किसानो को हताश कर दिया है । पर अभी भी किसान बीमारी से बचाने फसलों में दवाई छिड़काव कर रहे है ।ताकि कुछ तो हाथ आ जाये और ये सोच कर मंहगी से मंहगी दवाई छिड़काव कर रहे जिसका किटाणुओ पर कोई असर नही हो रहा ऐसे में किसानो का लागत और बढ़ रहा है । खाद बीज और कीटनाशन दवाई दुकान वाले मालामाल हो रहे है और किसान दिनों दिन कंगाल हो रहे है ।तथा कर्ज तले दबते ही जा रहा है । जिस कारण कर्ज चुका पाना मुश्किल हो जाता है। इस परेशानी को देखते हुएकिसानों ने की मुवावजा की मांग की है।इससे पहले भी किट प्रकोप और बारिश के चलते फसल खराब होने को लेकर पाण्डुका क्षेत्र के किसानों ने मुवावजा की मांग की जिसमे मुख्य रूप से अंचल के किसान भुनेश्वर साहू,सेवन साहू कुटेना,कुंजराम वर्मा,सुरेश साहू,विजय साहू,चांद साहू,डगेश्वर साहू, गोवर्धन साहू,बुधेश्वर साहू,डोमन साहू, भीम साहू, नीलकंठ यादव ,माधो निषाद,भुरू साहू, दुलार निषाद,मन्थिर साहू,तुलसी राम साहू,धनेश्वर साहू, राजू देवदास,उमेदि निषाद आदि

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *