स्मृति शेष पुलिस जवान पिता की कमी से परेशान पांचवी की होनहार छात्रा को 1 दिन के लिए हेडमास्टर बनाकर बढ़ाए मनोबल,,,,

आसकरण जैन की कलम स

जामगांव आर।गुरु जब शिष्य के मन की बात समझने लगे तो निश्चित मानिए गुरु की गरिमा और शिष्य का भविष्य उज्ज्वल पथ पर मंजिल के लिए गतिमान होने लगती है।कुछ ऐसा ही वाकया शासकीय प्राथमिक शाला कुम्हली में उस समय प्रगट होने लगी जब हेडमास्टर छन्नूलाल साहू कक्षा पांचवी की होनहार छात्रा निकिता देशलहरे को एक दिन के लिए हेडमास्टर की कुर्सी सौप कर छात्रा के पिता छत्तीसगढ़ सशस्त्र पुलिस बल जवान स्वर्गीय मनोज पिता की कमी के कारण बेटी निकिता देशलहरे मन में उपजीत होने वाले कुंठित विचार का ब्रेनवास करने का सकारात्मक प्रयास हेतु पहल किए। हेडमास्टर के इस प्रयास की सर्वस्त्र सराहना हो रही है।पिता के निधन बाद निकिता गांव स्कूल में पढ़ने की विवशता,,,, शासकीय प्राथमिक शाला कुम्हली प्रधान पाठक छ्न्नु लाल साहू ने बताया कि निकिता के पिता मनोज कुमार छत्तीसगढ़ सशस्त्र पुलिस मे सिपाही थे। चार साल पहले मलेरिया से उनका देहांत हो गया था। उनके तीन बच्चे हैं सभी कृष्णा पब्लिक स्कूल मे पढाई कर रहे थे। पिता के चले जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति लड़खड़ा गई ।बाद मे उनकी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति मिली। लेकिन रहने की समस्या को देखते हुए निकिता के दादा रमेश देशलहरे ने सभी बच्चों को शहर से गांव लाकर शासकीय स्कूल मे भर्ती कराया। दादा पालक ने प्रधान पाठक छन्नूलाल साहू को अपनी स्थिति से अवगत कराया । चुंकि सर्वसुविधायुक्त निजी विद्यालय से पढ़ने के आदी बच्चों को ग्रामीण परिवेश मे ढलने मे असुविधा होती है। बच्चों का शैक्षणिक स्तर बहुत अच्छा था। प्रधान पाठक ने बच्चों और पालक को विश्वास दिलाया कि अभाव मे अच्छी शिक्षा प्राप्त की जा सकती हैं।उच्च शिक्षित एचएम ने बच्चे को अपडेट रखने का सोचा तरकीब,,,, हेडमास्टर ने बच्चों को बाल मनोविज्ञान को समझा और बच्चों को किसी प्रकार की शैक्षणिक स्तर पर कमी नहीं होने देने के लिए भरोसा दिलाया। बच्चों को प्रतिदिन मानसिक रूप से संबल प्रदान किया कि पढ़ाई का संबध मन से और अनुशासित रह उच्च स्तर हासिल किया जा सकता है। निकिता एक समझदार और होशियार छात्रा है।उनकी जिज्ञासु प्रकृति और पिता की स्मृति बच्चे को बार बार मायुस कर देती थी। वह अपने पिता के समान पुलिस बनने की इच्छा प्रकट करती थी।पुलिस अफसर बनना चाहती है निकिता,,,, प्रधान पाठक ने बच्चे की मनःस्थिति को भांपते हुए उन्हें पुलिस विभाग के बड़े अफसर बनने के बारे मे बताया। अब निकिता भविष्य मे उच्च शिक्षा प्राप्त करके आई पी एस अधिकारी बनने की इच्छा प्रकट की। यद्यपि अभी बच्ची छोटी है लेकिन सपनों का अंकुरण भी प्रारंभिक शिक्षक और शिक्षा से ही प्रस्फुटित होती है। प्रधान पाठक स्वयं उच्च शैक्षणिक योग्यता और विधि स्नातक हैं। बच्चों को मानसिक रूप से तैयार करने नायब तरीके इजात करते रहते हैं।बेटी पढ़ाओ सपने साकार कराओ पहल,,,, आधुनिक परिप्रेक्ष्य मे महिला सशक्तिकरण और बेटी पढ़ाओ के शासकीय और सामाजिक उद्देश्य को साकार रूप देने को पहल करते हुए प्रतिकात्मक रूप से विभागीय प्रशासन के प्रथम पायदान प्रधान पाठक की कुर्सी पर एक दिन के लिए निकिता देशलहरे को सौंप दी गई। विद्यालयीन कार्यों का संचालन कैसे किया जाता है इसकी जानकारी दी गई। पद भार सौपते हुए प्रधान पाठक छन्नूलाल साहू ने नियुक्ति पत्र का नमूना कु निकिता को दी। इस अवसर पर संस्था के शिक्षिका श्री मती लीना ठाकुर, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य और सहपाठी छात्राएं उपस्थित थे। प्रधान पाठक छन्नूलाल साहू के अनुसार,इस तरह के क्षणिक अकादमिक गतिविधियों से विद्यार्थियों मे जिम्मेदारी की अनुभूति होती है और मानसिक बौद्धिक क्षमता बढ़ती है।

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