दुर्ग जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव : कांग्रेस में सामंजस्य की चुनौती, भाजपा की उम्मीद क्रॉस वोटिंग


दुर्ग जिला पंचायत अध्यक्ष के रिक्त पद पर चुनाव कराया जाना है। राजनीतिक दलों में इसके लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। सदन में संख्या बल के आधार पर अध्यक्ष का पद एक बार फिर कांग्रेस के खाते में जाना तय माना जा रहा है, लेकिन दावेदारों में किसी एक नाम पर सामंजस्य कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। इधर संख्या बल में करीब आधे होने के बाद भी भाजपा समर्थितों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। भाजपा की उम्मीद कांग्रेस समर्थितों के असंतोष से संभावित क्रॉस वोटिंग पर है।
जिला पंचायत अध्यक्ष शालिनी यादव के निधन के कारण यह पद खाली हुआ है। शालिनी यादव जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 6 से सदस्य के रूप में निर्वाचित होकर फरवरी 2020 में अध्यक्ष बनीं थीं। प्रावधान के मुताबिक अब मौजूदा कार्यकाल के बचे हुए समय में सदन के संचालन के लिए निर्वाचित सदस्यों में से किसी एक का नए अध्यक्ष के रूप में चुनाव कराया जाना है। इसके लिए 4 मई को विशेष सम्मिलन बुलाया गया है। कलेक्टर ने इस संबंध में पत्र जारी कर दिया है। ऐसे में अब नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल स्वाभाविक है।
12 सदस्यीय जिला पंचायत में मुख्य चुनाव में कांग्रेस समर्थित 7 और भाजपा के 5 सदस्य निर्वाचित हुए थे। फरवरी 2020 में कराए गए अध्यक्ष के चुनाव में दोनों ही दलों को उनके समर्थितों के सभी वोट पड़े थे। इस तरह शालिनी ने 2 मतों के अंतर से जीत दर्ज थी। इस बार गणित कुछ बदल गया है। क्षेत्र क्रमांक 10 के सदस्य मोरध्वज साहू पाला बदलकर कांग्रेस में चले गए हैं। इसलिए कांग्रेस समर्थितों की संख्या अब भी 7 है, लेकिन भाजपा की संख्या केवल 4 रह गई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष का पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है। नया चुनाव भी इसी आरक्षण के आधार पर होना है। कांग्रेस में योगिता चंद्राकर और पुष्पा यादव इस वर्ग से हैं। योगिता मंत्री ताम्रध्वज साहू के दुर्ग ग्रामीण से आती हैं व उनकी करीबी मानी जातीं है, वहीं पुष्पा यादव मंत्री गुरू रूद्र कुमार की नजदीकी और अहिवारा से हैं। पुष्पा की मंत्री ताम्रध्वज साहू के खेमे में भी दखल बताई जाती है।
भाजपा में भी आरक्षित वर्ग ओबीसी की दो महिला सदस्य है। इनमें पूर्व अध्यक्ष माया बेलचंदन और हर्षा चंद्राकर शामिल है। पूर्व अध्यक्ष माया बेलचंदन को पिछले चुनाव में शालिनी यादव से पराजय का सामना करना पड़ा था। ऐसे में उनकी दावेदारी की संभावना कम बताई जा रही है। वहीं हर्षा चंद्राकर काफी तेजतर्रार मानी जाती है। सीएम के गृह विधानसभा पाटन से निर्वाचित होने और सांसद विजय बघेल की नजदीकी होने के कारण उनकी दावेदारी पक्की मानी जा रही है।

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