छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने एकत्रित किया 100 टन कांसा

उतई ।प्रदेश की एकमात्र गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना जो 2015 से लगातार छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़ियों के सम्मान के लिए लड़ रही है, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के गांव गांव में बूढ़ादेव रथ भ्रमण कर रहा है और लोगों से कांसा दान की अपील कर दान में सैकड़ों टन कांसा अब तक इकठ्ठा कर चुका है इस कांसे से राजधानी रायपुर के बूढ़ा तालाब में 71 फिट ऊंचा बूढ़ादेव स्थापित की जानी है, बूढ़ादेव यात्रा के दूसरे चरण के बारे में बताते हुए ऋषि साहू ने कहा कि अब तक लगभग 100 टन कांसा दान में लिया जा चुका है प्रदेशभर से छत्तीसगढ़िया समाज उत्साह से अपने प्रदेश के कुलदेवता स्थापना के इस महामहोत्सव में शामिल हो रहा है,लोग बढ़ चढ़ कर कांसा दान कर रहे हैं प्रदेश और देश के बाहर रहने वाले छत्तीसगढ़िया भी इस महाउदीम का हिस्सा बन रहे हैं, कोई अपनी शादी में मिले कांसे का बर्तन भेंट कर रहा है तो कोई इस महाउदीम में घर के पुराने पीतल कांसा और तांबे का बर्तन बूढ़ादेव के लिए चढ़ा रहा है।

बूढ़ादेव यात्रा के पहले चरण में गांव गांव से लाया गया है देवठानों से मिट्टी

यात्रा के संदर्भ में बताते हुए गजेंद्ररथ कहते हैं कि इससे पहले वर्ष 2022 में ऐसे यात्रा के पहले चरण का आयोजन कर छत्तीसगढ़ के गांव गांव से देवी देवताओं के स्थलों से मिट्टी एकत्र की गई थी जिससे बूढ़ा तालाब में एक चबूतरा बनाया गया है और अब दूसरे चरण के कांसे से बूढ़ादेव की 71 फिट ऊंची प्रतिमा बनाई जाएगी इसके लिए प्रदेशभर के गांव से हर घर से कांसा दान लिया जा रहा है, प्रदेश के हर ब्लॉक में एक रथ घूम रहा है जिसमें लोग कांसा चढ़ा रहे हैं अब तक लगभग 100 टन कांसा मिलने की सूचना है,कांसे का बाजार भाव अभी लगभग 2 हजार रुपये किलो है ऐसे में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने प्रदेशभर से लगभग 10 करोड़ का कांसा संग्रह कर लिया है।

8 अप्रैल को मुख्य कार्यक्रम में दिखेगा 100 टन कांसे का पहाड़

25 फरवरी से छत्तीसगढ़ में बूढ़ादेव यात्रा पार्ट-2 की शुरूआत हुई है और मुख्य कार्यक्रम 8 अप्रैल को राजधानी के बूढ़ा तालाब स्थित आउटडोर स्टेडियम में होगा जिसमें लाखों की संख्या में छत्तीसगढ़िया समाज जुटेगा और इस आयोजन में ही प्रदेशभर से लाये गए कांसे का बर्तन एकजाई की जाएगी जिसे विशेष पूजा के बाद कारीगर को सौंपने की प्रक्रिया होगी, इस दिन यहांपर कांसे का पहाड़ देखने को मिलेगा जिसे लेकर प्रदेशभर के लोगों में कौतूहल बना हुआ है, उस मंजर को देखने लाखों लोग छत्तीसगढ़ के कोने कोने से राजधानी पहुंचने वाले हैं।

छत्तीसगढ़िया आस्था का प्रतीक बूढ़ादेव

बूढ़ादेव की प्रतिमा को लेकर कहा जाता है कि यह प्रदेश के पुरखों के प्रति आस्था स्तम्भ है जिसे प्रकृति से जोड़कर देखा जाता है, जैसे कि जोहार शब्द प्रकृति के अनन्त उपहारों के लिए धन्यवाद है वैसे ही बूढ़ादेव हमारे पुरखों के इस प्रकृति में शामिल होने का प्रतीक है।

छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान के स्थापना का पर्व

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के ऋषि साहू की माने तो बूढ़ादेव स्थापना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ियों के स्वाभिमान पुनर्जागरण का पर्व है, उनका मानना है कि राज्य निर्माण के बाद से ही छत्तीसगढ़ियों से छल किया गया इस प्रदेश में न तो यहां की भाषा, संस्कृति स्थापित हो पाई और न ही यहां के मूल निवासियों को उनका अधिकार ही मिला लगातार परप्रांतियों के दमन ने छत्तीसगढ़ियों के मन में आक्रोश भरा और अब वही आक्रोश एक गैर राजनीतिक संगठन का रूप ले चुकी है जो अपने लोगों अपनी परम्पराओं अपनी मान्यताओं के लिए तटस्थ है।

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