पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमति रमशिला साहू पूर्व विधायक डा दयाराम साहू ने प्रदेशवासियों ,अंचलवासियो को दी चैत नवरात्र की बधाई

  • नव वर्ष का प्रारंभ आनंद उल्लासमय हो _ रमशिला साहू

रानीतराई. छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमति रमशिला साहू, पूर्व विधायक डा दयाराम साहू ,प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा विशेष आमंत्रित सदस्य धनराज साहू ने देश व प्रदेशवासियों सहित अंचलवासियों को चैत नवरात्र प्रतिपदा नव वर्ष पर हार्दिक बधाई देते हुए देश ,प्रदेश अंचल में के सभी जीवों की उत्थान ,सुख ,शांति ,समृद्धि की कामना किए है ।

पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमति रमशिला साहू के कहा कि चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पाड़वा या वर्ष प्रतिपदा या उगादि (युगादि) कहा जाता है । इस दिन हिन्दू नववर्ष का आरम्भ होता है । ‘गुड़ी’ का अर्थ ‘विजय पताका’ होता है । इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारंभ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है ,चैत्रमास की शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि की उत्पति हुई थी और इस दिन कुछ ऐसी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं हुई हैं जिसके कारण इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।भगवान ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि का सर्जन ,मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषक ,माँ दुर्गा के नवरात्र व्रत का शुभारम्भ,उज्जैनी सम्राट विक्रमादित्‍य द्वारा विक्रमी संवत्प्रारम्‍भ,शालिवाहन शक संवत् (भारत सरकार का राष्‍ट्रीय पंचांग) का प्रारंभ , श्रीमती साहू ने कहा कि
नूतन वर्ष का प्रारम्भ आनंद-उल्लासमय हो इस हेतु प्रकृति माता भी सुंदर भूमिका बना देती हैं…!!! इसी दिन से नया संवत्सर शुरू होता है । चैत्र ही एक ऐसा महीना है, जिसमें वृक्ष तथा लताएँ पल्लवित व पुष्पित होती हैं ।

पूर्व विधायक डा दयाराम साहू ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि शुक्ल प्रतिपदा का दिन चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस माना जाता है । ‘उगादि‘ के दिन ही पंचांग तैयार होता है । महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने इसी दिन से सूर्योदय से सूर्यास्त तक…दिन, महीना और वर्ष की गणना करते हुए ‘पंचांग ‘ की रचना की थी । वर्ष के साढ़े तीन मुहूर्तों में गुड़ीपड़वा की गिनती होती है । इसी दिन भगवान श्री राम ने बालि के अत्याचारी शासन से प्रजा को मुक्ति दिलाई थी ।
भारतीय नववर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही माना जाता है और इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारंभ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है ।आज भी जनमानस से जुड़ी हुई यही शास्त्रसम्मत कालगणना व्यवहारिकता की कसौटी पर खरी उतरी है । इसे राष्ट्रीय गौरवशाली परंपरा का प्रतीक माना जाता है ।
विक्रमी संवत किसी की संकुचित विचारधारा या पंथाश्रित नहीं है । हम इसको पंथ निरपेक्ष रूप में देखते हैं । यह संवत्सर किसी देवी, देवता या महान पुरुष के जन्म पर आधारित नहीं, ईस्वी या हिजरी सन की तरह किसी जाति अथवा संप्रदाय विशेष का नहीं है।
प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा विशेष आमंत्रित सदस्य व संयोजक न्याय प्रकोष्ठ तहसील साहू समाज पाटन धनराज साहू ने कहा कि प्रतिपदा का यह शुभ दिन भारत राष्ट्र की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है । ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्रमास के प्रथम दिन ही ब्रह्मा ने सृष्टि संरचना प्रारंभ की । यह भारतीयों की मान्यता है, इसीलिए हम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्षारंभ मानते हैं । आज भी हमारे देश में प्रकृति, शिक्षा तथा राजकीय कोष आदि के चालन-संचालन में मार्च, अप्रैल के रूप में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही देखते हैं । यह समय दो ऋतुओं का संधिकाल है । प्रतीत होता है कि प्रकृति नवपल्लव धारण कर नव संरचना के लिए ऊर्जस्वित होती है । मानव, पशु-पक्षी यहां तक कि जड़-चेतन प्रकृति भी प्रमाद और आलस्य को त्याग सचेतन हो जाती है ।
इसी प्रतिपदा के दिन से उज्जैनी नरेश महाराज विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांत शकों से भारत-भू का रक्षण किया और इसी दिन से काल गणना प्रारंभ की । उपकृत राष्ट्र ने भी उन्हीं महाराज के नाम से विक्रमी संवत कह कर पुकारा । सभी ने 22 मार्च से प्रारंभ नौ दिनों की नव रात्रि पर्व पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं देते माता रानी से सभी की मनोकामना पूर्ण की कामना किए है ।

 

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